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लोहिया संस्थान के डॉक्टरों का कमाल, दिमाग को खून पहुंचाने वाली धमनी से हटाया ब्लॉकेज, दी नई जिंदगी

Fri, 27 Sep 2019 03:29 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Fri, 27 Sep 2019 03:29 PM IST
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doctors clears blockage from vein supplying blood to brain in lohia institute
मरीज के साथ डॉक्टर्स - फोटो : amar ujala
लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने दिमाग को खून पहुंचाने वाली धमनी से ब्लॉकेज हटाकर बीते बुधवार को मरीज को नई जिंदगी दी। मरीज को दो बार लकवा मार चुका था। दवा कोई असर नहीं कर रही थी। जांच करने पर पता चला कि मरीज को कैरोटिड स्टेनोसिस बीमारी है। इसमें दिमाग को खून ले जाने वाली मुख्य कैरोटिड धमनी 80 प्रतिशत से ज्यादा ब्लॅाक हो गई थी। मरीज को लकवा मारने के साथ जान का भी खतरा था।
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प्रयागराज निवासी मिठाई लाल (64) चार माह से कैरोटिड स्टेनोसिस की समस्या से ग्रसित थे। इससे करीब चार माह पूर्व लकवा का अटैक पड़ा था। मरीज तभी से इसके लिए दवाएं ले रहा था, इसके बावजूद एक माह पूर्व दोबारा पक्षाघात की शिकायत हुई। 
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लोहिया संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. दीपक कुमार सिंह ने बताया कि मरीज कैरोटिड स्टेनोसिस से पीड़ित थे। इसमें दिमाग को खून ले जाने वाली मुख्य कैरोटिड धमनी 80 फीसदी से ज्यादा ब्लॉक हो गई थी। इस ब्लॉकेज को न खोलने से मरीज के लकवे के बढ़ने और मौत होने का अधिक खतरा था। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में सुधार हो गया है।
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सर्जरी टीम में ये रहे शामिल : सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. दीपक, डॉ. कुलदीप यादव, डॉ. मो. कैफ , डॉ. राकेश सिंह, एनेस्थीसिया से डॉ. दीपक मालवीय, डॉ. पीके दास, डॉ. अनुराग अग्रवाल शामिल रहे।

उम्र बढ़ने के साथ होती है समस्या 

डॉ. दीपक ने बताया कि कैरोटिड स्टेनोसिस उम्र बढ़ने के साथ होने वाली एक आम समस्या है। इसमें मरीजों को लकवे का खतरा बना रहता है। 70 प्रतिशत ब्लॉकेज दवाओं से कंट्रोल में रहते हैं, लेकिन ब्लॉकेज अधिक होने पर मरीज को चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। 

70 प्रतिशत से ज्यादा ब्लॅाकेज को सर्जरी करके या स्टेंट डाल कर मरीज को राहत दी जा सकती है। इस बीमारी में मरीजों में स्टेंट डाल कर मरीज को अगले दिन ही छुट्टी दे दी जाती है। संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग में इन मरीजों के ओपेन सर्जरी एवं स्टेंटिंग दोनों की सुविधा है।

1.5 लाख हुआ खर्च, निजी में 7 लाख लगते
डॉ. दीपक ने बताया कि मरीज का ऑपरेशन महज डेढ़ लाख रुपये में हुआ है। इसमें दवाएं भी शामिल हैं। यह ऑपरेशन में निजी अस्पताल कराने में करीब छह से सात लाख रुपये खर्च होता है।
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