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यूपी में तरक्की के नए द्वार खोलेगा डिफेंस कॉरिडोर, ढाई लाख लोगों को मिलेगा रोजगार: रक्षा राज्यमंत्री

Wed, 09 May 2018 10:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 09 May 2018 10:15 PM IST
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defence corridor to open new opportunities of development in UP says defence state minister.
रक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष रामराव भामरे व औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना - फोटो : amar ujala

रक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष रामराव भामरे ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से ही भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इसके लिए अमेरिका और चीन समेत कई देशों के उदाहरण हमारे सामने हैं। यूपी में प्रस्तावित डिफेंस कॉरिडोर प्रगति के द्वार खोलेगा। इस कॉरिडोर में निजी और पब्लिक सेक्टर को आगे बढ़ने के लिए एक समान अवसर मुहैया कराए जाएंगे। एमएसएमई सेक्टर को भी मजबूती देने के लिए समुचित कदम उठाए जाएंगे।

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भामरे बुधवार को गोमती नगर के आईआईए भवन में ‘डिफेंस कॉरिडोर इन उत्तर प्रदेश’ विषय पर संवाद में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि कि रक्षा संबंधी उत्पादों के उत्पादन में यूपी को नंबर एक बनाना है। यूपी में अलीगढ़, झांसी, चित्रकूट, आगरा, कानपुर और लखनऊ से गुजरने वाले डिफेंस कॉरिडोर में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए केंद्र सरकार तीन हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। इससे ढाई लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा।
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रक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया में रक्षा सामग्री का सबसे ज्यादा आयात करने वाले देशों में शामिल है। इस तस्वीर को बदलने के लिए हमें रक्षा क्षेत्र में निवेश करने वालों को सुविधाएं मुहैया करानी होंगी, ताकि हम न सिर्फ अपनी जरूरत भर के हथियार और एयरक्राफ्ट बनाएं, बल्कि निर्यात भी कर सकें। हमारे जवान सबसे कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। इसलिए हमारा दायित्व है कि उनकी जरूरत के हथियार और अन्य सामान उन्हें पर्याप्त मात्रा में मुहैया कराया जाए। यूपी का डिफेंस कॉरिडोर काफी सफल होगा, क्योंकि ऑपरेशन कॉस्ट कम होगी।

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डिफेंस कॉरिडोर में विदेशी निवेशकों को भी न्योता

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भामरे ने बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि डिफेंस कॉरिडोर में निजी इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने वालों को भी सरकार तमाम सुविधाएं देगी। इसके लिए 3000 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की जाएगी। प्रदेश सरकार भी 20 हजार करोड़ रुपये निवेश की योजना बना रही है। यहां निवेश करने वालों कई रियायतें दी जाएंगी। हम विदेशी निवेशकों को भी ‘इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनर’ के रूप में आमंत्रित कर रहे हैं। इसके तहत 25 प्रोजेक्ट चिह्नित किए गए हैं।

डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल में बदलाव
भामरे ने कहा कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में स्वावलंबी बनने के लिए डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल में बदलाव किया गया है। लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया और ऑफसेट नीति में बदलाव कर इसे उद्योगों के लिए आसान बनाया गया है।

रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए लाई जाएगी पॉलिसी : महाना
औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा कि प्रदेश सरकार रक्षा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए जल्द ही पॉलिसी लाएगी। इससे पहले उद्यमियों से भी बातचीत की जाएगी, ताकि पॉलिसी एकतरफा न रहे। महाना ने कहा, फरवरी में इन्वेस्टर्स समिट में पीएम ने डिफेंस कॉरिडोर की घोषणा की थी। इसके दो महीने से भी कम समय में समीक्षा के लिए रक्षा मंत्री झांसी पहुंचीं और आज रक्षा राज्यमंत्री हमारे बीच हैं। मौजूदा सरकार ने अधिकारियों के माइंडसेट को चेंज करने का काम किया, जिसका नतीजा तीव्र गति से विकास के रूप में सामने आ रहा है। अगले दो वर्षों में देश में सबसे ज्यादा एक्सप्रेस-वे यूपी में होंगे।

डिफेंस कॉरिडोर पर सितंबर से शुरू हो जाएगा काम

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औद्योगिक विकास आयुक्त अनूपचंद्र पांडेय ने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए प्री फिजिबिलिटी कंसल्टेंट की नियुक्ति कर दी गई है। 31 अगस्त तक फिजिबिलिटी रिपोर्ट के अध्ययन के बाद  एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (ईओआई) मांगा जाएगा। सितंबर से डिफेंस कॉरिडोर पर काम शुरू हो जाएगा। कॉरिडोर से ही कानपुर, लखनऊ, आगरा और झांसी के एमएसएमई क्लस्टर जोड़े जाएंगे। तीन हजार हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की जाएगी।

एमएसएमई सेक्टर में यूपी की संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) 15.26 फीसदी है, जिसे और भी अधिक बढ़ाना है। पांडेय ने बताया कि पिछले सप्ताह वह डिफेंस सेक्टर में निवेश के बाबत बड़े उद्योगपतियों से बात करने अमेरिका गए थे। कई बड़ी कंपनियां यहां निवेश की इच्छुक हैं। यूपी में डिफेंस कॉरिडोर बनने से ऑटोमोबाइल सेक्टर को काफी गति मिलेगी। इस कॉरिडोर में निवेशकों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम कड़ाई से लागू किया जाएगा। एक सेल की स्थापना होगी, जिसमें सेवानिवृत्त सैन्य अफसरों को रखा जाएगा। निवेशकों को रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध कराएंगे।

लखनऊ, कानपुर, झांसी समेत 6 नोड्स चिह्नित
पांडेय ने ‘उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर : विकास की साझेदारी, सुरक्षा की जिम्मेदारी’ विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर डिफेंस कॉरिडोर के लिए 6 नोड्स अलीगढ़, आगरा, झांसी, चित्रकूट, कानपुर और लखनऊ चिह्नित किए गए हैं। इन नोड्स को प्रमुख बंदरगाहों और हवाई अड्डों से कनेक्टिविटी मिलेगी। इस परियोजना के लिए आईआईटी कानपुर टेक्निकल पार्टनर और आईआईटी बीएचयू मैटलर्जी टेक्निकल पार्टनर होंगे।

लाइसेंस प्रक्रिया होगी आसान
केंद्रीय रक्षा मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार राजीब कुमार सेन ने डिफेंस कॉरिडोर पर प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि इसमें लाइसेंस की प्रक्रिया को काफी सरल किया जाएगा। एसआईडीएम के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सुब्रत साह ने कहा कि 2023 तक हम रक्षा उत्पाद निर्यात करने की स्थिति में होंगे। आईआईए के सुनील वैश ने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर में एमएसएमई सेक्टर की भागीदारी की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। आईआईए के महासचिव केके अग्रवाल ने संचालन किया। डिवीजनल चेयरमैन चेतन भल्ला ने आभार जताया।

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