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कॉलेजों की मनमानी, नहीं बता रहे कितने शिक्षक हटाए और नई नियुक्ति के भेज रहे आवेदन
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लखनऊ। नए सत्र में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कॉलेजों की ओर से आवेदन पत्र लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंचने लगे हैं, लेकिन अभी तक एक भी कॉलेज ने अपने यहां से हटाए गए शिक्षकों की सूची उपलब्ध नहीं कराई है। ऐसा तब है, जबकि लॉकडाउन में काफी शिक्षकों को नौकरी से निकाला गया है।
राजधानी में उच्च शिक्षा में निजी संस्थाओं की भागीदारी करीब 70 फीसदी है। कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए शासन कई आदेश जारी कर चुका है। इनके अनुसार सभी शिक्षकों की सूची वेबसाइट पर होनी चाहिए। शिक्षकों के नियुक्ति पत्र और नौकरी छोड़ने की सूचना भी विश्वविद्यालय के पास आनी चाहिए। महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में लविवि का ही रोल होता है, इसलिए उनके नियुक्ति पत्र तो उपलब्ध हो जाते है, लेकिन शिक्षकों को हटाने की सूचना अभी भी कॉलेज नहीं दे रहे हैं।
यह है असली खेल
राज्य सरकार के नियमों के अनुसार कॉलेज को मान्यता लेते समय पढ़ाने वाले शिक्षकों का ब्योरा देना होता है। यह अनुमोदन नियमित शिक्षकों के लिए होता है। ऐसा शिक्षक एक साथ दो कॉलेज में नहीं पढ़ा सकता। जानकारों के अनुसार, कॉलेज तय योग्यता वाले शिक्षकों का अनुमोदन करा लेते हैं, लेकिन बाद में अनुमोदित शिक्षकों के बजाय कम वेतन पर अयोग्य शिक्षकों से पढ़ाई करवाते हैं। वहीं जांच होने पर कह देते हैं कि अनुमोदित शिक्षक नौकरी छोड़कर चले गए हैं। इस पर यह आदेश जारी किया गया कि कॉलेजों को नौकरी छोड़ने वाले शिक्षक का ब्योरा तुरंत देना होगा और नए शिक्षक की नियुक्ति करनी होगी। इस तरह से उनका फर्जीवाड़ा सामने आ जाएगा। यही वजह है कि अभी तक लविवि को कॉलेज छोड़ने वाले शिक्षकों की सूचना एक भी कॉलेज ने उपलब्ध नहीं कराई है। इस बारे में उच्च शिक्षा उत्थान समिति के अध्यक्ष जेपी सिंह का कहना है कि स्ववित्तपोषित कॉलेज अच्छे और योग्य शिक्षकों को नौकरी से निकाल देते हैं। उनके बजाय अयोग्य शिक्षकों से पढ़ाई कराई जाती है। इसी वजह से कॉलेज सूचना देने से बच रहे हैं। वहीं लविवि के कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह का कहना है कि शिक्षकों के नियुक्ति पत्र संबंधी व्यवस्था का पालन हो रहा है। अभी तक किसी कॉलेज ने निकाले गए या नौकरी छोड़ने वाले शिक्षक की सूचना नहीं दी है। फर्जीवाड़ा सामने आने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
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राजधानी में उच्च शिक्षा में निजी संस्थाओं की भागीदारी करीब 70 फीसदी है। कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए शासन कई आदेश जारी कर चुका है। इनके अनुसार सभी शिक्षकों की सूची वेबसाइट पर होनी चाहिए। शिक्षकों के नियुक्ति पत्र और नौकरी छोड़ने की सूचना भी विश्वविद्यालय के पास आनी चाहिए। महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में लविवि का ही रोल होता है, इसलिए उनके नियुक्ति पत्र तो उपलब्ध हो जाते है, लेकिन शिक्षकों को हटाने की सूचना अभी भी कॉलेज नहीं दे रहे हैं।
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यह है असली खेल
राज्य सरकार के नियमों के अनुसार कॉलेज को मान्यता लेते समय पढ़ाने वाले शिक्षकों का ब्योरा देना होता है। यह अनुमोदन नियमित शिक्षकों के लिए होता है। ऐसा शिक्षक एक साथ दो कॉलेज में नहीं पढ़ा सकता। जानकारों के अनुसार, कॉलेज तय योग्यता वाले शिक्षकों का अनुमोदन करा लेते हैं, लेकिन बाद में अनुमोदित शिक्षकों के बजाय कम वेतन पर अयोग्य शिक्षकों से पढ़ाई करवाते हैं। वहीं जांच होने पर कह देते हैं कि अनुमोदित शिक्षक नौकरी छोड़कर चले गए हैं। इस पर यह आदेश जारी किया गया कि कॉलेजों को नौकरी छोड़ने वाले शिक्षक का ब्योरा तुरंत देना होगा और नए शिक्षक की नियुक्ति करनी होगी। इस तरह से उनका फर्जीवाड़ा सामने आ जाएगा। यही वजह है कि अभी तक लविवि को कॉलेज छोड़ने वाले शिक्षकों की सूचना एक भी कॉलेज ने उपलब्ध नहीं कराई है। इस बारे में उच्च शिक्षा उत्थान समिति के अध्यक्ष जेपी सिंह का कहना है कि स्ववित्तपोषित कॉलेज अच्छे और योग्य शिक्षकों को नौकरी से निकाल देते हैं। उनके बजाय अयोग्य शिक्षकों से पढ़ाई कराई जाती है। इसी वजह से कॉलेज सूचना देने से बच रहे हैं। वहीं लविवि के कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह का कहना है कि शिक्षकों के नियुक्ति पत्र संबंधी व्यवस्था का पालन हो रहा है। अभी तक किसी कॉलेज ने निकाले गए या नौकरी छोड़ने वाले शिक्षक की सूचना नहीं दी है। फर्जीवाड़ा सामने आने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
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