{"_id":"5bc041b5bdec224fce00f784","slug":"death-anniversary-of-dr-ram-manohar-lohia","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पुण्यतिथिः जब सर्द रात में चारबाग के लिए पैदल ही निकल पड़े थे डॉ लोहिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुण्यतिथिः जब सर्द रात में चारबाग के लिए पैदल ही निकल पड़े थे डॉ लोहिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 12 Oct 2018 12:10 PM IST
विज्ञापन
राम मनोहर लोहिया
- फोटो : डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डॉ राममनोहर लोहिया की आज पुण्यतिथि है। डॉ लोहिया 'हिंद किसान पंचायत' के अध्यक्ष भी थे। किसानों की समस्याओं को लेकर उन्होंने प्रदेश की तत्कालीन गोविंद बल्लभ पंत सरकार के खिलाफ आंदोलन चला रखा था।
प्रसंग 25 जनवरी 1950 का है। अगले दिन रीवा (मध्य प्रदेश ) में किसान पंचायत का अधिवेशन था। डॉ लोहिया को जाना था। मुख्यमंत्री पंत चाहते थे कि डॉ लोहिया आंदोलन खत्म कर दें। प्रधानमंत्री नेहरू का भी दबाव था।
समाजवादी बौद्धिक सभा के दीपक मिश्र बताते हैं, ' डॉ लोहिया यहां न्यू हैदराबाद में रुके थे। रीवां के लिए रेलगाड़ी रात 3 बजे थी। पंत जी ने लोहिया को संदेश भिजवाया, मैं आप से मिलना चाहता हूं। आपको स्टेशन भी छोड़ दूंगा'।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रसंग 25 जनवरी 1950 का है। अगले दिन रीवा (मध्य प्रदेश ) में किसान पंचायत का अधिवेशन था। डॉ लोहिया को जाना था। मुख्यमंत्री पंत चाहते थे कि डॉ लोहिया आंदोलन खत्म कर दें। प्रधानमंत्री नेहरू का भी दबाव था।
विज्ञापन
समाजवादी बौद्धिक सभा के दीपक मिश्र बताते हैं, ' डॉ लोहिया यहां न्यू हैदराबाद में रुके थे। रीवां के लिए रेलगाड़ी रात 3 बजे थी। पंत जी ने लोहिया को संदेश भिजवाया, मैं आप से मिलना चाहता हूं। आपको स्टेशन भी छोड़ दूंगा'।
विज्ञापन
मित्रों ने हवाई जहाज से रीवां भिजवाया
राम मनोहर लोहिया
- फोटो : डेमो
डॉ लोहिया ने जवाब भिजवाया 'आप उम्र में मुझसे बड़े हैं। आप मिलने आएं, यह शिष्टाचार के विरुद्ध है। पर, मैंने आपकी सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन चला रखा है। इसलिए मेरा मिलने आना नीति विरुद्ध है।' लोहिया को स्टेशन पहुंचाने को जनेश्वर मिश्र रिक्शा लेकर पहुंचे।
लोहिया ने रिक्शा वाले को कुछ रुपये देकर विदा कर दिया और जनेश्वर से कहा, 'मैं उस व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन सकता जिसमें एक आदमी दूसरे का शोषण करें।' सर्द रात में वे पैदल ही चारबाग के लिए चल दिए। हालांकि जब स्टेशन पहुंचे तो गाड़ी छूट गई थी सुबह उनके कुछ मित्रों ने हवाई जहाज से लोहिया को रीवां भिजवाया।
लोहिया ने रिक्शा वाले को कुछ रुपये देकर विदा कर दिया और जनेश्वर से कहा, 'मैं उस व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन सकता जिसमें एक आदमी दूसरे का शोषण करें।' सर्द रात में वे पैदल ही चारबाग के लिए चल दिए। हालांकि जब स्टेशन पहुंचे तो गाड़ी छूट गई थी सुबह उनके कुछ मित्रों ने हवाई जहाज से लोहिया को रीवां भिजवाया।