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केजीएमयू को झटका : दो विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा, और डॉक्टर भी कह सकते हैं अलविदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 04 Oct 2018 12:17 PM IST
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डॉ संत कुमार पांडेय व डॉ मनमीत
- फोटो : amar ujala
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केजीएमयू की महत्वाकांक्षी योजना ऑर्गन ट्रांसप्लांट विभाग पर शुरू होने से पहले ही संकट के बादल छाने लगे हैं। नेफ्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संत कुमार पांडेय और यूरोलॉजी विभाग के डॉ. मनमीत ने इस्तीफा दे दिया है।
दोनों के इस्तीफे की वजह ऑर्गन ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू होने में देरी से क्षुब्ध होना बताया जा रहा है। हालांकि केजीएमयू प्रशासन अभी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि कई अन्य वरिष्ठ चिकित्सक इस्तीफा देने का मन बना चुके हैं। इनमें से ज्यादातर निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं।
केजीएमयू में डायलिसिस के साथ 30 बेड का नेफ्रोलॉजी विभाग खोला गया। इसे शताब्दी फेज एक में चलाया जा रहा है। इसके विभागाध्यक्ष असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संत कुमार पांडेय और दूसरे फैकल्टी की जिम्मेदारी डॉ. रविशंकर निभा रहे हैं।
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डॉ. संत कुमार ने इस्तीफा दे दिया है। इसी तरह ट्रांसप्लांट यूनिट के डॉ. मनमीत सिंह ने भी इस्तीफा दे दिया है। इन्हें ट्रांसप्लांट यूनिट से हटाकर यूरोलॉजी भेज दिया गया था। इससे वह असंतुष्ट चल रहे थे। खास बात यह है कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट के वक्त नेफ्रोलाजिस्ट का होना जरूरी है।
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दोनों के इस्तीफे की वजह ऑर्गन ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू होने में देरी से क्षुब्ध होना बताया जा रहा है। हालांकि केजीएमयू प्रशासन अभी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि कई अन्य वरिष्ठ चिकित्सक इस्तीफा देने का मन बना चुके हैं। इनमें से ज्यादातर निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं।
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केजीएमयू में डायलिसिस के साथ 30 बेड का नेफ्रोलॉजी विभाग खोला गया। इसे शताब्दी फेज एक में चलाया जा रहा है। इसके विभागाध्यक्ष असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संत कुमार पांडेय और दूसरे फैकल्टी की जिम्मेदारी डॉ. रविशंकर निभा रहे हैं।
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डॉ. संत कुमार ने इस्तीफा दे दिया है। इसी तरह ट्रांसप्लांट यूनिट के डॉ. मनमीत सिंह ने भी इस्तीफा दे दिया है। इन्हें ट्रांसप्लांट यूनिट से हटाकर यूरोलॉजी भेज दिया गया था। इससे वह असंतुष्ट चल रहे थे। खास बात यह है कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट के वक्त नेफ्रोलाजिस्ट का होना जरूरी है।
शैक्षिक कार्य पर भी पड़ेगा प्रभाव
डेमो
केजीएमयू में हर रोज करीब 10 लोगों की डायलिसिस होती है। ट्रॉमा सेंटर और यूरोलॉजी में आने वाले किडनी के गंभीर मरीजों की नेफ्रोलॉजी विभाग की डायलिसिस यूनिट में डायलिसिस होती है। डॉ. संत कुमार पांडेय के जाने के बाद यहां सिर्फ एक असिस्टेंट प्रोफेसर बचेंगे।
ऐसे में मरीजों की डायलिसिस प्रभावित होगी। नेफ्रोलॉजी से सुपर स्पेशिएलिटी (डीएम) डिग्रीधारी सिर्फ एक असिस्टेंट प्रोफेसर बनेंगे।विश्वविद्यालय प्रशासन नेफ्रोलाजी विभाग चलाने की तैयारी में है। यहां के लिए एमएस की पढ़ाई शुरू करने के लिए आवेदन किया गया है। ऐसी स्थिति में इस पर भी रोक लग सकती है।
डॉ. संत कुमार पांडेय पहले भी दो बार इस्तीफा दे चुकेहैं, लेकिन केजीएमयू प्रशासन ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था। इस बार उनका नाम निजी अस्पताल के विज्ञापन में छपने से उनका जाना तय माना जा रहा है। इस संबंध में डॉ. संत कुमार और डॉ. मनमीत से बात करने की कोशिश की गई। दोनों ने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
फाइल अभी वीसी के पास
दोनों ने इस्तीफेकी पेशकश की थी। फाइल अभी कुलपति के पास है। इस पर कुलपति ही निर्णय लेंगे। निजी अस्पताल जॉइन करने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। नियमानुसार बिना इस्तीफा दिए दूसरे संस्थान में जॉइन नहीं किया जा सकता है। - राजेश कुमार राय, कुलसचिव, केजीएमयू
ऐसे में मरीजों की डायलिसिस प्रभावित होगी। नेफ्रोलॉजी से सुपर स्पेशिएलिटी (डीएम) डिग्रीधारी सिर्फ एक असिस्टेंट प्रोफेसर बनेंगे।विश्वविद्यालय प्रशासन नेफ्रोलाजी विभाग चलाने की तैयारी में है। यहां के लिए एमएस की पढ़ाई शुरू करने के लिए आवेदन किया गया है। ऐसी स्थिति में इस पर भी रोक लग सकती है।
डॉ. संत कुमार पांडेय पहले भी दो बार इस्तीफा दे चुकेहैं, लेकिन केजीएमयू प्रशासन ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था। इस बार उनका नाम निजी अस्पताल के विज्ञापन में छपने से उनका जाना तय माना जा रहा है। इस संबंध में डॉ. संत कुमार और डॉ. मनमीत से बात करने की कोशिश की गई। दोनों ने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
फाइल अभी वीसी के पास
दोनों ने इस्तीफेकी पेशकश की थी। फाइल अभी कुलपति के पास है। इस पर कुलपति ही निर्णय लेंगे। निजी अस्पताल जॉइन करने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। नियमानुसार बिना इस्तीफा दिए दूसरे संस्थान में जॉइन नहीं किया जा सकता है। - राजेश कुमार राय, कुलसचिव, केजीएमयू