ऑटिज्म से पीड़ित है बच्चा तो ऐसे होगा इलाज
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ऑटिज्म पीड़ित बच्चों का नियमित इलाज कराया जाए तो उनकी जिंदगी संवारी जा सकती है। ऑटिज्म की बीमारी गर्भावस्था में हुए नुकसान से होती है। मां गर्भावस्था और जन्म के बाद शिशु का ख्याल रखें तो इस तरह की समस्या से बचा जा सकता है।
यूपी में प्रति हजार एक बच्चा ऑटिज्म से जूझ रहा है। ये जानकारी रविवार को लखनऊ विश्वविद्यालय स्थित कॉल्विन तालुकेदार कॉलेज में हनीमैनियन फोरम की ओर से आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर में हनीमैनियन एजुकेशन फोरम के डॉ. अमलेंदु त्रिपाठी ने दी।
उन्होंने बताया कि ऑटिज्म से वे बच्चे पीड़ित होते हैं जिनको गर्भावस्था के दौरान कोई नुकसान होता है। जन्म के बाद यही बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। शिविर में कुल 400 से अधिक बच्चे जांच के लिए पहुंचे जिसमें 170 बच्चों का पंजीकरण हुआ।
ये है ऑटिज्म के लक्षण
इस शिविर में डॉक्टरों ने ऑटिज्म के लक्षणों के बारे में भी बताया। इस बीमारी की मुख्य लक्षण हैं एकाग्रता कम होना, एक ही काम बार-बार करते रहना, चोट लगने पर दर्द महसूस न होना, उम्र से लेकर लंबाई सब प्रभावित होती है।
शिविर का उद्घाटन राजा बहादुर मयंकेश्वर सरन सिंह ने किया। इस मौके पर सभी बच्चों की काउंसलिंग की गई और परिवारीजनों को उनका ख्याल रखने के तरीके बताए गए। शिविर में डॉ. पुनीत सिंह, डॉ. मनीष मिश्र, डॉ. नितिन और डॉ. अंकित समेत अन्य पैरामेडिकल स्टाफ का सहयोग रहा।