दिव्यांगजनों में है सामान्य मनुष्य से भी आगे जाने की क्षमता, सही मार्गदर्शन की जरूरत : राज्यपाल
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि दिव्यांगजन के शरीर में यदि कोई कमी होती है तो उसके बदले कोई ऐसी दिव्य विशेषता भी होती है, जो उसे अन्य लोगों से अलग करती है। इसी नाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांग शब्द को हटाकर दिव्यांग नाम दिया था। दिव्यांगजनों में सामान्य मनुष्य से भी आगे जाने की क्षमता होती है। बस उनकी क्षमताओं को देखते हुए उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देने की जरूरत है।
राज्यपाल सोमवार को दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से ‘विश्व दिव्यांग दिवस’ पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह में दिव्यांगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की विशेषता को समाज के सामने लाना होगा ताकि दूसरे लोग उनसे प्रेरणा ले सकें। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगों के लिए चलाई जा रही योजनाओं एवं नए फैसलों की सराहना की। कहा कि राज्य सरकार ने दिव्यांगों को मिलने वाली सहायता राशि 300 से बढ़ाकर 500 रुपये की है। इसी तरह इनके विवाह के लिए मिलने वाली राशि 20 हजार से बढ़ाकर 35 हजार करना सराहनीय कदम है।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा, सरकार दिव्यांगों को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा, ट्रेनों में लोअर बर्थ का आरक्षण और शैक्षिक संस्थाओं में दिव्यांग बच्चों के लिए 5 प्रतिशत सीट आरक्षित रखने जैसे फैसले किए गए हैं।
इस मौके पर राज्यपाल व मंत्री ने दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरित किए। दिव्यांगों के लिए काम करने वाले सर्वश्रेष्ठ कर्मचारियों, प्रेरणा स्रोत, सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी, दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों एवं स्वैच्छिक संगठनों और कक्षा 10 एवं 12 उत्तीर्ण करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। विभाग के अपर मुख्य सचिव महेश गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि निदेशक डॉ. बलकार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। दिव्यांग बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए।
ये हुए सम्मानित
सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग कर्मचारी- आशीष जैन (इलाहाबाद) व अलका भारती (कुशीनगर)
सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी- अमन रिजवी (लखनऊ) व आकांक्षा चौधरी (बिजनौर)
सर्वश्रेष्ठ प्रेरणास्रोत- रुपाली (मेरठ) व कृत वर्मा (बाराबंकी)
दिव्यांगजन के लिए कार्य करने वाले सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति- प्रमिला कटियार (कानपुर देहात) व शंकर लाल गुप्ता (चित्रकूट)
सर्वश्रेष्ठ सृजनशील दिव्यांग वयस्क - जगन्नाथ चक्रवर्ती (पीलीभीत)
सर्वश्रेष्ठ सृजनशील दिव्यांग बालक- सूर्यप्रकाश (बांदा), बालिका- शबीना (लखनऊ)
सर्वश्रेष्ठ ब्रेलप्रेस संस्था- दृष्टिबाधित पुनर्वास संस्थान, नरही (लखनऊ)
सर्वश्रेष्ठ संस्था- पहल विकलांग पुनर्वास केंद्र समिति (कानपुर) व दिव्यांग डवलप सोसाइटी (कानपुर)
सर्वश्रेष्ठ अधिकारी- सी. इंदुमती, विशेष सचिव पर्यटन
सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी- आलोक कुमार सिंह, मिर्जापुर