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Lucknow News: डिजिटल अरेस्ट बुजुर्ग पिता को बेटी ने ठगे जाने से बचाया
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। मड़ियांव स्थित शालीमार कोर्ट यार्ड निवासी और पंचायती राज विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हामिद मुस्तफा (86) को साइबर जालसाजों ने 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और 60 लाख रुपये वसूलने का प्रयास किया। हालांकि, बेटी हुमा की सतर्कता और साइबर क्राइम सेल की तत्परता से बुजुर्ग को ठगी का शिकार होने से बचा लिया गया।
एसीपी साइबर क्राइम सेल सौम्या पांडेय ने बताया कि 8 अप्रैल को हामिद मुस्तफा के पास एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई और आरबीआई का बड़ा अधिकारी बताया। जालसाजों ने हामिद पर मानव तस्करी में संलिप्त होने का आरोप लगाया और उन्हें धमकाकर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। उन्हें सख्त हिदायत दी गई थी कि वे इस बारे में किसी को कुछ न बताएं, वरना परिणाम बुरा होगा।
डिजिटल अरेस्ट के दौरान मुस्तफा का व्यवहार पूरी तरह बदल गया था। वे न तो किसी को अपना मोबाइल छूने दे रहे थे और न ही लैपटॉप। बेटी हुमा को पिता की ये असामान्य गतिविधियां संदिग्ध लगीं। जब हुमा ने उनसे प्यार से बात की, तो बुजुर्ग फूट पड़े और आपबीती सुनाई।
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साइबर सेल ने की घंटों काउंसिलिंग
हुमा ने बिना देरी किए साइबर क्राइम सेल से मदद मांगी। इंस्पेक्टर सुनील सिंह, दरोगा आदिल हसन और सिपाही सनीफ रजा ने मुस्तफा की कई घंटों तक काउंसिलिंग की। टीम ने उन्हें समझाया कि यह धोखाधड़ी है और कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर इस तरह गिरफ्तार नहीं करती। काउंसिलिंग के बाद बुजुर्ग को डर और अवसाद से बाहर निकाला गया।
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एसीपी साइबर क्राइम सेल सौम्या पांडेय ने बताया कि 8 अप्रैल को हामिद मुस्तफा के पास एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई और आरबीआई का बड़ा अधिकारी बताया। जालसाजों ने हामिद पर मानव तस्करी में संलिप्त होने का आरोप लगाया और उन्हें धमकाकर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। उन्हें सख्त हिदायत दी गई थी कि वे इस बारे में किसी को कुछ न बताएं, वरना परिणाम बुरा होगा।
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डिजिटल अरेस्ट के दौरान मुस्तफा का व्यवहार पूरी तरह बदल गया था। वे न तो किसी को अपना मोबाइल छूने दे रहे थे और न ही लैपटॉप। बेटी हुमा को पिता की ये असामान्य गतिविधियां संदिग्ध लगीं। जब हुमा ने उनसे प्यार से बात की, तो बुजुर्ग फूट पड़े और आपबीती सुनाई।
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साइबर सेल ने की घंटों काउंसिलिंग
हुमा ने बिना देरी किए साइबर क्राइम सेल से मदद मांगी। इंस्पेक्टर सुनील सिंह, दरोगा आदिल हसन और सिपाही सनीफ रजा ने मुस्तफा की कई घंटों तक काउंसिलिंग की। टीम ने उन्हें समझाया कि यह धोखाधड़ी है और कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर इस तरह गिरफ्तार नहीं करती। काउंसिलिंग के बाद बुजुर्ग को डर और अवसाद से बाहर निकाला गया।