शरीर के किसी हिस्से में गांठ हो तो जरूर कराएं जांच, डॉक्टर ने दिए ये सुझाव
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सवाल- मेरी कीमोथेरेपी चल रही है। इस वक्त अस्पताल जाना ठीक रहेगा या नहीं? - सुरेश कुमार अलीगंज, हरप्रीत बांसमंडी
जवाब- कोरोना काल में भी अस्पताल में कीमोथेरेपी करवाना सुरक्षित है। कीमोथेरेपी बंद कर देने से पहले हुई थेरेपी का असर खत्म हो जाता है। इसलिए इसे निर्धारित समय पर कराते रहना जरूरी है। अस्पताल जाते वक्त मास्क लगाकर ही जाएं। आसपास मौजूद लोगों से दूरी बनाकर रखें। कोई खांस या छींक रहा हो तो उससे दूर रहें।
सवाल- मेरे गले में बाईं तरफ एक गांठ सी बन रही है। क्या ये कैंसर हो सकता है? - सचिन कुर्सी रोड, आदित्य पारा
जवाब- शरीर के किसी अंग में किसी प्रकार की गांठ होना कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं, फिर भी बिना जांच किए ये बता पाना मुश्किल है कि वह गांठ कैंसरयुक्त है या नहीं, क्योंकि हर गांठ कैंसर नहीं होती है। जांच हो जाने से स्थिति स्पष्ट हो जाती है। यदि गांठ में कैंसर की शुरुआत हो रही होती है तो तत्काल इलाज शुरू हो जाने से वह दूसरे अंगों तक फैल नहीं पाती है।
कैंसर से बचने का क्या तरीका है
जवाब- सबसे पहले तंबाकू व शराब का सेवन बंद करना होगा। तंबाकू और खैनी की वजह से मुंह, फेफड़े सहित अन्य कई तरह के कैंसर बढ़ते हैं। खाने की चीजों में केमिकल की वजह से भी कैंसर बढ़ रहा है। इससे बचने के लिए स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं। आंत या मूत्राशय की आदतों में परिवर्तन, शरीर के किसी भी हिस्से में असामान्य रक्तस्राव, वजन में गिरावट, भूख कम लगना, लगातार खांसी या आवाज में भारीपन आदि की शिकायत हो तो जांच करा लेनी चाहिए।
सवाल- मेरी उम्र 54 साल है। मुझे मल में खून आता है। क्या ये कैंसर का लक्षण हो सकता है? - परवेज चौक, दलजीत गोमती नगर
जवाब- मल के साथ रक्त आना यह संकेत देता है कि आपके पाचन तंत्र में कहीं रक्त स्राव हो रहा है। शौचालय जाने के बाद खून आना ज्यादातर बवासीर या गुदा विकार के कारण होता है। हालांकि रक्त आना मलाशय में कैंसर या पूर्व कैंसर अवस्था का संकेत भी हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ से परामर्श लेना अनिवार्य है।
सवाल- कैंसर का सिकाई द्वारा इलाज कैसे होता है और यह कितना कारगर है?- अतुल पांडेय जानकीपुरम, प्रकाश अग्निहोत्री आशियाना
जवाब- कैंसर उपचार के क्षेत्र में लगातार विकास हो रहा है। सिकाई द्वारा कैंसर इलाज की पद्धति को रेडिएशन थेरेपी ‘बिजली की सिकाई’ भी कहा जाता है। इस थेरेपी में उच्च ऊर्जा की किरणें कैंसर प्रभावित भाग पर डाली जाती हैं। इसमें कैंसर सेल्स को नष्ट कर उनका विभाजन रोकने की क्षमता होती है। हालांकि यह पद्धति इस तरीके से संयोजित की जाती है कि इससे शरीर के स्वस्थ ऊतकों को कम से कम नुकसान पहुंचे। आज के समय में यह पद्धति बहुत कारगर है।