जुदा हो सकती हैं निदेशक व सचिव पद की राहें
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उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में एक बार फिर निदेशक व सचिव के पद अलग-अलग हो सकते हैं।
प्रदेश शासन में दोनों पदों को अलग करने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। पिछली सरकार में दोनों पद एक साथ कर दिए गए थे। इसी के बाद से निदेशक के पास ही सचिव का भी पद आ गया है।
समाज में विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करने और विज्ञान के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद का गठन किया गया है।
परिषद इसके लिए तरह-तरह के कार्यक्रम कराता रहता है। परिषद में पहले निदेशक के अलावा एक पद सचिव का अलग से होता था। सचिव के पास प्रशासनिक अधिकार होते थे जबकि निदेशक परिषद का मुखिया होता है। लेकिन परिषद में कोई भी काम बगैर दोनों की सहमति के नहीं हो सकते थे।
मायावती सरकार में परिषद के दोनों पदों को एक साथ कर दिया गया था। वर्ष 2010 में हुए शासनादेश के बाद से ही ये दोनों पद एक में समाहित होकर निदेशक के पास आ गए। प्रदेश सरकार एक बार फिर इन दोनों पदों को अलग करने की तैयारी कर रही है।
विभाग के उच्च पदों पर बैठे सूत्रों के मुताबिक दोनों पद एक में समाहित होने के कारण मनमानी होने की आशंका बढ़ जाती है। परिषद में निदेशक के साथ ही सचिव होने से काम में भी आसानी हो जाती है।