सुपरटेक टावर मामला: एसआईटी ने जिन अफसरों को बताया दोषी, विभाग ने दे दी क्लीन चिट
सुपरटेक टावर में छह में से दो मुख्य अग्निशमन और एक अग्निशमन अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। उन्हें क्लीन चिट दे दी गई है।
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सुपरटेक टावर में अग्निशमन विभाग की लापरवाही और अनियमितता को लेकर एसआईटी ने जिन अधिकारियों को दोषी माना और कार्रवाई की संस्तुति की उनमें से चार को विभाग ने क्लीन चिट दे दी। मजे की बात यह है कि जिस अधिकारी के खिलाफ एसआईटी ने कार्रवाई की संस्तुति की थी उसी अधिकारी के हस्ताक्षर से उसी के खिलाफ जांच के लिए समिति बना दी गई। समिति ने उक्त अधिकारी समेत चार को दोषमुक्त बता दिया।
जानकारी के अनुसार सुपरटेक टावर मामले में सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश सरकार ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त संजीव मित्तल की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर विस्तृत जांच कराई थी। जांच में एसआईटी ने अग्निशमन विभाग में 10 जुलाई 2004 से 31 जुलाई 2015 के बीच मेरठ और नोएडा में तैनात रहे 6 तत्कालीन मुख्य अग्निशमन अधिकारी की भूमिका संलिप्त पाई थी। इसमें मेरठ में तैनात रहे आरपी सिंह त्यागी, अरुण चतुर्वेदी, आईएस सोनी, गौतमबुद्घनगर में तैनात रहे महावीर सिंह, अमन शर्मा और मुनेंद्र कुमार त्यागी शामिल थे। एसआईटी ने इनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी।
एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने अग्निशमन विभाग के डीजी को पत्र लिखकर पूरे मामले का परीक्षण कर बिंदुवार आख्या और संलिप्त पाए गए अधिकारियों का लेखा विवरण उपलब्ध कराने को कहा। यहां से अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने खेल करना शुरू कर दिया।
एसआईटी ने गौतमबुद्घ नगर के जिस तत्कालीन मुख्य अग्निशमन अधिकारी अमन शर्मा को अनियमितता में दोषी पाया उसी अमन शर्मा ने बतौर उप निदेशक पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक समिति के गठन का प्रस्ताव एडीजी विजय प्रकाश के पास भेज दिया। समिति में एडीजी अग्निशमन विभाग विजय प्रकाश को अध्यक्ष बनाया गया और सदस्य के रूप में तीन मुख्य अग्निशमन अधिकारी बरेली के चंद्र मोहन शर्मा, लखनऊ के विजय कुमार सिंह और मथुरा के प्रमोद शर्मा को रखा गया।
जांच में नहीं पास किया गया अनापत्ति प्रमाण पत्र व कोई मानचित्र
समिति ने जांच में पाया कि अमन शर्मा ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी रहते हुए न तो सुपरटेक टावर को किसी तरह का अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया और न ही कोई मानचित्र पास किया। बल्कि जो खामियां थीं उन्हें इंगित करते हुए अमन शर्मा ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। ऐसे में इस प्रकरण में उनका दोष साबित नहीं होता।
इसी तरह राजपाल सिंह त्यागी, मुनेंद्र कुमार त्यागी और अरुण चतुर्वेदी के ऊपर लगे आरोपों को भी विभागीय जांच में खारिज कर दिया गया। जबकि आईएस सोनी, महावीर सिंह और तत्कालीन अग्निशमन अधिकारी अभय भान पांडेय की ओर से की गई कार्रवाई में अनियमितता पाई गई है।
विभाग के सूत्रों का कहना है कि अमन शर्मा ने सुपरटेक टावर के बिल्डर को कारण बताओ नोटिस तो जारी किया लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं की, क्या इसमें उनकी संलिप्तता नहीं थी? राजपाल सिंह त्यागी, मुनेंद्र कुमार त्यागी और अरुण चतुर्वेदी ने भी अपनी जिम्मेदारियों को सही से नहीं निभाया, जिसके चलते एसआईटी ने कार्रवाई की सिफारिश की थी।