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Lucknow News: डीएम ने सेना के फायरिंग रेंज की अधिसूचना समय विस्तार का भेजा प्रस्ताव
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हाईकोर्ट।
लखनऊ। राजधानी के अर्जुनगंज स्थित सेना के फायरिंग रेंज में तमाम जमीनों पर बाहरियों द्वारा अवैध कब्जा किए जाने के मामले से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवायी के दौरान राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच को बताया गया कि फायरिंग रेंज सम्बंधी मूल अधिसूचना का समय विस्तार किए जाने का प्रस्ताव जिलाधिकारी, लखनऊ द्वारा शासन को भेजा जा चुका है।
वहीं, कोर्ट ने पाया कि समय विस्तार का फाइनल नोटिफिकेशन जारी होने में दो माह तक का वक्त लग सकता है। इस लिहाज से मामले को अगली सुनवायी के लिए 3 दिसम्बर को सूचीबद्ध किया जाय। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने ब्रिगेडियर तिरबनी प्रसाद की ओर से वर्ष 2011 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मूल अधिसूचना के समय विस्तार सम्बंधी प्रस्ताव 25 सितंबर को जिलाधिकारी द्वारा शासन को भेजा जा चुका है। हालांकि, इस प्रस्ताव में फायरिंग रेंज का एरिया घटाकर 121.339 हेक्टेयर कर दिया गया है।
गौरतलब है कि मामले में केंद्र सरकार की ओर से बाकायदा शपथ पत्र दाखिल कर कहा जा चुका है कि फायरिंग रेंज में अतिक्रमण की वजह से सेना लंबी दूरी के हथियारों की ट्रेनिंग नहीं कर पा रही है। ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में लंबी दूरी के हथियारों की ट्रेनिंग को टालना सेना की तैयारी को खतरे में डाल देगा। वहीं, अदालत भी टिप्पणी कर चुकी है कि सेना के अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण को रोकने के बार-बार अनुरोध के बावजूद राज्य सरकार व एलडीए के अधिकारी अपने आँख व कान बंद किए रहे, जिसका नतीजा यह हुआ कि अब सेना वहाँ लॉन्ग रेंज फायरिंग प्रैक्टिस नहीं कर सकती।
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वहीं, कोर्ट ने पाया कि समय विस्तार का फाइनल नोटिफिकेशन जारी होने में दो माह तक का वक्त लग सकता है। इस लिहाज से मामले को अगली सुनवायी के लिए 3 दिसम्बर को सूचीबद्ध किया जाय। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने ब्रिगेडियर तिरबनी प्रसाद की ओर से वर्ष 2011 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मूल अधिसूचना के समय विस्तार सम्बंधी प्रस्ताव 25 सितंबर को जिलाधिकारी द्वारा शासन को भेजा जा चुका है। हालांकि, इस प्रस्ताव में फायरिंग रेंज का एरिया घटाकर 121.339 हेक्टेयर कर दिया गया है।
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गौरतलब है कि मामले में केंद्र सरकार की ओर से बाकायदा शपथ पत्र दाखिल कर कहा जा चुका है कि फायरिंग रेंज में अतिक्रमण की वजह से सेना लंबी दूरी के हथियारों की ट्रेनिंग नहीं कर पा रही है। ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में लंबी दूरी के हथियारों की ट्रेनिंग को टालना सेना की तैयारी को खतरे में डाल देगा। वहीं, अदालत भी टिप्पणी कर चुकी है कि सेना के अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण को रोकने के बार-बार अनुरोध के बावजूद राज्य सरकार व एलडीए के अधिकारी अपने आँख व कान बंद किए रहे, जिसका नतीजा यह हुआ कि अब सेना वहाँ लॉन्ग रेंज फायरिंग प्रैक्टिस नहीं कर सकती।
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