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किसान की व्यथा...भैंस की जगह मैं क्यों नहीं मर गया?

Thu, 30 Apr 2015 09:09 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 30 Apr 2015 09:09 AM IST
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DM of Jhansi and his wife helping farmers.

‘सचमुच स्थिति हृदय विदारक है। अभी कल-परसों इटावा में था। हाशिये के समाज से जुड़े परिवर्तन मंच के आयोजन में। वहां एक किसान की व्यथा यह थी कि उसकी भैंस मरने के बजाय वह स्वयं क्यों नहीं मर गया, क्योंकि खुद मरने पर उसकी पत्नी भैंस के दूध से होने वाली आमदनी से गुजारा कर लेती लेकिन भैंस मरने के बाद तो आमदनी का स्रोत ही समाप्त हो गया...बहरहाल मैं इस अभियान में आपके साथ हूं। और अपनी एक दिन की पेंशन राशि जो एक हजार रुपये है इस मद में देने के लिए प्रतिश्रुत हूं।’

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झांसी के डीएम अनुराग यादव की पत्नी प्रीति चौधरी के फेसबुक वॉल पर वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव ने यह कमेंट किया है। इटावा के इस अन्नदाता की व्यथा से अंदाजा लगाना कठिन नहीं है कि गरीबी व कर्ज तले दबे किसान बेमौसम बारिश व ओलों से फसलों की बर्बादी के बाद किस हाल में जी रहे हैं।
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किसान की आत्महत्या व हार्टअटैक को झुठलाना या मानना अपनी जगह है लेकिन किसानों की बेबसी किसी से छिपी नहीं रह गई है। इसी फेसबुक वॉल पर कौटिल्य जायसवाल की टिप्पणी भी बहुत कुछ कह जाती है। बकौल कौटिल्य, बहुत मायावी दुनिया है, खाने वाला तो खा ही लेता है, खिलाने वाला भूखा रह जाता है।

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डीएम व उनकी पत्नी ने शुरू की मदद की मुहिम

DM of Jhansi and his wife helping farmers.

अनुराग व प्रीति ने तमाम प्रशासनिक व पारिवारिकद्वंद्व से बाहर निकलकर किसानों की मदद के लिए मुहिम छेड़ी तो उनकी पहल को लोगों ने हाथों-हाथ लिया।

सहयोग के लिए हाथ बढ़ाने वालों में वीरांगना लक्ष्मीबाई की धरती झांसी के लोग तो हैं ही, लखनऊ, बलिया, आजमगढ़ के साथ अमेरिकी एनआरआई तक शामिल हैं।

प्रीति ने बुधवार को बताया कि इनमें हजार रुपये की मदद करने वाले हैं तो दो-चार-दस रुपये देने वाले भी। इनमें स्वयं सहायता समूह, किसानों के संगठन और महिलाएं व बच्चे भी शामिल हैं। लोगों के लगातार जुड़ने से बड़ी हिम्मत मिली है।

हर पीड़ित परिवार को दो-दो क्विंटल गेहूं की मदद
झांसी के कारोबारी राजीव राय ने आत्महत्या व हार्टअटैक से जान गंवाने वाले हर किसान के परिवार को दो-दो क्विंटल गेहूं देने की बात कही है। इसके अलावा बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स ने 50 हजार रुपये की मदद दी है।

इन्होंने भी मदद के लिए बढ़ाया हाथ

DM of Jhansi and his wife helping farmers.

आजमगढ़ की गृहिणी वंदना यादव ने बताया है कि उनके पति ने घर खर्च के लिए जो पैसे दिए हैं, उसमें से 1000 रुपये मनीऑर्डर कर रही हैं।

कथाकार नीलाक्षी सिंह ने 25 हजार रुपये, वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान व रुचि ने 15 हजार, सीमा सिंह कटियार व रंजना कृष्णा ने 5000-5000 रुपये की मदद की है।

यूएसए में रहने वाले वर्धमान ने खुद 21 हजार रुपये की सहायता देने के साथ ही अपने साथियों से भी मदद दिलाने की बात कही है। मदद को हाथ बढ़ाने वालों में अखिलेश, संदीप पांडेय, अरुंधति, वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी व पुष्पा त्रिपाठी, उपमा चतुर्वेदी, शिशिर सिन्हा, प्रंजना पाठक और बद्री नारायण आदि शामिल हैं। तारिक इकबाल रजा ने दो दिन का वेतन देने की बात कही है।

आकांक्षा समिति झांसी के खाते में जमा हो रही सहायता राशि

प्रीति ने बताया कि जिलाधिकारी की पत्नी के नाते वे झांसी की आकांक्षा समिति की अध्यक्ष हैं। इसी वजह से तय किया गया कि लोगों से मिलने वाली रकम को इसी समिति के बैंक खाते में जमा किया जाएगा।

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