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'टुंडे कबाब तो सिर्फ लखनऊ का ही है', हाईकोर्ट ने की टिप्पणी, जानें- क्या था विवाद

Tue, 09 Jan 2018 10:00 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 09 Jan 2018 10:00 AM IST
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delhi highcourt decision on tunde kabab.
- फोटो : amar ujala

असली टुंडे कबाब वही है जो पुराने लखनऊ में 1905 से बेचे जा रहे हैं, इन्हें हाजी मुराद अली ‘टुंडे’ ने बनाना शुरू किया। यह बात दिल्ली हाईकोर्ट में भी आखिरकार साबित हो गई। लखनऊ की पहचान बन चुके टुंडे कबाब को नई दिल्ली में फ्रेंचाइजी के जरिए होटलों में इसी नाम से बेचा जा रहा था, जिसके खिलाफ मोहम्मद उस्मान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने उस्मान के हक में निर्णय दिया।

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उस्मान द्वारा यह याचिका 2014 में दिल्ली के जिस फूड चेन के खिलाफ दायर की गई थी, उसके मालिक मोहम्मद मुस्लिम की ओर से फ्रेंचाइजी कारोबार के तहत होटलों को लखनऊ टुंडे कबाब नाम उपयोग करने दिया जा रहा था। याचिका में उस्मान का कहना था कि 110 साल से अधिक समय से लखनऊ में टुंडे कबाब की दुकान चल रही है। यहां उनका विशिष्ट व्यंजन गलावटी कबाब बेचा जाता है। लेकिन हाल के समय में कबाब बेचने के लिए टुंडे नाम का उपयोग जगह-जगह किया जा रहा है, इसकी वजह से असली टुंडे की पहचान और नाम को नुकसान हो रहा है।
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उस्मान ने हाईकोर्ट में बताया कि हाजी मुराद अली का एक हाथ नहीं था। उन्होंने 1905 में पुराने लखनऊ के गोल दरवाजा गली में कबाब की दुकान शुरू की। उन्हें इस विशिष्ट कबाब के लिए लखनऊ के नवाब द्वारा संरक्षण दिया गया। उनकी वजह से ही ‘टुंडे कबाब’ नाम लोकप्रिय हुआ। इसकी रेसिपी किसी को आज तक जाहिर नहीं की गई है। उस्मान का कहना था कि 1995 में इसे ट्रेड मार्क बनाकर लखनऊ में उनके पिता हाजी रईस अहमद ने अमीनाबाद में दुकान शुरू की थी।

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दी दलील: मेरे परनाना ‌थे हाजी मुराद, इसलिए इस्तेमाल कर रहे नाम

delhi highcourt decision on tunde kabab.

दूसरी ओर मोहम्मद मुस्लिम का दावा था कि हाजी मुराद अली उनके परनाना थे। इसी वजह से वे यह नाम उपयोग कर रहे हैं। हाजी मुराद के कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने अपने अपने भाई की बेटी को गोद लिया था। इस बेटी का विवाह मोहम्मद हनीफ से हुआ जो मोहम्मद मुस्लिम के पिता थे।

निर्णय : दावा साबित नहीं कर पाए मोहम्मद मुस्लिम
सभी पक्षों और साक्ष्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि मोहम्मद मुस्लिम के पक्ष को साबित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं हैं। उनका टुंडे कबाब या टुंडे कबाबी नाम पर क्या अधिकार है, यह वे साबित नहीं कर पाए हैं।

वे जो ट्रेड मार्क उपयोग कर रहे हैं, वह मोहम्मद उस्मान द्वारा उपयोग किए जा रहे ट्रेड मार्क से मिलता जुलता है। ऐसे में इसे कानून का उल्लंघन करार दिया जाता है। उनके पास इसे उपयोग करने का अधिकार नहीं है। मोहम्मद उस्मान की याचिका स्वीकारी जाती है।

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