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हाईकोर्ट का फैसला, जनता को धार्मिक आयोजन का हक
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Wed, 02 Oct 2013 10:37 AM IST
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लोगों को समाज की शांति बाधित किए बगैर धार्मिक आयोजन करने का हक है। इसके लिए सरकार की शक्ति नियामक (रेगुलेटरी) है और यह मनाही की प्रकृति वाली नहीं है।
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ऐसे में देश के लोगों को समाज की शांति डिस्टर्ब किए बगैर अपनी धार्मिक आस्था का निर्वहन करने की इजाजत दी जानी चाहिए।
सरकार को इसके लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए कि लोग अपने धर्म व आस्था के मुताबिक धार्मिक क्रियाकलाप संपन्न कर सकें।
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को यह अहम टिप्पणी व विधि व्यवस्था सूबे के कई जिलों की अलग-अलग दुर्गा पूजा समितियों की 13 याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए दी है।
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आरोप था कि नवरात्र शुरू होने वाले हैं और संबंधित जिलों का प्रशासन उन्हें दुर्गा पूजा संपन्न करने की अनुमति नहीं दे रहा है। कोर्ट ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि 4 अक्तूबर से दुर्गा पूजा शुरू होने वाली है, इस बारे में प्रशासन को 24 घंटे में इजाजत संबंधी निर्णय करने का निर्देश दिया।
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यह निर्णय इस फैसले की टिप्पणियों व निर्देशों केतहत लिया जाएगा। कोर्ट ने साफ तौर पर इन 13 याची दुर्गा पूजा समितियों को इस फैसले केप्रकाश में दुर्गा पूजा संपन्न करने की इजाजत देने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व अशोक पाल सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला 13 याचिकाओं पर सुनाया। अदालत ने कहा,लोगों केदिमाग में यह आशंका कि उन्हें अपनी धार्मिक आस्था केमुताबिक आयोजन नहीं करने दिया जा सकता, कानून व्यवस्था व प्रजातंत्र केलिए अच्छा संकेत नहीं है।