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आखिर किसे मिलेगा मेट्रो का काम!
ऋषि मिश्र/लखनऊ
Updated Fri, 15 Nov 2013 01:45 PM IST
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दिल्ली सरकार के एक पत्र ने मेट्रो से जुड़े सपने को थोड़ा झकझोर दिया है। दरअसल, दिल्ली सरकार ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को लखनऊ मेट्रो का काम न करने को कहा है।
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फिलहाल इस पत्र के बारे में डीएमआरसी ने कोई भी अधिकृत जानकारी राज्य सरकार और मेट्रो सेल को नहीं दी है। फिर भी हड़कंप की स्थिति है।
दो दिन पहले ही मेट्रो की हाई पॉवर कमेटी (एचपीसी) ने सिविल कार्य के 350 से 400 करोड़ रुपये के बीच होने वाले पहले टेंडर की जिम्मेदारी डीएमआरसी को देने का प्रस्ताव पारित किया है।
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इस बीच में दिल्ली सरकार का यह पत्र मेट्रो निर्माण की राह का रोड़ा न हो जाए, इसकी आशंका पैदा हो गई है।
डीएमआरसी के परियोजना से हटने की दशा में मेट्रो प्रोजेक्ट में विलंब की आशंका बढ़ जाएगी।
मेट्रो सेल के अधिकारियों का कहना है कि वे फिलहाल इस संबंध में कोई भी टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं।
2008 से राज्य की दो सरकारों ने मेट्रो की प्रक्रिया को राजधानी में आगे बढ़ाने में डीएमआरसी का सहयोग लिया है।
पिछली सरकार के बाद सपा के सत्ता में आने के बाद यह कोशिश और तेज हुई। एक रिवाइज डीपीआर बनाई गई।
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उसको मुख्य सचिव को प्रस्तुत किया गया। कै बिनेट से पास करवाया गया। केंद्र सरकार की स्वीकृति के लिए इसको प्रेषित किया जा चुका है। इसके अलावा डीएमआरसी लखनऊ मेट्रो का अंतरिम सलाहकार भी है।
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इसी आधार पर डिजाइन कंसलटेंट के लिए उसने एक टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। जो कि, 21-22 नवंबर तक पूरी हो जाएगी।
अब अमौसी से आलमबाग के बीच सिविल कार्यों के टेंडर की जिम्मेदारी भी डीएमआरसी को सौंपे जाने के बाद यह पत्र जारी हुआ है,जिससे हालातों में सनसनी पैदा हो गई है।
आरवीएनएल और डीएमआरसी आमने-सामने
टर्न-की के आधार पर काम दिए जाने को लेकर लगभग सहमति हो चुकी है। इसमें फिलहाल जो दो कंपनियां सामने आई हैं,वह रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) और दूसरी डीएमआरसी है।
दोनों संस्थाओं ने सीएम के सामने प्रस्तुतीकरण किया है। डीएमआरसी लगभग एक दर्जन शहरों में मेट्रो के कार्यों में किसी न किसी रूप में जुड़ा हुआ है।
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जयपुर का ट्रायल रन हाल ही में हुआ है। जबकि,आरवीएनएल मेट्रो के क्षेत्र में कोलकाता से जुड़ा है। जहां रेलवे ही मेट्रो का संचालन करता है। आरवीएनएल वहां मेट्रो का विस्तार कर रहा है।
डीएमआरसी अब तक जितने भी काम करता है, उसमें छह प्रतिशत सेंटेज लेता है। जबकि,आरवीएनएल का कोलकाता में रेट 9.25 प्रतिशत का है। फिलहाल आरवीएनएल ने लखनऊ के लिए कोई भी प्रस्ताव पेश नहीं किया है।
ऐसे में डीएमआरसी के काम न करने की दशा में आगे राज्य सरकार को अपने मेट्रो प्रोजेक्ट पर फिर से कवायद करनी पड़ सकती है।