राज्यपाल न सही, हर दिल 'अज़ीज' रहेंगे कुरैशी
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जलालाबाद, कन्नौज से आया दीपचंद गूंगा-बहरा है। राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी के बराबर में कुर्सी पर बैठकर मदद की उम्मीद में प्रार्थना पत्र बढ़ाते हुए उसके चेहरे पर संतोष और गर्व के भाव हैं। राज्यपाल उसके प्रार्थनापत्र को गौर से पढ़ते हैं।
उन्हें पता लगता है कि फरियादी गूंगा-बहरा है तो इशारों ही इशारों में उसे कुछ इस तरह समझाते हैं कि टूटे मन से आया दीपचंद मंद-मंद मुस्कुराता हुआ बाहर निकलता है।
सबके लिए खोले राजभवन के द्वार
राजभवन में राज्यपाल के जनता दर्शन में आए लोगों की दिक्कतें कितनी दूर होंगी, यह तो वक्त बताएगा लेकिन उनसे मिलने आए लोगों के चेहरे पर सुकून जरूर पढ़ा जा सकता है।
डॉ. अजीज कुरैशी ने राज्यपाल की शपथ लेने के बाद आम लोगों के लिए राजभवन के दरवाजे खोले हैं। वे प्रत्येक बुधवार को सुबह 11 से दोपहर एक बजे के बीच आम लोगों से मिलते हैं, उनकी समस्याएं सुनते हैं।
हर दिल जख्मी है, हर सीने में दर्द
जनता दर्शन के दौरान इस संवाददाता ने राज्यपाल से पूछा कि आम लोगों से मिलने का उनका अनुभव कैसा रहा?
डॉ. कुरैशी बोले, यहां हर दिल जख्मी है, हर सीने में दर्द है। उन्हें मरहम की तलाश है। मैं कोशिश कर रहा हूं कि जख्मों पर मरहम लगा सकूं, उन्हें कुछ तसल्ली मिल सके।
मंत्रियों-अधिकारियों को सद्बुद्घि दे भगवान
जख्मों को कितनी राहत मिलेगी, यह कहना मुश्किल है। काम तो सरकारी मशीनरी को करना है। मैं तो लोगों के दुख-दर्द मंत्रियों, अधिकारियों को फॉरवर्ड कर देता हूं।
इसके बाद भगवान से प्रार्थना करता हूं कि उनके काम करने वालों (मंत्रियों-अफसरों को) को वे सद्बुद्धि दें, ताकि लोगों का दर्द कम हो सके।
अच्छी पहल, लेकिन छोटा कार्यकाल...?
इस सवाल पर राज्यपाल तपाक से कहते हैं, कार्यकाल छोटा या बड़ा नहीं होता। गीदड़ की सौ साल की जिंदगी से शेर की एक दिन की जिंदगी बेहतर है।
यह महत्वपूर्ण नहीं कि आप कितने दिन कहां रहे, अहम बात यह है कि आम आदमी आपको कितना याद रखता है? वे कहते हैं, मुझे बड़े लोगों की परवाह नहीं है।
नंगे बदन, फटे जूते और भूखे पेट आने वालों को अगर कुछ राहत मिल सके तो मेरे लिए यही काफी है। राज्यपाल के आम लोगों से मिलने की परंपरा पर वे कहते हैं, जिंदगी भर मैं आम आदमी से मिलता रहा हूं।
कई बार विधायक रहा, मंत्री बना, सांसद बना, निगम-बोर्डों में चेयरमैन रहा, कांग्रेस का महासचिव रहा। मैं राजनीति में पैराशूट या हेलीकॉप्टर से नहीं उतरा। खुद दरी, पट्टे बिछाए हैं, झाड़ू लगाई है। आम आदमी के दुख-दर्द को जानता हूं।
कायम रहे गंगा-जमुनी तहजीब
डॉ. कुरैशी कहते हैं, यूपी में बतौर राज्यपाल मेरा कार्यकाल बहुत यादगार और खूबसूरत रहा। यहां के लोग, खास तौर से लखनवी, उम्मीदजदा और प्रगतिशील हैं। यकीन से भरपूर हैं।
मैं चाहता हूं कि प्रदेश में शांति, सद्भावना और भाईचारा कायम रहे। यूपी का झंडा देश में बुलंद रहे, सूबा तरक्की की तरफ बढ़े।
नौकरी से लेकर इलाज तक के लिए गुहार
कुरैशी ने कहा, मरहम लगाकर दुख-दर्द कम करने की कोशिश नंगे बदन, भूखे पेट, फटे जूते वालों को याद रहूं, बस यही काफी है।
राज्यपाल के जनता दर्शन में लोग नौकरी से लेकर इलाज तक की गुहार लगाने आ रहे हैं। राज्यपाल ने फरियादियों को बेबाकी से बताया कि उनके प्रार्थनापत्र पर कार्रवाई हो सकती है या नहीं?
किलेबंद राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात के लिए आने वालोंका पूरा खयाल रखा जा रहा है। राजभवन के गेट नंबर-2 पर पहुंचते ही सुरक्षाकर्मी बिना कुछ पूछे आगंतुक के लिए ससम्मान गेट खोलते हैं और स्वागत कक्ष में भेज देते हैं।
मुलाकातियों का पूरा खयाल
स्वागत कक्ष में नाम-पता नोट कर सुरक्षा जांच के बाद उन्हें जनसुनवाई कक्ष में भेज दिया जाता है। वहां से पांच-पांच लोगों को राज्यपाल से मुलाकात के लिए संतुष्टि भवन भेजा जाता है।
इसके बराबर वाले कक्ष में राज्यपाल समस्याएं सुनते हैं। कुछ कुर्सियां और सोफे रखे हैं। राज्यपाल आगंतुक को अपने बराबर वाली कुर्सी पर बैठाकर समस्याएं सुनते हैं।
प्रार्थनापत्र पढ़ने के बाद उस पर कार्रवाई के लिए अपने स्टाफ को निर्देश देते हैं। पहले घंटे में 51 लोग मिलने आए दोपहर 12.05 बजे तक 51 लोग राज्यपाल से मिलने के लिए जनसुनवाई भवन पहुंचे थे। इनमें से अधिकतर लोगों की उनसे मुलाकात हो चुकी थी।