{"_id":"68b657796c1e0cb92905ea7c","slug":"doctors-will-accurately-assess-patients-with-ai-before-brain-surgery-deep-learning-technology-also-useful-2025-09-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP News: ब्रेन सर्जरी के पहले डॉक्टर एआई से करेंगे सटीक आकलन, डीप लर्निंग तकनीक भी आएगी काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP News: ब्रेन सर्जरी के पहले डॉक्टर एआई से करेंगे सटीक आकलन, डीप लर्निंग तकनीक भी आएगी काम
Tue, 02 Sep 2025 08:03 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Tue, 02 Sep 2025 08:03 AM IST
सार
अब मरीजों की ब्रेन सर्जरी के पहले डॉक्टर एआई से सटीक आकलन करेंगे। इसके बाद सर्जरी करेंगे। इसमें डीप लर्निंग तकनीक भी काम आएगी। सेल कल्चर के लिए प्रोटोटाइप बनाया जाएगा। इसके लिए आईईटी के शिक्षकों को सीएसटी का प्रोजेक्ट मिला है। ये पीजीआई के डॉक्टर के साथ मिलकर काम करेंगे।
विज्ञापन
सर्जरी करती चिकित्सकों की टीम (सांकेतिक)
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गंभीर सड़क हादसों और ब्रेन स्ट्रोक से जूझ रहे मरीजों के इलाज के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीप लर्निंग तकनीक नई उम्मीद जगाएगा। इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के शिक्षकों को पीजीआई के न्यूरोसर्जन के साथ संयुक्त प्रोजेक्ट काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (सीएसटी) ने स्वीकृत किया है।
विज्ञापन
इसके तहत एआई का प्रयोग करते हुए ब्रेन सर्जरी के लिए कितने स्पेश की जरूरत है, यह आकलन किया जाएगा। आईईटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. पवन कुमार तिवारी ने बताया कि पीजीआई के न्यूरोसर्जन डॉ. आशुतोष कुमार के साथ यह शोध किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ब्रेन में बहुत जगह नहीं होती है।
विज्ञापन
समझने और उपचार रणनीति बनाने में मदद मिलेगी
ऐसे में सर्जरी के लिए सटीक जगह का विश्लेषण काफी उपयोगी होगा। इस शोध का मुख्य उद्देश्य एआई और डीप लर्निंग तकनीक की मदद से सर्जरी के बाद होने वाली मस्तिष्क की सूजन के प्रभावों का पूर्व से ही विश्लेषण करना है। इससे डॉक्टरों को मरीज की स्थिति को बेहतर समझने और व्यक्तिगत उपचार रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।उन्होंने बताया कि इस शोध के लिए 13 लाख का प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। इस शोध दल में सह-प्रमुख अन्वेषक प्रो. गिरीश चंद्र विभागाध्यक्ष कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग आईईटी और डॉ. अनिल कुमार सिंह रेडियोलॉजिस्ट पीजीआई भी शामिल हैं। डॉ. पवन तिवारी ने कहा कि यह तकनीक विशेष रूप से गंभीर सड़क हादसों और ब्रेन स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों की जान बचाने में कारगर साबित होगी।
सेल कल्चर के लिए बनाएंगे प्रोटोटाइप
आईईटी के ही बायोटेक्नोलॉजी के प्रो. भारतेंदु नाथ मिश्र व मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रो. अजय शर्मा का भी सीएसटी में शोध प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। इसमें वह मैमलियन सेल कल्चर के लिए आधुनिक बायोरिएक्टर के प्रोटोटाइप की डिज़ाइन व निर्माण करेंगे।नई दवा, वैक्सीन व कॉस्मेटिक के टेस्टिंग व लैब ग्रोन मीट के प्रोडक्शन के लिए यह शोध महत्वपूर्ण होगा। प्रो. मिश्र ने बताया कि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन का कहना है कि भविष्य में पशु परीक्षण संबंधी आवश्यकताओं को कई तरीकों से कम किया जाएगा। संभवतः दवाओं का परीक्षण पशुओं पर करने की अनिवार्यता को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना है। दवाओं का परीक्षण करने के लिए अधिक प्रभावी, मानव-प्रासंगिक तरीके अपनाने की आवश्यकता है।