फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Do not donate organs due to the superstition of being born disabled in the next life

Lucknow News: अगले जन्म में दिव्यांग पैदा होने के अंधविश्वास के चलते नहीं करते अंगदान

Sun, 13 Aug 2023 07:02 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Aug 2023 07:02 PM IST
विज्ञापन
Do not donate organs due to the superstition of being born disabled in the next life
विश्व अंगदान दिवस पर पीजीआई में वॉकाथन और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
विज्ञापन




लखनऊ। इस जन्म में अंगदान कर देंगे तो अगले जन्म में वह अंग दानदाता के पास नहीं होगा। अंगदान की राह में यही अंधविश्वास सबसे बड़ी बाधा है, इसलिए हमें इस अंधविश्वास पर काबू पाना होगा। विश्व अंगदान दिवस पर एसजीपीजीआई में रविवार को विशेषज्ञों ने लोगों को अंगदान के लिए जागरूक किया।

एसजीपीजीआई के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर नारायण प्रसाद एवं स्टेट ऑर्गन ट्रांसप्लांट सोसाइटी के संयुक्त निदेशक एवं अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख प्रो. राजेश हर्षवर्धन ने बताया कि ब्रेनडेड होने के बावजूद करीब 20 फीसदी मृतकों के परिवारीजन अंधविश्वास की वजह से ही अंगदान नहीं करते हैं। लोगों को अच्छा जीवन देने के लिए हमें इन अंधविश्वासों पर विजय हासिल करनी होगी। इस मौके पर पूर्व ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर पुष्पा सिंह, विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर अमित गुप्ता को एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने सम्मानित किया। जागरूकता कार्यक्रम में प्रो. अनुपमा कौल, प्रो. धर्मेंद्र भदौरिया, प्रो. रवि शंकर कुशवाहा, प्रो. मानस रंजन पटेल, मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर एवं ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर विजय सोनकर, वरिष्ठ सहायक संतोष वर्मा, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी महेश कुमार उपस्थित रहे।
विज्ञापन



अंगों की कमी के कारण नहीं हो पा रहा है ट्रांसप्लांट

प्रो. नारायण प्रसाद ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग दो लाख मरीजों की लिवर फेल्योर या लिवर कैंसर से मृत्यु हो जाती है, जिनमें से लगभग 10-15 फीसदी को समय पर लिवर प्रत्यारोपण के जरिये बचाया जा सकता था। अंगदान न होने की वजह से जरूरी 25 हजार प्रत्यारोपण में से महज 1500 ही हो पाते हैं। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) के राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, 1995 के बाद से, केवल 2,546 लोगों ने ही अपनी मृत्यु के बाद अपने अंगों को दान करने का विकल्प चुना। जीवित रहते हुए 34,094 लोगों ने अपने अंगों को दान करने का विकल्प चुना।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed