देव दीपावली: दीपों की आभा से जगमग हो उठा सरयू तट, 15 लाख लोगों ने कार्तिक पूर्णिमा पर लगाई डुबकी
कार्तिक पूर्णिमा व परिक्रमा मेले के अंतिम स्नान पर्व पर सोमवार को लाखों श्रद्धालुओं ने सरयू में डुबकी लगाई। रविवार की शाम से ही रामनगरी में भक्तों ने डेरा डाल दिया था।
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रामनगरी में कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा पर देव दीपावली का पर्व उल्लास के साथ मनाया गया। सरयू तट पर मां सरयू की 2100 बाती की महाआरती हुई। वैदिक मंत्रोच्चारों के बीच हुई महाआरती के दौरान सरयू तट जय श्रीराम, जय सरयू मइया...के उद्घोष से गूंजता रहा।
देव दीपावली के अवसर पर रामनगरी के मठ-मंदिरों में भगवान के गर्भगृह को भव्यता पूर्वक सजाया गया। सोमवार की शाम बड़ी संख्या में भक्त सरयू के घाटों पर पहुंचे और मां सरयू की पूजा-अर्चना के साथ ही दीपदान कर मनौतियां मांगी। सरयू की लहरों पर दीपदान से घाटों की आभा निखर उठी थी, मानो ऐसा लग रहा था कि आसमान के तारे जमीन पर उतरकर टिमटिमा रहे हों। सरयू नदी के आस-पास स्थित मठ-मंदिरों व घाटों पर दीपमालाएं सजाई गईं।
आंजनेय संस्थान के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास ने बताया कि देव दीपावली पर मां सरयू की 2100 बाती की महाआरती उतारी गई। संगमरमर के आरती घाट पर सजे दीप व अविरल प्रवाहित सरयू की धारा में दीपों की श्रृ़ंखला अद्भुत आभा बिखेर रही थी। वहीं गुप्तारघाट पर भी 1100 बाती की महाआरती का भव्य आयोजन हुआ। यहां भक्तों की भारी भीड़ मां सरयू के दर्शन-पूजन में लीन रही। वहीं संत तुलसीदास घाट पर करतलिया आश्रम के महंत रामदास के संयोजन में भी 1100 बाती की महाआरती का भव्य आयोजन हुआ। करतलिया आश्रम को भी दीप मालिका से सजाया गया।
15 लाख भक्तों ने लगाई डुबकी, गूंजते रहे जयकारे
कार्तिक पूर्णिमा व परिक्रमा मेले के अंतिम स्नान पर्व पर सोमवार को लाखों श्रद्धालुओं ने सरयू में डुबकी लगाई। रविवार की शाम से ही रामनगरी में भक्तों ने डेरा डाल दिया था। रात के दो बजे से ही सरयू के घाटों पर जयकारे गूंजने लगे। भक्तों की भीड़ ऐसी नजर आ रही थी जैसे सरयू के घाटों ने रामनाम की माला पहन रखी हो। प्रशासन के अनुसार करीब 15 लाख भक्तों ने डुबकी लगाई है।
20-21 नवंबर की रात चौदह कोसी परिक्रमा के साथ आरंभ हुए कार्तिक पूर्णिमा मेले के अंतिम पर्व पर स्नान-दान व दर्शन-पूजन के लिए पूरे दिन भक्तों की भीड़ रही। पूर्णिमा स्नान पर श्रद्धालुओं ने पावन सलिला में डुबकी लगाई और सरयू पूजन-अर्चन के बाद गो दान की परंपरा का निर्वहन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। सूर्योदय के बाद पूर्वाह्न तक चले इस क्रम के साथ मठ-मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब दर्शन-पूजन के लिए जुटने लगा। पौराणिक महत्व की पीठ नागेश्वरनाथ में श्रद्धालुओं ने यथाशक्ति और भक्तिभाव से भोले बाबा का अभिषेक किया। अधिकांश ने सरयू के जल से बाबा को अभिषिक्त किया तो दूध, घ़ृत व शहद से बाबा का अभिषेक करने वालों की संख्या कम नहीं रही।
हनुमंतलला के दरबार पहुंचे दो लाख भक्त
नागेश्वरनाथ मंदिर से भक्तों का कारवां नगरी के आराध्य भगवान राम और उनके प्रिय दूत हनुमंतलला के दरबार के लिए निकल पड़ा। वैष्णव परंपरा की आस्था के केंद्र में रहने वाले कनकभवन आदि मंदिरों में सुबह से दर्शनार्थियों की लगी कतार देर शाम तक कायम रही। हनुमानगढ़ी में भीड़ का दबाव सर्वाधिक रहा। हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने बताया कि मंदिर रात तीन बजे से ही खोल दिया गया था। करीब दो लाख भक्तों ने यहां दर्शन-पूजन किया।
कड़े पहरे में रही रामनगरी
रामनगरी कार्तिक पूर्णिमा पर कड़े पहरे में रही। पूरे मेला क्षेत्र में यातायात प्रतिबंधित लागू किया गया था। श्रीरामअस्पताल, नयाघाट, साकेत पेट्रोल पंप बैरियर, रामसेवकपुरम से किसी भी वाहन केा प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। डीएम नितीश कुमार, आईजी प्रवीण कुमार, एसएसपी राजकरण नैयर, एसपी सुरक्षा पंकज पांडेय समेत अन्य पुलिस अधिकारियों ने मेलाक्षेत्र में कैंप कर रखा था। प्रमुख मठ-मंदिरों के पास मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई थी। पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरे से की जाती रही।