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यूपी: "न्यायपालिका में राजभाषा हिंदी का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी", उप मुख्यमंत्री बोले- ये आम जनता के लिए जरूरी
Mon, 28 Sep 2026 10:39 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Mon, 28 Sep 2026 10:39 PM IST
सार
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अवध बार एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश हिंदी विधि प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह में राजभाषा हिंदी के इस्तेमाल को बढ़ाने में वास्तविक अवरोध विषय पर विचार-विमर्श किया गया।
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उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने न्यायपालिका में राजभाषा हिंदी के इस्तेमाल को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह बात अवध बार एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश हिंदी विधि प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह में सोमवार को कही। इस कार्यक्रम में न्यायपालिका में राजभाषा हिंदी के इस्तेमाल को बढ़ाने में वास्तविक अवरोध विषय पर विचार-विमर्श किया गया।
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इस दौरान पाठक ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और न्यायपालिका में हिंदी का अधिक इस्तेमाल समय की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं और अभिव्यक्ति का माध्यम है। हिंदी सभी को स्वीकार करती है और यह सबकी भाषा है। आजादी के बाद देश में जब पहली बार चुनाव हुए, तब चुनाव लड़ने वाले लोगों में बड़ी संख्या अधिवक्ताओं की थी। उन्होंने देश के लोकतांत्रिक और सांविधानिक विकास में अधिवक्ता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका बताई।
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ब्रजेश पाठक ने कहा कि न्याय व्यवस्था में आमजन की सहज भागीदारी और समझ को बढ़ाने के लिए सरल एवं सुगम भाषा का प्रयोग महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक चली औपनिवेशिक व्यवस्था के प्रभाव के कारण अंग्रेजी को एक विशेष वर्ग की भाषा के रूप में स्थापित किया गया। अब आवश्यकता है कि भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी को न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों में अधिक व्यापक स्थान मिले।
इससे आम नागरिक न्याय व्यवस्था से स्वयं को और अधिक सहजता से जोड़ सकेंगे। इस दौरान न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी, अवध बार एल्डर कमेटी के सदस्य व वरिष्ठ अधिवक्ता मो. आरिफ खान, हिंदी विधि प्रतिष्ठान के देशरतन मिश्रा, संचालक एसएस चौबे मौजूद रहे।