जानें कब तक चलेगी लखनऊ में अंडरग्राउंड मेट्रो
- दो साल में होगा अंडरग्राउंड मेट्रो का निर्माण
- 1185 करोड़ आएगा खर्च
- एक जून से भूमिगत निर्माण करने की है तैयारी
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दुबई की गुलेरमक लिमिटेड अपने भारतीय सहयोगी टीपीएल के साथ मिल कर लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना के भूमिगत खंड का सिविल निर्माण करेगी।
कुल 1185 करोड़ रुपये में ये निर्माण कंपनी करेगी। मंगलवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई एलएमआरसी बोर्ड की मीटिंग में कंपनी को यह काम देने की हरी झंडी दे दी गई।
कंपनी चारबाग के रैंप से लेकर केडी सिंह बाबू स्टेडियम तक 3.44 किलोमीटर तक निर्माण करेगी। इस रूट पर आर्किटेक्चर डिजाइनिंग से लेकर कट एंड कवर विधि से स्टेशनों का निर्माण, टनल निर्माण बाकी सारे काम कंपनी को करने होंगे।
इन कामों के लिए कंपनी को 24 महीने का समय एलएमआरसी ने दिया है। एक जून से भूमिगत मेट्रो का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद की जा रही है।
करीब तीन महीने की टेंडर प्रक्रिया एलएमआरसी ने मंगलवार को खत्म करते हुए गुलेरमक-टीपीएल को ये काम दे दिया। इस काम को करने के लिए डोगस-सोमा जेवी, इटेलियन-थाई डवलपमेंट पब्लिक कंपनी लिमिटेड और एफकांस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को शामिल किया गया था।
मगर सबसे कम 1185 करोड़ रुपये का ऑफर देकर गुलेरमक-टीपीएल ने ये टेंडर हासिल कर लिया। सोमा डोगस ने 1244 करोड़, टेलियन-थाई डवलपमेंट पब्लिक कंपनी लिमिटेड ने 1379 करोड़ और एफकांस ने 1401 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था।
चारबाग में पेट्रोल पंप से थोड़ा पहले बनेगा रैंप
जबकि एलएंडटी लिमिटेड के उसके साझीदार एसयूसीजीजेवी के साथ बिड प्रक्रिया को रिजेक्ट कर दिया गया है। इसी प्रक्रिया पर सोमवार को मुहर लगा दी गई।
चारबाग में पेट्रोल पंप से थोड़ा पहले रैंप बनाया जाएगा। सबसे पहला अंडरग्राउंड स्टेशन हुसैनगंज पर बनेगा। इसके बाद सचिवालय और सबसे आखिर स्टेशन हजरतगंज में एलआईसी बिल्डिंग के पास बनेगा।
आगे केडी सिंह बाबू स्टेडियम से पहले दोबारा रैंप बनाया जाएगा। जहां से मेट्रो रेल बाहर निकल कर दोबारा केडी सिंह बाबू स्टेडियम से मुंशीपुलिया के बीच उपरगामी कॉरिडोर पर चलेगी।
निर्माण के दौरान कट एंड कवर विधि का इस्तेमाल होने से कभी मिट्टी नहीं ढहेगी। इस काम को करने के लिए जर्मन तकनीकी की टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) की मदद ली जाएगी। कुल दो टीबीएम लाई जाएंगी।
सबसे पहले 16 मीटर नीचे तक टनल की चौड़ाई में दोनों ओर खोदाई कर के एक डायाफ्राम वॉल बनाई जाएगी। इस काम में करीब आठ महीने का समय लगेगा।
इस वॉल के निर्माण में करीब आठ महीने का समय लगेगा। इसके बाद में कट एंड कवर विधि से टीबीएम यहां सुरंग बनाने का काम करेगी।