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जहरीली शराब से मौत: रुपये दिए, अंगूठा लगवाया और कहा - 'ठंड से मौत' बोलोगे तो मिलेगी मदद

Thu, 11 Jan 2018 07:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवा (बाराबंकी)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवा (बाराबंकी) Updated Thu, 11 Jan 2018 07:52 PM IST
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death because of poisonous wine in deva in barabanki.
रीवा रतनपुर में मृतक उमेश के घर के बाहर पूछताछ करते आबकारी अधिकारी - फोटो : amar ujala

देवा क्षेत्र के पांच गांवों में शराब पीने से हुई मौतों की खबर लगते ही आबकारी विभाग सक्रिय हो गया। विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने देवा क्षेत्र के उन गांवों में डेरा डाल दिया जहां के 10 लोगों की मौत हुई।

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मामले को मैनेज करने में जुटे आबकारी विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने मृतक के परिवार वालों को पहले तो पैसे बांटे, उसके बाद क्षेत्रीय शराब ठेकेदारों को मृतकों के घर पर मामले को मैनेज कराने के लिए लगा दिया। इतना ही नहीं पीड़ित परिवारों के परिजनों को बरगलाया कि ठंड से मौत बताओगे तो सरकारी मदद मिलेगी। इसके बाद कागजों पर अंगूठे लगवाकर आबकारी विभाग के लोग चलते बने।
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मिलावटी शराब के कारोबारियों पर कारवाई करने के बजाए आबकारी विभाग द्वारा इस गंभीर प्रकरण को मैनेज किया जाना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। देवा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम रींवा रतनपुर, जसनवारा, सलारपुर, देवगांव, मुनिया पुरवा, ढिंढोरा आदि जगहों पर लोगों की शराब से  मौत के मामले की खबर फैलते ही आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया।
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आनन-फानन में आबकारी विभाग के संयुक्त आयुक्त एएन त्रिपाठी ने देवा क्षेत्र के ग्राम मुनिया पुरवा पहुंचकर मामले की जांच की। बताते हैं कि इस दौरान आबकारी विभाग के लोगों ने पीड़ित परिवारों को नगद रुपए बांटे तथा उनको बरगलाकर कागजों पर मन मुताबिक लिखकर अंगूठा लगवा लिया।

इतना ही नहीं आबकारी विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने मृतकों के गांव के आसपास शराब ठेका दुकानदारों को भी मैनेज करने के लिए लगा दिया। सलारपुर व जसनवारा देसी शराब के ठेका संचालकों को भी पीड़ित परिवारों को रुपया बांट कर अपना नाम न लेने का दबाव बनाते देखे गये। इतना ही नहीं सूत्रों की मानें तो आबकारी विभाग के लोगों ने पीड़ित परिवार के लोगों को यह भी समझाते देखे गए कि मौत का कारण यदि शराब पीना बताओगे तो कुछ नहीं मिलेगा और यदि ठंड से मौत बताओगे तो शासन प्रशासन की मदद पाओगे।

बाराबंकी कांड ने हरे किए जख्म, मौतों के बावजूद जहरीली शराब के धंधे पर लगाम नहीं

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मुनियापुर गांव में जहरीली शराब का शिकार हुए लोगों के परिवारीजनों से पूछताछ करते एसडीएम सदर - फोटो : amar ujala

साल 2015, तारीख 11 जनवरी। वो रविवार का मनहूस दिन था जब जिले के निकटवर्ती ग्रामीण इलाकों में जहरीली शराब पीने वाले 55 लोगों को मौत ने अपने आगोश में ले लिया था। तीन साल बाद भी परिवार वाले उनकी मौत का गम भुला नहीं सके हैं। उन्हें याद कर बरबस ही आंखें भर आती हैं।  बुधवार को बाराबंकी में जहरीली शराब से 11 मौतों ने इनके जख्म को हरा कर दिया। ऐसे में अहम सवाल यह है कि आखिर जहरीली शराब से मौतों का यह सिलसिला कब थमेगा।

बीकेटी, इटौंजा के गांवों में सीमावर्ती जिलों में बनने वाली देसी शराब धड़ल्ले से बिक रही है तो निगोहां के गांवों में उन्नाव के असरेंदा की अवैध शराब चोरी-छिपे लाई जा रही है। नगराम में पुलिस की सख्ती के बाद भी यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। बेहटा किनारे बसे गांवों में तो शाम होते ही शराब की दुकानें सज जाती हैं।

बीकेटी-इटौंजा : सीमावर्ती जिलों से चल रहा अवैध धंधा
बीकेटी व इटौंजा थानाक्षेत्रों के कई गांवों में सीमावर्ती जिले सीतापुर व हरदोई के गांवों में बनने वाली देसी शराब बेची जाती है। कभी-कभार चलाए जाने वाले अभियानों के दौरान दो-तीन लोगों को पकड़कर पुलिस रस्म अदायगी कर देती है। हालांकि बीकेटी के प्रभारी तेजप्रकाश सिंह व इटौंजा के एसएसआई गिरीशचंद्र पांडेय का कहना है कि उनके क्षेत्र में अवैध शराब नहीं बनाई जाती। कुछ लोग चोरी-छिपे अन्य जगहों से खरीद कर देसी शराब की बिक्री करते हैं, तो कार्रवाई की जाती है।

निगोहां : चोरी-छिपे आती है जहरीली शराब

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बाराबंकी में विलाप करते मृतकों के परिवारीजन - फोटो : amar ujala

उन्नाव के असरेंदा में बनने वाली अवैध जहरीली शराब चोरी-छिपे निगोहां लाई जाती है और धड़ल्ले से रंजीतखेड़ा, बैरी, बरवलिया, उतरावां, रानीखेड़ा सहित कई गांवों में बिकती है। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस कार्रवाई तो करती है, लेकिन अवैध धंधेबाजों पर फर्क नहीं पड़ता। 2016 में होली के दौरान जहरीली शराब के साथ पकड़े जाने पर तस्करों ने दो सिपाहियों रामसिंह, आलोक को घायल कर दिया था।

नगराम : धड़ल्ले से फल-फूल रहा अवैध कारोबार
इलाके के करोरा बहरौली, भजाखेड़ा, खतौनी, खवासखेड़ा, हरदोईया, मितौली, कनेरी और नगराम में अवैध शराब का कारोबार करने वाले फल-फूल रहे हैं। पिछली जुलाई से लेकर दिसंबर तक हुई कार्रवाई में पुलिस ने अवैध धंधेबाजों करोरा निवासी अरविंद व फूलमती, खवास खेड़ा निवासी   प्रकाश, असलमनगर निवासी प्रमोद, छतौनी के पुष्प राजू व सुनील को रंगे हाथ दबोचा था। इसके बावजूद अवैध शराब के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा।

काकोरी : धड़ल्ले से बन रही कच्ची शराब

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बाराबंकी में जांच करने पहुंचे अपर पुलिस अधीक्षक। - फोटो : amar ujala

काकोरी के दोना गांव निवासी मजदूर रमेश मौर्या (38) की मौत वर्ष 2015 के दतली कांड में हुई थी। वहीं, बीती जनवरी में शाहपुर गांव में अधिक शराब पीने से बुजुर्ग की मौत हो गई थी। इसके बावजूद काकोरी में दुबग्गा की कई कॉलोनियों सहित बेहटा किनारे बसे गांवों खालिसपुर, लुधौसि, अल्लूपुर, मंडौली, बुधाड़िया, दशहरी, मौरा, बड़ा गांव, काजीखेड़ा व गोमती किनारे बसे सैथा, जेहटा, मौरा समेत दर्जनों गांवों में धड़ल्ले से कच्ची शराब बनाई जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, शाम होते ही धंधेबाज बागों में बनी झोपड़ी व बेहटा नाले किनारे अपनी दुकानें सजाने लगते हैं। पुलिस भी सुविधा शुल्क लेकर कार्रवाई नहीं करती।

माल : पुलिस की नाक के नीचे धधक रहीं भट्ठियां
इलाके में पुलिस की नाक के नीचे बड़े पैमाने पर जहरीली शराब बनाने की भट्ठियां धधक रही हैं। इन पर अंकुश लगा पाने में पुलिस व आबकारी विभाग नाकाम साबित हुआ है। बड़ी संख्या में नौजवान जहरीली शराब की गिरफ्त में आ रहे हैं।

अवैध धंधेबाज शराब को अधिक नशीली बनाने के लिए धतूरा, यूरिया, पशुओं का दूध उतारने वाले ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन, नींद की टैबलेट तथा अन्य जानलेवा रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। शाहमऊ, गौरैया बाजार, गांव हरिहरपुर, सुरतीखेड़ा, थरी, आउमउ, बहरौरा, देवरी आदि दर्जनों गांवों में जहरीली शराब का धंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है।

मोहनलालगंज में साल भर में 101 धरे गए

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बाराबंकी में मृतकों के परिवारीजन।

पुलिस ने सालभर में इंद्रजीत खेड़ा व भरदुआ समेत कई गांवों में 17 भट्ठी, 1951 लीटर कच्ची शराब व भारी मात्रा में लहन बरामद कर 101 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। सख्ती के चलते अवैध शराब के धंधे को छोड़कर लोग दूसरे कामों में लग गए हैं। सीमावर्ती जिलों से लाकर मोहनलालगंज इलाके में शराब बेचने पर भी लगाम लगी है।

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