लापरवाही की हद, दो बार किया ट्यूमर का ऑपरेशन
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सिविल अस्पताल में गर्भाश्य में ट्यूमर की समस्या से पीड़ित बुजुर्ग का दो बार ऑपरेशन किया गया। इसके बावजूद मरीज की हालत बिगड़ती चली गई। इससे नाराज तीमारदारों डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया तो जमकर नोकझोंक हुई।
ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर ने वकीलों की मदद से मामला सुलझा लिया और मरीज को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। यहीं नहीं, डॉक्टरों ने मामले की जानकारी अस्पताल प्रशासन को देना भी जरूरी नहीं समझा।
बहराइच निवासी तकदीरा बानो (50) को गर्भाश्य में दर्द की शिकायत के बाद घरवाले 20 नवंबर को सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां सर्जन ने गर्भाश्य में ट्यूमर की समस्या बता ऑपरेशन की सलाह दी। बेटे शाकीर अली ने बताया कि 22 नवंबर को मां का ऑपरेशन किया गया और सात दिन बाद डिस्चार्ज कर दिया।
जबकि ऑपरेशन के बाद से मल नहीं निकल रहा था और उल्टियां हो रही थीं। हालत बिगड़ने पर डॉक्टर से बताया तो दोबारा ऑपरेशन की सलाह दी। दस दिसंबर को दोबारा ऑपरेशन किया गया, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई।
ऑपरेशन गड़बड़, मतलब मुंह मांगी रकम
अस्पताल के एक सूत्र की मानें तो ऑपरेशन गड़बड़ होने के बाद मामले को दबाने के लिए तीमारदार को मुंह मांगी रकम तक दे देते हैं। यही कारण है कि सिविल अस्पताल में सर्जन की लापरवाही से कई मरीजों की जान मुश्किल में पड़ चुकी है, लेकिन मामला दब जाता है। अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी भी कार्रवाई करने की बजाए महज जांच की खानापूर्ति करते हैं।
सिविल अस्पताल के सर्जन लगातार मरीजों के ऑपरेशन में लापरवाही बरत रहे हैं। इससे पहले एक सर्जन ने ऑपरेशन के दौरान महिला की नस काट दी थी। कई दिनों तक रक्तस्राव होने के बाद ट्रॉमा रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई थी। इसी तरह ऑर्थो सर्जन ने प्रियंका पांडे नाम की युवती के हाथ का ऑपरेशन किया।
सर्जरी में इस्तेमाल की गई प्लेट से संक्रमण हो गया और हाथ काला पड़ गया। परिवारीजनों ने मामले की शिकायत हाईकोर्ट में की, जिसके बाद केजीएमयू के लिंब सेंटर में इलाज चला तब जाकर उसकी जान बची। मालूम हो कि करीब दो साल पहले बलरामपुर अस्पताल में एक बुजुर्ग का हिप रिप्लेसमेंट किया गया।
दो साल तक मरीज की हालत ठीक नहीं हुई। केजीएमयू के लिंब सेंटर पहुंचे तो पता चला कि इंप्लांट पैलविक में धंस गया है, जिसके बाद सर्जरी कर उसे निकाला गया और मरीज की जान बचाई गई।