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रक्षा क्षेत्र का पहला संस्थान होगा डीटीटीसी, विद्यार्थी बनाएंगे रक्षा उत्पाद, डीआरडीओ करेगा मदद

Tue, 28 Dec 2021 02:15 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 28 Dec 2021 02:15 AM IST
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DRDO are going to make DTTC  in lucknow
डिफेंस टेक्टनोलॉजी एंड टेस्ट सेंटर बनने से विद्यार्थियों को मिलेगा फायदा। (फोटो ः प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
नीरज ‘अम्बुज’
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रक्षा उत्पादों के निर्माण व अनुसंधान में स्टूडेंट्स भी अहम भूमिका निभाएंगे। डीआरडीओ उनका स्किल डेवलपमेंट करेगा। साथ ही रक्षा उपकरण बनाने की ट्रेनिंग भी देगा।
इसके लिए रक्षा क्षेत्र का देश का पहला डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड टेस्ट सेंटर (डीटीटीसी) डीआरडीओ बनाने जा रहा है। इसे लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
गत रविवार को अमौसी में आयोजित समारोह में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने देश के इस पहले केंद्र का शिलान्यास किया। इसके अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइल की निर्माण इकाई भी लखनऊ में बनाई जाएगी।
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इन दो शिलान्यासों से लखनऊ का कायाकल्प होना तय माना जा रहा है। डीआरडीओ से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि डीटीटीसी अमौसी में 22 एकड़ में बनाया जाएगा।
यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा, जहां नए स्टार्टअप, एमएसएमई व व्यक्तिगत या संस्थान के स्तर पर अनुसंधान कर रहे विद्यार्थियों को रक्षा उत्पादों के निर्माण की ओर प्रोत्साहित किया जाएगा।
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डीटीटीसी अति सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को सहायता मुहैया कराएगा। इसके तहत उन्हें रक्षा क्षेत्र के उपकरणों की डिजाइन, टेस्टिंग, मूल्यांकन में डीआरडीओ मदद करेगा।
साथ ही उन्हें तकनीकी के स्तर पर महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराएगा। अभी तक ये सॉफ्टवेयर सिर्फ रक्षा क्षेत्र की सरकारी एजेंसियों के पास ही रहता है।
पर, इस केंद्र के जरिये निजी क्षेत्र के लोगों को भी इन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा निर्माण स्तर पर पहुंचने के बाद थ्री डी प्रिंटर की सुविधा भी दी जाएगी।
इसके अंतर्गत एक प्रोजेक्ट तैयार किया गया है, इसमें विद्यार्थियों को रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उनका पहले कौशल विकास किया जाएगा, फिर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि यदि अनुसंधान कर रहे किसी स्टूडेंट ने रक्षा क्षेत्र का कोई उपकरण बनाया तो उसकी डिजाइन की टेस्टिंग से लेकर सरकार को अप्रोच कैसे करना है और फिर उसके मूल्यांकन तथा निर्माण तक में डीआरडीओ का यह केंद्र मदद करेगा।
डीआरडीओ की 60 प्रयोगशालाएं करेंगी मदद
प्रोपेंलेंट, एनर्जी, फायर, पैराशूट, एवियोनिक्स आदि के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए डीआरडीओ की देश में मौजूद 60 प्रयोगशालाएं भी अनुसंधान व निर्माण में मदद करेंगी। इससे रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भूमिका को तेजी से बढ़ाया जा सकेगा। साथ ही विद्यार्थियों को भी प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

डीआरडीओ की ये प्रयोगशालाएं देंगी सहयोग
एडवांस सेंटर फॉर एनर्जेटिक मैटेरियल, एडवांस न्यूमेरिकल रिसर्च एंड एनेलिसिस ग्रुप, एडवांस सिस्टम लैब, सेंटर फॉर एयर बोर्न सिस्टम, सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स, ऐरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टिबलिशमेंट, सेंटर फॉर पर्सनल मैनेजमेंट ट्रेनिंग, डिफेंस एवियोनिक्स रिसर्च इस्टेबिलशमेंट, डिफेंस लैबोरेटी, गैर टर्बाइन रिसर्च इस्टेबिलशमेंट सहित साठ प्रयोगशालाएं अनुसंधान व निर्माण में मदद करेंगी।
इन छह सेक्टर्स में काम करेगा डीटीटीसी
- कौशल विकास केंद्र
- डीप टेक इनोवेशन एंड स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर
- डिजाइन एंड सिमुलेशन केंद्र
- जांच व मूल्यांकन केंद्र
- उद्योग केंद्र 4.0/डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग
- व्यापार विकास केंद्र
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