आशीष की तलाश में लखनऊ में ताबड़तोड़ छापेमारी, बंगले में घुसने की नहीं जुटा पाये हिम्मत
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अंबेडकरनगर के बसपा के पूर्व सांसद राकेश पांडेय के बेटे आशीष पांडेय की नई दिल्ली के पांच सितारा होटल हयात में गुंडागर्दी के बाद मंगलवार दोपहर बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम ने लखनऊ पहुंचकर ताबड़तोड़ छापेमारी की। हालांकि शाम तक आशीष हाथ नहीं आया। डीजीपी ओपी सिंह ने आशीष की तलाश में एसटीएफ को भी लगा दिया है।
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि आशीष पांडेय मूलरूप से अंबेडकरनगर का है। लखनऊ में गोमतीनगर के विभवखंड और गौतमपल्ली स्थित संतुष्टि अपार्टमेंट में रहता है। उसके पिता राकेश पांडेय अंबेडकरनगर से बसपा से विधायक और सांसद रह चुके हैं।
चाचा पवन पांडेय आजमगढ़ से शिवसेना के विधायक थे जबकि छोटा भाई रितेश पांडेय अंबेडकरनगर की जलालपुर सीट से बसपा के विधायक है। आशीष शराब, रीयल एस्टेट व खनन समेत कई कारोबार करता है। उसने सूर्या इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई है जिसका कार्यालय गोमतीनगर के विभवखंड स्थित आवास पर ही है।
मंगलवार को पांच सितारा होटल में खुलेआम पिस्टल लेकर गुंडई का वीडियो वायरल होने के बाद हरकत में आई दिल्ली पुलिस दोपहर बाद करीब चार बजे उसकी तलाश में लखनऊ पहुंची। आरकेपुरम थाना के एसएचओ हरीशचंद्र के नेतृत्व में आई पुलिस टीम सबसे पहले आशीष के संतुष्टि अपार्टमेंट स्थित फ्लैट में पहुंची।
एसएसपी ने बताया कि दिल्ली पुलिस के सहयोग के लिए सरोजनीनगर थाना के प्रभारी निरीक्षक रामसूरत सोनकर को साथ भेजा गया था। पुलिस ने संतुष्टि अपार्टमेंट में आशीष के फ्लैट की करीब डेढ़ घंटे तक तलाशी ली। हालांकि वहां कुछ भी हाथ नहीं लगा।
इसके बाद पुलिस टीम उसके अन्य ठिकानों पर देर रात तक दबिश देती रही। एसएसपी ने बताया कि आशीष की गुंडागर्दी का वीडियो वायरल होने के बाद क्राइम ब्रांच की एक टीम विभव खंड और संतुष्टि अपार्टमेंट स्थित आवास पर लगा दी गई थी। एसटीएफ की एक टीम ने भी दोपहर को दोनों जगह पहुंचकर आशीष के बारे में जानकारी ली।
भीतर से बंद था मकान, घुसने की हिम्मत नहीं जुटा सकी पुलिस
विभवखंड स्थित आशीष के आलीशान मकान के दरवाजे भीतर से बंद थे। दोपहर लगभग दो बजे क्राइम ब्रांच व विभूति खंड थाने की पुलिस के अलावा एसटीएफ की एक टीम मकान पर पहुंची लेकिन पूर्व सांसद और बाहुबली पवन पांडेय के रसूख के चलते किसी की भी भीतर जाने की हिम्मत नहीं हुई। काफी देर तक पुलिस मकान के भीतर की गतिविधियों की टोह लेती रही पर कोई हलचल नहीं दिखी। डोर बेल बजाने पर भी भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो एक पुलिसकर्मी अंदर गया। वहां पता चला कि दरवाजे भीतर से बंद हैं। यानी मकान में कोई न कोई व्यक्ति मौजूद था। पुलिस देर रात तक मकान के बाहर रही लेकिन यह पता नहीं चल सका कि भीतर कौन है। चूंकि मामला रसूखदारों और दबंग राजनेताओं से जुड़ा था, इसलिए किसी ने भीतर जाने की हिम्मत नहीं दिखाई।