निजी विवि के प्रतिनिधियों व डिप्टी सीएम के बीच हुई मुलाकात, इन बातों पर बनी सहमति
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सरकार ने भी निजी विवि को भरोसा दिया है कि निजी विवि अधिनियम 2018 एकल अधिनियम (अंब्रेला एक्ट) से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कायम रहेगी। वहीं प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों ने प्रवेश व नौकरी में गरीब सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने पर सहमति जताई है।
ये बातें मंगलवार को उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा व निजी विवि के प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित अंब्रेला एक्ट को लेकर हुई बातचीत में सामने आईं।
सचिवालय में हुई बैठक में डिप्टी सीएम डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रदेश में 27 निजी विवि अलग अलग अधिनियम से संचालित है। राज्य सरकार के नीतिगत निर्णय सभी निजी विवि पर लागू करने, निजी विवि से सूचना एवं अभिलेख प्राप्त करने, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता से संबंधित मानकों को लागू करने और उसके अनुश्रवण के लिए कोई प्रक्रिया निर्धारित नहीं है।
इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए सरकार ने अंब्रेला एक्ट प्रस्तावित किया है। बैठक में सभी निजी विवि का एक कॉमन पोर्टल बनाकर उसे राज्य उच्च शिक्षा परिषद की वेबसाइट से लिंक करने, छात्रों का केंद्रीयकृत डाटाबेस बनाने, पाठ्यक्रमों की जानकारी, परीक्षाओं का विवरण, विद्यार्थियों के प्रवेश के मानक, समान शैक्षिक कैलेंडर लागू करने, शिक्षकों की योग्यता व वेतन यूजीसी के मानकों के अनुसार करने और नैक मूल्यांकन अनिवार्य करने जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में लविवि के वीसी प्रो. एसपी सिंह, एकेटीयू के प्रो. विनय कुमार पाठक, डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विवि के मनोज दीक्षित समेत निजी विवि वेलफेयर एसोसिएशन के सुनील गलगोटिया व धनुष सिंह भी शामिल हुए।
इन मुद्दों पर बनी सहमति
- निजी विवि अपना वार्षिक कैलेंडर जारी कर सरकार को सूचित करेंगे।
- अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया पूरा कर 15 सितंबर तक डाटा अपलोड करेंगे।
- निजी विवि किसी भी व्यक्ति को मानद उपाधि देने से पहले सरकार की मंजूरी लेंगे।
- विवि की कार्यकारी परिषद में सरकार के तीन नामित सदस्य होंगे। विवि ही दस सदस्यों का पैनल बनाकर सरकार को देंगे, उसमें से तीन सदस्य सरकार नामित करेगी।
- निजी विवि में भी गरीब सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।
इन पर नहीं बनी बात
- निजी विवि ने फीस निर्धारण सरकार के हाथ में रखने पर असहमति जताई है। विवि एसोसिएशन का तर्क है कि फीस सरकार निर्धारित करेगी तो वे देश के दूसरे विवि से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। इस पर अब मुख्यमंत्री से चर्चा हो सकती है।
- निजी विवि ने कार्यकारी परिषद में सरकार के विशेष सचिव या संयुक्त सचिव को नामित करने पर असहमति जताई है। एसोसिएशन का तर्क है कि सरकारी अधिकारी को सदस्य नामित करने से कामकाज प्रभावित होगा।