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Gonda: हाईकोर्ट की डबल बेंच ने प्रबंधक गंगाप्रसाद की बर्खास्तगी को ठहराया जायज
Mon, 02 Dec 2024 09:04 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा
अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 02 Dec 2024 09:04 PM IST
सार
जिलाधिकारी के आदेश पर एकल बेंच के फैसले पर डबल बेंच ने रोक लगा दी है। मामले में जिलाधिकारी ने वित्तीय अनियमितता की रिपोर्ट पर प्रबंधक को हटाने का आदेश दिया था।
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बर्खास्त प्रबंधक गंगा प्रसाद मिश्र
- फोटो : amar ujala
विस्तार
शहीदे आजम सरदार भगत सिंह (टामसन) इंटर काॅलेज के बर्खास्त किए गए प्रबंधक गंगा प्रसाद मिश्र को एक बार फिर झटका लगा। जिलाधिकारी के फैसले पर रोक लगाए जाने के आदेश पर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने रोक लगा दी। इससे जिलाधिकारी का आदेश बहाल हो गया है। इससे कार्यकारी प्रबंधक सूर्य प्रसाद मिश्र अपने पद पर बने रहेंगे। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने यह फैसला कार्यकारी प्रबंधक की स्पेशल अपील को स्वीकार करते हुए दिया है।
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हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी के आदेश को बहाल रखा है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने रिट कोर्ट (एकलपीठ) के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने रिट कोर्ट में पांच दिसंबर 2024 को प्रकरण की सुनवाई तय की है। काॅलेज की पदेन अध्यक्ष जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने शिकायत पर हुई जांच में मिली कतिपय अनियमित्ताओं और भ्रष्टाचार के आरोप में प्रबंधक गंगा प्रसाद मिश्र को 15 अक्तूबर 2024 को प्रबंधक पद से हटाते हुए उनकी सदस्यता भी समाप्त कर दी।
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जिलाधिकारी ने प्रबंध समिति के सदस्य सूर्य प्रसाद मिश्र को कार्यकारी प्रबंधक नियुक्त किया लेकिन पदच्युत प्रबंधक गंगा प्रसाद मिश्र ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर जिलाधिकारी के आदेश को विधि विरुद्ध बताया और निरस्त करने की मांग की। 14 नवंबर 2024 को प्रकरण की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह ने जिलाधिकारी के आदेश को स्थगित करने का आदेश पारित किया और जनवरी 2025 के प्रथम सप्ताह में याचिका की अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। इस बीच नवनियुक्त कार्यकारी प्रबंधक सूर्य प्रसाद मिश्र ने आदेश की वैधता को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में स्पेशल अपील दाखिल की।
27 नवंबर 2024 को स्पेशल अपील की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एआर मसूदी और सुभाष विद्यार्थी ने स्पेशल अपील स्वीकार करते हुए रिट कोर्ट द्वारा पारित स्थगनादेश निरस्त कर दिया। न्यायालय ने कहा कि अंतरिम आदेश पारित करने के पूर्व रिट कोर्ट में दोनों पक्षों को सुना जाना चाहिए।