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UP Election 2022: सातवें चरण में काशी के विकास मॉडल की होगी परीक्षा, भगवा खेमे ने खूब की कोशिश
Mon, 07 Mar 2022 04:26 AM IST
ishwar ashish
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 07 Mar 2022 04:26 AM IST
सार
सातवें चरण के चुनाव में भाजपा की कोशिश काशी के विकास कार्यों की परीक्षा भी होगी। भगवा खेमे ने इसे भुनाने की पूरी कोशिश की है।
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
काशी निखरी है। संवरी है। इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। चुनाव में जिस हिसाब से काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर और अन्य विकास कार्यों को पेश किया जा रहा है, उससे साफ है कि वाराणसी के विकास के लिए जिस ‘मोदी मॉडल’ का ताना-बाना बुना गया, प्रचार किया गया, बिसात पर परीक्षा भी उसी मॉडल की होगी। सिर्फ काशी में ही नहीं, बल्कि आसपास के 9 जिलों की जिन 54 सीटों पर सातवें चरण में चुनाव होना है, वहां भी वाराणसी मॉडल के असर का आकलन किया जाएगा। क्योंकि, इन जिलों के लोगों की ज्यादातर कामों के लिए वाराणसी पर निर्भरता कुछ हद तक तक रहती है। ऐसे में चुनाव के अंतिम चरण में इस बात का भी परीक्षण होगा कि जनता ने पीएम नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल को कितना स्वीकार किया है।
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देखा जाए तो पिछले आठ वर्षों में विश्व के सबसे प्राचीनतम धार्मिक व सांस्कृतिक शहरों में शामिल काशी के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। प्रमुख कामों की फेहरिस्त में आजमगढ़ से मऊ होते हुए गोरखपुर, सोनभद्र, भदोही, जौनपुर से सुल्तानपुर होते हुए लखनऊ, गाजीपुर होते हुए बलिया और चंदौली को फोरलेन से जोड़ने के साथ शहर में कई फ्लाईओवर और शहर के चारों ओर रिंग रोड का निर्माण शामिल है। चिकित्सा के क्षेत्र की बात करें तो काशी हिंदू विश्वविद्यालय मेडिकल संस्थान को एम्स के रूप में तब्दील करने, नए कैंसर अस्पताल के विंग की स्थापना और रेलवे कैंसर अस्पताल को मुंबई के टाटा कैंसर अस्पताल की शाखा के रूप में स्थापित कराने जैसे काम हुए हैं। शहर की पहचान काशी विश्वनाथ मंदिर के भव्य कॉरिडोर का निर्माण सरकार के विकास मॉडल की नई कृति है। इनके अलावा भी वाराणसी के विकास के लिए तमाम कार्य कराए गए हैं।
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वाराणसी शहर के भीतर और बाहरी क्षेत्र में जो भी विकास के काम हुए हैं, उसे प्रदेश सरकार के बजाय केंद्र सरकार का विकास मॉडल माना जाता है। लोग भी इसका श्रेय सिर्फ प्रधानमंत्री और यहां के सांसद नरेंद्र मोदी को ही देते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी महीने में एक या दो बार यहां का दौरा करके विकास कार्यों की गति को बढ़ाते रहे हैं। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से लेकर यहां के सभी विधायक भी इस विकास मॉडल की चर्चा हर मोर्चे पर करते रहे हैं। यह सब इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे पहले के सभी चुनावों में भाजपा नेता गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा जरूर करते थे।
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इस बार के चुनाव में गुजरात के बजाय बनारस के विकास मॉडल की खूब चर्चा हो रही है। वैसे तो विश्वनाथ कॉरिडोर के साथ ही काशी के बदलते रंग-रूप की चर्चा भाजपा ने चुनाव के सभी चरणों में की, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव का परीक्षण सातवें चरण में यहां होने वाले चुनाव में ही होगा। इस बार के चुनाव में यह भी माना जा रहा है कि अंतिम चरण का चुनाव सिर्फ विधायक चुनने के लिए ही नहीं हो रहा है, बल्कि एक तरह से वाराणसी के विकास मॉडल की भी परीक्षा होनी है। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि काशी का विकास मॉडल समीपवर्ती जिलों की जनता पर कितना होगा।