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ऑक्सीमीटर व थर्मामीटर खरीद में 28 जिलों में गड़बड़ी, कार्रवाई की संस्तुति, सीएम योगी को सौंपी रिपोर्ट

Fri, 02 Oct 2020 10:11 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 02 Oct 2020 10:11 PM IST
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Disturbances in procurement of oximeter and thermometer, recommendation of action, report submitted to CM Yogi
फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
ग्राम पंचायतों के लिए पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर की खरीद में अनियमितता की जांच कर रही एसआईटी की अध्यक्ष व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रेणुका कुमार ने मुख्य सचिव आर.के. तिवारी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
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एसआईटी को 28 जिलों में ज्यादा गड़बड़ी मिली हैं। इनमें पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर को बाजार दर से काफी ज्यादा रेट में खरीदा गया है। एसआईटी ने कहा है कि मेडिकल किट की खरीद के लिए शासन या विभाग के स्तर पर कोई संस्था, क्रय की प्रक्रिया का निर्धारण नहीं किया। कई जगह ऐसे बिल वाउचर मिले हैं, जिन पर जीएसटी नंबर ही नहीं है। एसआईटी ने इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करके हुए कार्रवाई की संस्तुति की है। 
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कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ग्राम पंचायतों में पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर खरीदने के आदेश दिए थे। इनकी खरीद में अनियमितता की शिकायत होने पर 7 सितंबर को सुल्तानपुर व गाजीपुर के जिला पंचायतराज अधिकारी निलंबित कर दिए गए थे।
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सत्ता पक्ष के विधायक ने ही मेडिकल किट खरीद में घोटाले का आरोप लगाया था इसलिए 10 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपर मुख्य सचिव राजस्व एवं बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार की अध्यक्षता में पूरा मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। 

एसआईटी के अन्य सदस्य आईएएस अधिकारी अमित कुमार गुप्ता और विकास गोठलवाल थे। एसआईटी को पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर की खरीद में बड़े स्तर पर गड़बड़ी मिली है।

मिर्जापुर, सोनभद्र, मैनपुरी, फर्रूखाबाद, सुल्तानपुर, झांसी, कौशांबी, चित्रकूट व गाजीपुर समेत 28 जिले ऐसे हैं, जहां बाजार रेट से काफी ज्यादा दर पर मेडिकल किट खरीदी गईं। फर्रूखाबाद का ही उदाहरण लें को मेडिकल उपकरण अलग-अलग पंचायतों में 1500, 2500 रुपये लेकर 11 हजार रुपये तक में खरीदे गए हैं। अधिकतर जिलों में 2500 रुपये लेकर 6000 हजार रुपये के बीच किट खरीदी गई हैं जबकि इनकी औसतन कीमत 1955 रुपये आंकी गई है। 

 

केंद्रीयकृत खरीद हुई, पंचायतों को सौंपे बिल

कई जिलों में पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर की खरीद केंद्रीकृत की गई है जबकि पंचायत स्तर पर की जानी थी। ज्यादातर पंचायतों को डीपीआरओ स्तर से खरीद के बिल भिजवा दिए गए। ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों के दस्तखत करा लिए गए। खरीद में भी आन-फानन में तब तेजी आई जब अपर मुख्य सचिव ने पत्र लिखकर कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम 5 से 15 सितंबर के बीच मेडिकल किट का सत्यापन करने आएगी।

दिशा-निर्देश नहीं दिए गए, निचले स्तर पर भी तय नहीं
प्रदेश में 59 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतें हैं। इनमें मेडिकल किट की खरीद के लिए शासन या पंचायतराज विभाग से कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए। मेडिकल उपकरण का मानक, ब्रांड, रेट के संबंध में मार्गदर्शन नहीं दिया गया। खरीद की प्रक्रिया नहीं तय की गई और कोई संस्था भी निर्धारित नहीं की गई। निचले स्तर पर भी अधिकारियों ने कोई प्रक्रिया तय नहीं की। कई जिलों में खरीद के बिल वाउचटर पर जीएसटी नंबर नहीं होने से राजस्व के नुकसान के साथ ही उपकरणों की गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान हैं।
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