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डिजिटल अटेंडेंस:महानिदेशक स्कूल शिक्षा से संगठनों की वार्ता विफल, जारी रहेगा बहिष्कार, सीएम को लिखा पत्र

Tue, 16 Jul 2024 06:30 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 16 Jul 2024 06:30 AM IST
सार

Digital Attendance: सोमवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा की ओर से विभिन्न शिक्षक संगठनों को वार्ता के लिए बुलाया गया। इस बातचीत का कोई निष्कर्श नहीं निकल सका। 

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Digital Attendance: Talks between teacher organizations and Director General of School Education fail, boycott
शिक्षकों की मांग है कि उन्हें 30 ईएल दी जाएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 डिजिटल अटेंडेंस को लेकर चल रहे गतिरोध को समाप्त करने के प्रयास शासन की ओर से शुरू हुए हैं। सोमवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा की ओर से विभिन्न शिक्षक संगठनों को वार्ता के लिए बुलाया गया। इसमें कुछ संगठनों के पदाधिकारी उनसे मिले तो कुछ ने इसका बहिष्कार किया। हालांकि जो संगठन उनसे मिले, उसमें भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला और डिजिटल अटेंडेंस का बहिष्कार जारी रखने का निर्णय लिया गया।

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राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने महानिदेशक स्कूल शिक्षक से निदेशालय में मुलाकात की। 

प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने डिजिटाइजेशन में आने वाली व्यवहारिक समस्याओं से अवगत कराया। डिजिटाइजेशन से पूर्व शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग की गई। साथ ही समस्याओं का निराकरण होने तक डिजिटाइजेशन के बहिष्कार जारी रखने की बात कही गई। प्रतिनिधिमंडल में महेंद्र कुमार, प्रदेश महामंत्री भगवती सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री शिवशंकर सिंह, प्रदेशीय संयुक्त मंत्री प्रदीप तिवारी व रविंद्र पवार, महेश मिश्र शामिल थे।
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वहीं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के साथ हुई वार्ता में उन्होंने मांग उठाई कि विभाग शिक्षकों की मांगों पर क्या कर रहा है। उन्होंने कहा कि नवंबर में भी विभागीय अधिकारियों से वार्ता हुई थी, उसका अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। महिला शिक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना मौर्य के नेतृत्व में भी प्रतिनिधिमंडल ने महानिदेशक से वार्ता की।
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शिक्षकों की प्रमुख मांग
1- अन्य विभागों की भांति शिक्षकों को न्यूनतम 15 हाफ डे लीव दी जाए।
2- शिक्षकों को भी राज्य कर्मचारियों की भांति 30 ईएल दी जाए।
3- बेसिक शिक्षा विभाग में प्रिविलेज अवकाश की व्यवस्था है, इसे दिया जाए।
4- अवकाश के दिनों में काम करने पर प्रतिकर अवकाश दिया जाए।
5- आकस्मिक घटना या आपदा में एक घंटे की अवधि में अनुपस्थित न माना जाए।
6- शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति निःशुल्क कैशलेश चिकित्सा सुविधा दें।

एमएलसी देवेंद्र सिंह ने फिर लिखा सीएम को पत्र

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मुरादाबाद में विरोध जताती महिला शिक्षक - फोटो : अमर उजाला

भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने एक बार फिर शिक्षकों के मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने नौकरशाही पर हमला किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार की छवि शिक्षक और कर्मचारी विरोधी की बन गई है। इसके लिए नौकरशाह और उनके द्वारा लिए गए निर्णय जिम्मेदार हैं। नौकरशाहों द्वारा लिए गए निर्णय सरकार के लिए अभिशाप बन गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों महानिदेशक कार्यालय में हुए निरीक्षण में 85 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए थे। उन्होंने अपने विभाग में डिजिटल हाजिरी नहीं लागू की। पुराना स्मार्टफोन बाजार में 7500 में मिलता है और उसे अधिक मूल पर क्रय करने वाले अधिकारियों ने राजकोष की कितनल लूट की है। नौकरशाही की साजिश से बचना होगा। बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए डिजिटल हाजिरी के निर्णय को वापस लेना होगा।

प्राथमिक शिक्षक संघ ने बीएसए कार्यालयों पर किया प्रदर्शन
संयुक्त मोर्चा के अलावा उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से भी सोमवार को हर जिले में बीएसए कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया गया। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि हर जिले में शिक्षक स्कूल समय के बाद मार्च करते हुए बीएसए कार्यालय गए और वहां प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया। जब तक शासन हमारी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेता, तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा।

चल रही है वार्ता
शिक्षक संगठनों से वार्ता चल रही है। उनकी समस्याओं के समाधान का बेहतर रास्ता निकालेंगे। उन्हें ईएल, सीएल या मेडिकल दी जा सकती है या नहीं, इस पर बात चल रही है। मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श कर इस पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।- संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

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