{"_id":"6ae64e03badc490db10b3e28","slug":"do-not-take-urinary-related-conditions-present-from-birth-in-children-lightly-lucknow-news-c-13-lko1096-1991274-2026-11-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: बच्चों में जन्म से पेशाब संबंधी बीमारी को हल्के में न लें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: बच्चों में जन्म से पेशाब संबंधी बीमारी को हल्के में न लें
विज्ञापन
केजीएमयू में हुआ सेमिनार।
लखनऊ। जिन बच्चों को जन्म से पेशाब संबंधी परेशानी है। उनमें किडनी संबंधी बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इलाज में अब नई विधि मददगार बनेगी। ऐसे बच्चों का ऑपरेशन दूरबीन और रोबोट की मदद से भी किया जा सकेगा। इससे बड़े चीरे लगाने की जरूरत कम होगी। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर शरीर के अंदर बीमारी वाली जगह को बारीकी से देखकर सटीक सर्जरी कर सकेंगे। यह जानकारी केजीएमयू पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जेडी रावत ने दी। वह शनिवार को केजीएमयू के अटल बिहारी वाजपेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में 14वें एसपीयूसीओएन-2026 को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. जेडी रावत ने कहा कि बच्चों में पेशाब की नली में रुकावट और थैली से जुड़ी कई बीमारियां जन्मजात होती हैं। इससे बच्चे को पेशाब करने में परेशानी होती है। कई बार पेशाब पूरी तरह नहीं निकल पाता। संक्रमण और दूसरी जटिलताएं भी हो सकती हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। ऐसे में बीमारी की समय पर पहचान बेहद जरूरी है।
डॉ. रावत ने बताया कि इन बीमारियों के इलाज में तीन तरह की सर्जरी की जाती हैं। पहली सामान्य सर्जरी है। इसमें बीमारी वाली जगह तक पहुंचने के लिए चीरा लगाया जाता है। दूसरी दूरबीन विधि है। इसमें पेट पर छोटे-छोटे चीरे लगाकर कैमरे और बारीक उपकरणों से ऑपरेशन किया जाता है। तीसरी रोबोटिक सर्जरी है। इसमें रोबोटिक मशीन की मदद से सर्जन ऑपरेशन करते हैं। दूरबीन और रोबोटिक सर्जरी में डॉक्टर को शरीर के अंदर की संरचनाएं बेहतर तरीके से देखने में मदद मिलती है। इससे जटिल ऑपरेशन में बारीकी और सटीकता के साथ काम किया जा सकता है। खासकर बच्चों में छोटे अंगों और नाजुक संरचनाओं के कारण यह तकनीक महत्वपूर्ण है। हालांकि किस बच्चे के लिए कौन सी सर्जरी बेहतर होगी, इसका फैसला बीमारी की स्थिति और जांच के आधार पर किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. जेडी रावत ने कहा कि बच्चों में पेशाब की नली में रुकावट और थैली से जुड़ी कई बीमारियां जन्मजात होती हैं। इससे बच्चे को पेशाब करने में परेशानी होती है। कई बार पेशाब पूरी तरह नहीं निकल पाता। संक्रमण और दूसरी जटिलताएं भी हो सकती हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। ऐसे में बीमारी की समय पर पहचान बेहद जरूरी है।
विज्ञापन
डॉ. रावत ने बताया कि इन बीमारियों के इलाज में तीन तरह की सर्जरी की जाती हैं। पहली सामान्य सर्जरी है। इसमें बीमारी वाली जगह तक पहुंचने के लिए चीरा लगाया जाता है। दूसरी दूरबीन विधि है। इसमें पेट पर छोटे-छोटे चीरे लगाकर कैमरे और बारीक उपकरणों से ऑपरेशन किया जाता है। तीसरी रोबोटिक सर्जरी है। इसमें रोबोटिक मशीन की मदद से सर्जन ऑपरेशन करते हैं। दूरबीन और रोबोटिक सर्जरी में डॉक्टर को शरीर के अंदर की संरचनाएं बेहतर तरीके से देखने में मदद मिलती है। इससे जटिल ऑपरेशन में बारीकी और सटीकता के साथ काम किया जा सकता है। खासकर बच्चों में छोटे अंगों और नाजुक संरचनाओं के कारण यह तकनीक महत्वपूर्ण है। हालांकि किस बच्चे के लिए कौन सी सर्जरी बेहतर होगी, इसका फैसला बीमारी की स्थिति और जांच के आधार पर किया जाता है।
विज्ञापन