अब फर्स्ट रेफरल यूनिट पर तैनात होंगी चिकित्सक जोड़ियां, डॉक्टर जोड़ी बनाकर कर सकते हैं आवेदन
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आपात स्थिति में जटिल प्रसव कराने के लिए डॉक्टरों की जोड़ी को इमरजेंसी ऑब्स्टेट्रिक केयर (ईमॉक) और लाइफ सेविंग एनेस्थीसिया स्किल (एलएसएएस) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद इनकी तैनाती फर्स्ट रेफरल यूनिट पर की जाएगी ताकि जच्चा-बच्चा की जान बचाई जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने इस योजना की सफलता के लिए प्रांतीय चिकित्सा सेवा में कार्य करने वाले पति-पत्नी को चयन में प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। दो डॉक्टर जोड़ी बनाकर इसमें आवेदन कर सकते हैं।
प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं में प्रमुख रूप से अत्याधिक रक्तस्राव, संक्रमण, गर्भपात में जटिलताएं व गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप शामिल होते हैं। इस दौरान अनुमान लगाना कठिन होता है कि कौन सी गर्भवती महिला जटिलता से ग्रसित होगी।
ऐसी ही आपातकालीन प्रसूति सेवाओं की उपलब्धता के लिए डॉक्टरों को ईमॉक और एलएसएएस का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन चिकित्सकों को असक्रिय प्रथम संदर्भन इकाई (एफआरयू) भेजा जाएगा। शासन ईमॉक व एलएसएएस प्रशिक्षण के लिए मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी बढ़ा रहा है।
प्रत्येक आवेदक को जोड़ीदार चिकित्सक की जानकारी भी देनी होगी
प्रशिक्षण के लिए सीएमओ के माध्यम से नाम भेजे जाएंगे। साथ ही जिलों के असक्रिय एफआरयू की जानकारी सीएमओ ही भेजेंगे। ईमॉक और एलएसएएस प्रशिक्षण के लिए चिकित्सकों की जोड़ियों का नामांकन होगा। पूरे प्रदेश में किसी भी जोड़ीदार को चिह्नांकित किया जा सकता है।
प्रत्येक आवेदक को जोड़ीदार चिकित्सक की जानकारी भी देनी होगी। इन्हें प्रशिक्षण के बाद असक्रिय एफआयू को क्रियाशील करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। यदि प्रशिक्षण के बाद असक्रिय एफआरयू में जोड़ी कार्य नहीं करेगी तो उनसे प्रशिक्षण पर खर्च धनराशि की वेतन से वसूली की जाएगी साथ ही कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी होगा।
योजना के संचालन के लिए महानिदेशक परिवार कल्याण की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति भी गठित की गई है। इसमें निदेशक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, एनएचएम के भी सदस्य शामिल होंगे। ईमॉक और एलएसएएस प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण का समय भी 16 सप्ताह से 24 सप्ताह किया गया है।