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सुबह चयन और शाम को लिस्ट से नाम गायब
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उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के कार्मिक विभाग के आला अधिकारियों ने सुबह जारी सूची में हेरफेर कर शाम को चयनित अभ्यर्थी का नाम ही बदल दिया। फर्जीवाड़ा सामने आने पर डीआरएम ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
मामला इंजीनियरिंग विभाग में जेई-पीवे पद पर प्रमोशन का है। इसमें कीमैन, गेटमैन, ट्रैकमैन आदि के लिए गत 23 फरवरी को लिखित परीक्षा हुई थी। यह परीक्षा 12 पदों के लिए थी। इसमें करीब 200 रेलकर्मी शामिल हुए थे। परीक्षा का परिणाम गत 4 अक्तूबर को जारी किया गया। चयनित रेलकर्मियों में 11 नंबर पर रंजन कुमार सिंह का नाम था, जिनके पिता का नाम गोपाल सिंह है और वह ऊंचाहार में गेटमैन के पद पर कार्यरत हैं। इस सूची को जारी करने के बाद कार्मिक विभाग ने शाम को एक भूल सुधार जारी किया। इसमें लिखा कि चयनित रेलकर्मियों की सूची में रंजन कुमार सिंह की जगह रंजन सिंह पढ़ा जाए। रंजन सिंह कीमैन के पद पर लखनऊ में कार्यरत हैं और उनके पिता का नाम अवधेश कुमार सिंह है। इस पर ट्रैक मेंटेंनर एसोसिएशन ने नाराजगी जताई। वहीं ऊंचाहार में तैनात रंजन कुमार सिंह ने कहा कि उनकी जगह जानबूझकर उनके नाम से मिलते-जुलते रंजन सिंह का नाम जोड़ा जा रहा है, जो कि गलत है। फिलहाल मामला मंडल रेल प्रबंधक संजय त्रिपाठी के पास पहुंच गया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच करवाने की बात कही है।
दो साल से चल रहा है बवाल
दरअसल, इस परीक्षा को लेकर यह बवाल नया नहीं है। 2017 से इसमें धांधलियों के मामले सामने आ रहे हैं। 2017 में लिखित परीक्षा का नोटिफिकेशन आया। लेकिन परीक्षा से एक दिन पहले धांधलियों के चलते एन्क्वायरी शुरू हो गई, जो डेढ़ साल तक चली। इसके बाद फरवरी, 2019 में लिखित परीक्षा करवाई गई, जिसका परिणाम निकालने में अधिकारियों ने आठ माह लगा दिए जो जांच का विषय है।
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कैसे गलत टाइप हुआ पद व पिता का नाम
रंजन कुमार सिंह, ऊंचाहार में गेटमैन है, जबकि रंजन सिंह लखनऊ में कीमैन के पद पर कार्यरत है। सूत्र बताते हैं कि रंजन सिंह परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हुए और जब देखा गया कि रंजन कुमार सिंह का सेलेक्शन हो गया है तो भूल सुधार के बहाने रंजन सिंह का नाम जुड़वाने की कोशिश की गई है। सवाल यह भी है कि अभ्यर्थी के नाम की टाइपिंग में गलती समझ में आती है, लेकिन पद व पिता का नाम भी क्या गलत टाइप हो गया।
खुलेगा कार्मिक विभाग का भ्रष्टाचार
जेई-पीवे की परीक्षा मामले में कार्मिक विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के उजागर होने की भी संभावनाएं जताई जा रही हैं। दरअसल, विभाग में पासपोर्ट एनओसी से लेकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के देयक भुगतानों को लेकर अड़ंगे लगाए जाते हैं। यह स्थिति तब है, जब डीआरएम ने चार्टर बना रखा है।
जल्द आएगी जांच रिपोर्ट
इंजीनियरिंग विभाग में जेई-पीवे की लिखित परीक्षा का मामला संज्ञान में आया है। कार्मिक विभाग द्वारा चयनित रेलकर्मी का नाम किन वजहों से बदल गया है, यह जांच का विषय है। निर्देश दे दिए गए हैं, जल्द ही जांच रिपोर्ट आएगी, दोषियों पर कार्रवाई होगी।
- संजय त्रिपाठी, डीआरएम, उत्तर रेलवे
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मामला इंजीनियरिंग विभाग में जेई-पीवे पद पर प्रमोशन का है। इसमें कीमैन, गेटमैन, ट्रैकमैन आदि के लिए गत 23 फरवरी को लिखित परीक्षा हुई थी। यह परीक्षा 12 पदों के लिए थी। इसमें करीब 200 रेलकर्मी शामिल हुए थे। परीक्षा का परिणाम गत 4 अक्तूबर को जारी किया गया। चयनित रेलकर्मियों में 11 नंबर पर रंजन कुमार सिंह का नाम था, जिनके पिता का नाम गोपाल सिंह है और वह ऊंचाहार में गेटमैन के पद पर कार्यरत हैं। इस सूची को जारी करने के बाद कार्मिक विभाग ने शाम को एक भूल सुधार जारी किया। इसमें लिखा कि चयनित रेलकर्मियों की सूची में रंजन कुमार सिंह की जगह रंजन सिंह पढ़ा जाए। रंजन सिंह कीमैन के पद पर लखनऊ में कार्यरत हैं और उनके पिता का नाम अवधेश कुमार सिंह है। इस पर ट्रैक मेंटेंनर एसोसिएशन ने नाराजगी जताई। वहीं ऊंचाहार में तैनात रंजन कुमार सिंह ने कहा कि उनकी जगह जानबूझकर उनके नाम से मिलते-जुलते रंजन सिंह का नाम जोड़ा जा रहा है, जो कि गलत है। फिलहाल मामला मंडल रेल प्रबंधक संजय त्रिपाठी के पास पहुंच गया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच करवाने की बात कही है।
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दो साल से चल रहा है बवाल
दरअसल, इस परीक्षा को लेकर यह बवाल नया नहीं है। 2017 से इसमें धांधलियों के मामले सामने आ रहे हैं। 2017 में लिखित परीक्षा का नोटिफिकेशन आया। लेकिन परीक्षा से एक दिन पहले धांधलियों के चलते एन्क्वायरी शुरू हो गई, जो डेढ़ साल तक चली। इसके बाद फरवरी, 2019 में लिखित परीक्षा करवाई गई, जिसका परिणाम निकालने में अधिकारियों ने आठ माह लगा दिए जो जांच का विषय है।
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कैसे गलत टाइप हुआ पद व पिता का नाम
रंजन कुमार सिंह, ऊंचाहार में गेटमैन है, जबकि रंजन सिंह लखनऊ में कीमैन के पद पर कार्यरत है। सूत्र बताते हैं कि रंजन सिंह परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हुए और जब देखा गया कि रंजन कुमार सिंह का सेलेक्शन हो गया है तो भूल सुधार के बहाने रंजन सिंह का नाम जुड़वाने की कोशिश की गई है। सवाल यह भी है कि अभ्यर्थी के नाम की टाइपिंग में गलती समझ में आती है, लेकिन पद व पिता का नाम भी क्या गलत टाइप हो गया।
खुलेगा कार्मिक विभाग का भ्रष्टाचार
जेई-पीवे की परीक्षा मामले में कार्मिक विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के उजागर होने की भी संभावनाएं जताई जा रही हैं। दरअसल, विभाग में पासपोर्ट एनओसी से लेकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के देयक भुगतानों को लेकर अड़ंगे लगाए जाते हैं। यह स्थिति तब है, जब डीआरएम ने चार्टर बना रखा है।
जल्द आएगी जांच रिपोर्ट
इंजीनियरिंग विभाग में जेई-पीवे की लिखित परीक्षा का मामला संज्ञान में आया है। कार्मिक विभाग द्वारा चयनित रेलकर्मी का नाम किन वजहों से बदल गया है, यह जांच का विषय है। निर्देश दे दिए गए हैं, जल्द ही जांच रिपोर्ट आएगी, दोषियों पर कार्रवाई होगी।
- संजय त्रिपाठी, डीआरएम, उत्तर रेलवे