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फैसला : नहीं बेचेंगे प्रतिबंधित मांझा, बेचने वालों को पकड़वाएंगे
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बैठक में मौजूद संगठन के पदाधिकारी और पतंगबाजी से जुड़े लोग।
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ। राजधानी में खतरनाक मांझे से लगातार हो रहे हादसों की वजह से शहर के पतंगबाजों और लखनऊ पतंग विक्रेता और एवं खिलाड़ी एसोसिएशन (एलकेसीए) ने फैसला किया है कि अब संगठन से जुड़ा कोई व्यापारी प्रतिबंधित मांझा नहीं बेचेगा। संगठन के लोग खतरनाक मांझा बेचने वालों को पकड़वाने का काम भी करेंगे।
मंगलवार को खदरा स्थित एक लॉन में हुई बैठक में पतंग, धागा और मांझेे के थोक व फुटकर विक्रेता और पतंगबाज मौजूदगी रहे। यहां खतरनाक मांझे के कारण पतंग उद्योग व कारोबार पर मंडरा रहे संकट के बादल पर चर्चा की गई। सर्वसम्मति से यह निर्णय भी लिया गया कि एसोसिएशन के लोग गुजरात की तर्ज पर सामूहिक रूप से एक निश्चित धनराशि जुटाएंगे। इस धनराशि से बाइक के सामने बांधने वाले फेंडर बांटे जाएंगे, जिससे लोग मांझे की चपेट में आने से बच सकेंगे। इससे पतंगबाजी का शौक और कारोबार दोनों बचा रहेगा।
एलकेसीए के संरक्षक सैयद रिजवी, सचिव यशपाल सोढ़ी, लखनऊ पतंग विक्रेता एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल हमीद और एलकेसीए के पूर्व सचिव रजनीश छिब्बर ने कहा कि इस मुहिम में शहर के पतंग क्लबों से भी हजार-हजार रुपये की सहायता राशि जुटाई जाएगी। इसके बाद फेंडर या फेंस उन इलाकों में निशुल्क बांटे जाएंगे जहां ज्यादा संख्या में हादसे हुए हैं। इसके लिए पांच लोगों की कमेटी बनाई जाएगी। बैठक में तय हुआ कि कोई भी छोटा या बड़ा दुकानदार धारदार मांझा नहीं बेचेगा। सिर्फ 1, 2 और 3 नंबर के धागे ही बेचेगा। ऐसा न करने वालों को संगठन खुद पकड़वाएगा। पतंगबाजों ने कहा कि अब प्लास्टिक, नायलॉन और मछली पकड़ने वाले धागे का भी पतंग उड़ाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस संबंध में शासन में शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
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अभी सिर्फ दावा, हकीकत कोसों दूर
बाइकर्स को फेंडर बांटने का बैठक में भले ही दावा किया गया है, लेकिन इसे अमली जामा पहनाने में काफी कठिनाई है। योजना बनाने वालों की मंशा अच्छी है, लेकिन अभी कोई ठोस मास्टरप्लान नहीं है। योजना बनाने यदि इस पर किसी तरह अमल कर भी लें तो 500 या हजार बाइकर्स को ही फेंडर दे पाएंगे, जबकि राजधानी में दो पहिया वाहनों की संख्या हजारों में है। ऐसे में योजना पर अमल बहुत मुश्किल है।
मांझे पर रोक की पीआईएल पर सुनवाई आज
लखनऊ। जानलेवा मांझे को प्रदेश में सख्ती से प्रतिबंधित करने के आग्रह वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में मंगलवार को समय की कमी की वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने याचिका को 11 फरवरी को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की ओर से 2018 में दायर याचिका पर दिया।
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मंगलवार को खदरा स्थित एक लॉन में हुई बैठक में पतंग, धागा और मांझेे के थोक व फुटकर विक्रेता और पतंगबाज मौजूदगी रहे। यहां खतरनाक मांझे के कारण पतंग उद्योग व कारोबार पर मंडरा रहे संकट के बादल पर चर्चा की गई। सर्वसम्मति से यह निर्णय भी लिया गया कि एसोसिएशन के लोग गुजरात की तर्ज पर सामूहिक रूप से एक निश्चित धनराशि जुटाएंगे। इस धनराशि से बाइक के सामने बांधने वाले फेंडर बांटे जाएंगे, जिससे लोग मांझे की चपेट में आने से बच सकेंगे। इससे पतंगबाजी का शौक और कारोबार दोनों बचा रहेगा।
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एलकेसीए के संरक्षक सैयद रिजवी, सचिव यशपाल सोढ़ी, लखनऊ पतंग विक्रेता एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल हमीद और एलकेसीए के पूर्व सचिव रजनीश छिब्बर ने कहा कि इस मुहिम में शहर के पतंग क्लबों से भी हजार-हजार रुपये की सहायता राशि जुटाई जाएगी। इसके बाद फेंडर या फेंस उन इलाकों में निशुल्क बांटे जाएंगे जहां ज्यादा संख्या में हादसे हुए हैं। इसके लिए पांच लोगों की कमेटी बनाई जाएगी। बैठक में तय हुआ कि कोई भी छोटा या बड़ा दुकानदार धारदार मांझा नहीं बेचेगा। सिर्फ 1, 2 और 3 नंबर के धागे ही बेचेगा। ऐसा न करने वालों को संगठन खुद पकड़वाएगा। पतंगबाजों ने कहा कि अब प्लास्टिक, नायलॉन और मछली पकड़ने वाले धागे का भी पतंग उड़ाने में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस संबंध में शासन में शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
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अभी सिर्फ दावा, हकीकत कोसों दूर
बाइकर्स को फेंडर बांटने का बैठक में भले ही दावा किया गया है, लेकिन इसे अमली जामा पहनाने में काफी कठिनाई है। योजना बनाने वालों की मंशा अच्छी है, लेकिन अभी कोई ठोस मास्टरप्लान नहीं है। योजना बनाने यदि इस पर किसी तरह अमल कर भी लें तो 500 या हजार बाइकर्स को ही फेंडर दे पाएंगे, जबकि राजधानी में दो पहिया वाहनों की संख्या हजारों में है। ऐसे में योजना पर अमल बहुत मुश्किल है।
मांझे पर रोक की पीआईएल पर सुनवाई आज
लखनऊ। जानलेवा मांझे को प्रदेश में सख्ती से प्रतिबंधित करने के आग्रह वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में मंगलवार को समय की कमी की वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने याचिका को 11 फरवरी को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की ओर से 2018 में दायर याचिका पर दिया।

बैठक में मौजूद संगठन के पदाधिकारी और पतंगबाजी से जुड़े लोग। - फोटो : अमर उजाला