थाईलैंड में मौत: अब तक नहीं हो सका प्रियंका का पोस्टमार्टम, दिन भर कराते रहे परिजनों को इंतजार, रात में लौटाया
Priyanka Death In Thailand : थाईलैंड के एक होटल में डॉक्टर की पत्नी प्रियंका शर्मा की मौत हो गई थी। उनका शव बुधवार सुबह लखनऊ आ गया था, पर पूरे दिन और रात में पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
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Lucknow woman death in Thailand: स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते बुधवार को दो शवों का पोस्टमार्टम नहीं हो सका। पूरे दिन परिजन, शव मिलने के इंतजार में पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठे रहे। बार-बार उन्हें भीतर बुलाया जाता और फिर कुछ जानकारी लेने के बाद बाहर जाने के लिए कह दिया गया। थोड़ी देर में पोस्टमार्टम होने की बात कहकर कर्मियों ने पूरा दिन निकाल दिया। अंत में देर शाम सात बजे पोस्टमार्टम होने की जानकारी दी गई, लेकिन आधे घंटे बाद कर्मचारी बृहस्पतिवार को आने की बात कहकर चले गए।
हैरानी की बात ये है कि दोनों शव न केवल हत्या जैसे संगीन मामले से जुड़े हैं, बल्कि कई दिन पुराने हैं। पहला मामला थाईलैंड के होटल में संदिग्ध हालात में हुई प्रियंका शर्मा की मौत से जुड़ा है। आठ जनवरी तड़के प्रियंका की मौत के बाद बुधवार सुबह शव केजीएमयू के पोस्टमार्टम हाउस में भिजवाया गया था। एक सप्ताह पुराना शव होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई और दिन भर टालमटोल करते रहे।
दूसरा मामला सुपारी लेकर दूसरे की जगह ई रिक्शा चालक रिजवान की हत्या का है। बुधवार सुबह रिजवान का शव पेपर मिल कॉलोनी स्थित कब्रिस्तान जाकर पुलिस ने कब्र से शव निकलवाया। रिजवान की 30 दिसंबर को हत्या की गई थी। करीब 16 दिन पुराना शव का पोस्टमार्टम करने में तत्परता नहीं दिखाई गई।
स्पष्ट जानकारी नहीं दी, परिजनों को भी करते रहे गुमराह
सुबह से पोस्टमार्टम के इंतजार में दोनों ही परिवार के लोग बैठे थे। कई बार पूछने पर भी पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों व अधिकारियों ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी। दिन भर गुमराह किया गया। शाम करीब 7:30 बजे परिजनों को अगले दिन आने की बात कही गई। परिजनों का आरोप है कि पहले ही अगर उन्हें बता दिया गया होता तो उन्हें दिक्कत न होती
तीन डॉक्टरों के पैनल ने की वरिष्ठ चिकित्सकों की मांग
सीएमओ की ओर से तीन डॉक्टरों का पैनल गठित किया गया था। तीनों चिकित्सकों को पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, पैनल ने दोनों ही प्रकरण गंभीर बताकर वरिष्ठ चिकित्सकों से पोस्टमार्टम कराने की बात कही। इसके बाद दोबारा परामर्श मांगा गया। काफी देर तक इस पर विचार विमर्श होता रहा। आखिरी में कहा गया कि गठित पैनल ही पोस्टमार्टम करेगा। यह सब होते-होते रात हो गई। दिन में शवों का पोस्टमार्टम कराने की बात कहकर परिजनों को लौटा दिया गया।