लखनऊ। जेठ का पहला बड़ा मंगल शहरियों से सादगी और श्रद्धा के साथ मनाया। घरों में हनुमानजी की पूजा-अर्चना कर परिवारीजनों ने एक साथ सुंदरकांड का पाठ किया। भगवान को भोग लगाया और कोरोना संक्रमण से जल्द से जल्द छुटकारा दिलाने की प्रार्थना की। वहीं, लॉकडाउन के चलते बंद हनुमान मंदिरों में पुजारी ने बजरंगबली का सिंदूर से भव्य शृंगार किया और चोला बदलकर भोग लगाया। कुछ मंदिरों में ऑनलाइन हनुमानजी की आरती का प्रसारण किया गया, जिससे भी भक्त जुड़े। उधर, भंडारों की जगह कुछ मंदिरों व श्रद्धालुओं की ओर से जरूरतमंदों को खाना खिलाया और हनुमत भंडारे का वितरण किया। लॉक डाउन के चलते जेठ के पहले बड़े मंगल पर शहर के तमाम हनुमान मंदिर बंद ही रहे। चर्चित हनुमान सेतु मंदिर में सोमवार आधी रात के बाद पुजारियों के दल ने केसरीनंदन की आरती उतारी और उनका चोला बदला। सुबह 6 बजे आचार्य चंद्रकांत द्विवेदी समेत पुजारियों के दल ने बजरंगबली की आरती की। मंदिर के द्वार बंद रहने के बावजूद सुबह से शाम तक सड़क से गुजरते शहरियों ने मंदिर के गेट पर ही फूल आदि चढ़ाकर बजरंगबली को प्रणाम किया। चालीसा पाठ किया। अलीगंज के नए-पुराने हनुमान मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर डंडिया, निशातगंज रोड, दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर पक्का पुल, लेटे हनुमान मंदिर के बाहर भी सुबह से दोपहर के बीच ऐसे ही नजारे दिखे। राजेंद्र नगर स्थित महाकाल मंदिर में भोले का का हनुमत शृंगार किया गया। पुजारियों के दल ने सुंदरकांड का पाठ किया। घरों में हुआ सुंदरकांड और हनुमान चालीसा पाठ लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए श्रद्धालुओं ने घर पर ही जेठ के पहले बड़े मंगल पर सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ किया और गुड़ चने का भोग लगाया। संस्कृत विद्वान और संस्कृत भजन गायक सोमेंद्र शुक्ला ने परिवार के साथ सुंदरकांड का पाठ किया। गोमती नगर निवासी शिक्षिका नीलम सिंह ने भी ऐप के माध्यम से अमेरिका में रह रहे परिजनों और लखनऊ के अन्य सहेलियों के साथ संगीतमय सुंदरकांड का पाठ किया। चौक और इंदिरा नगर निवासी हनुमत कृतियों के संग्रह कर्ताओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रभु कृपा बरसाई। भंडारों की रौनक से सूना रहा शहर कदम-कदम पर हनुमत गीतों और भजनों के साथ पंडालों में लगते भंडारे और वहां बंटती सब्जी-पूड़ी, छोला-चावल, कढ़ी-चावल, शरबत, हलवा चना के जायकों का नजारा इस बार नगर में नहीं दिखा। लॉकडाउन के चलते पहली बार ऐसा हुआ जब जेठ के पहले बड़े मंगल पर नगर के मार्ग प्याऊ और भंडारों की रौनक से सूने रहे। मंदिरों के आसपास मेले व भंडारों का आयोजन भी नहीं हुआ। कुछ हनुमान भक्त समाजसेवियों ने जरूरतमंदों को भोजन खिलाया और राशन वितरण किया। मनकामेश्वर मंदिर की ओर से जरूरतमंदों को मंदिर के आसपास भोजन बांटा गया तो प्याऊ से शिकंजी बांटी।