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बेटा खोने का गम मगर उसकी उपलब्धियों पर नाज है हमें
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छह दिन से बेटे से बात नहीं हुई थी...। जरा भी अंदेशा नहीं था कि ऐसा कुछ होगा...। पर, उसकी मौत की खबर आई। कोई पहली बार तो पर्वतारोहण करने गया नहीं था...। माउंट कोर में था। कामद फतह कर चुका था। इतनी कम उम्र में इतनी उपलब्धियां। क्या-क्या गिनाऊं...। पर ये त्रिशूल...?
उत्तराखंड के बागेश्वर में त्रिशूल पर्वत पर हिमस्खलन में जान गंवाने वाले नेवी के लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव (30) के पिता विजेंद्र सिंह का इतना कहते-कहते गला भर आता है।
शब्द लड़खड़ाने लगते हैं। डबडबाई आंखों को पोंछते हुए वह छत को निहारने लगते हैं। मानों शून्य में वह बेटे की तलाश कर रहे हों।
अपने को संभालते हुए फिर बोल पड़ते हैं-बेटे को खोने का गम जरूर है, मगर इतनी कम उम्र में उसकी उपलब्धियों पर हमेशा गर्व रहेगा।
विकासनगर के सेक्टर 12, आनंद पुरम के रहने वाले विजेंद्र सिंह बीकेटी एयरफोर्स स्टेशन से वारंट ऑफिसर पद से रिटायर्ड हैं। वह बताते हैं-बेटा आखिरी बार फरवरी में आया था। मैं और उसकी मां परिजेश रोजाना शाम को उससे फोन पर बातें करते।
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पर छह दिन से बात ही नहीं हो पाई। पहाड़ पर वो गया तो नेटवर्क ही नहीं मिला। क्या करते? रजनीकांत पहली बार तो पर्वतारोहण करने गया नहीं था।
तीन सितंबर को नेवी के अपने चार साथियों के साथ त्रिशूल पर्वत फतह करने निकला था। साथ में एक शेरपा भी था। हम निश्चिंत थे कि बेटा इस बार भी कामयाब होगा। पर....।
क्या मालूम था ऐसी अनहोनी हो जाएगी। फिर उनकी आंखें डबडबा आती हैं। मां परिजेश बिलख पड़ती हैं। गले सूख जाते हैं। कुछ देर बाद खामोशी छा जाती है।
खामोशी को तोड़ते विजेंद्र फिर बोल पड़े। बेटा बचपन से ही मेधावी था। हमेशा कुछ अलग करने की कोशिश करता। साइकिलिंग, तैराकी, रेसिंग....सब उसके शौक थे। शौक ही काहे...कई पुरस्कार भी इनमें जीते। देश का शायद ही कोई कोना हो, जहां वो साइकिल से नहीं गया हो।
साइकिलिंग में तो उसने लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपनी उपलब्धि दर्ज कराई। यहीं अलीगंज के केंद्रीय विद्यालय में पढ़ता था। हाईस्कूल में अपने स्कूल में सबसे अच्छे नंबर लाया था। स्कूल का टॉपर था। इंटरमीडिएट भी अच्छे अंकों से पास किया।
2008 में एनडीए में चयन हो गया। अभी कुछ साल पहले ही तो उसकी शादी हुई। बहू विन्नी बघेल मुंबई में टाटा स्टील में नौकरी करती है। बड़ा बेटा रमाकांत श्रावस्ती में खाद्य सुरक्षा विभाग में कनिष्ठ लिपिक है। सबका रो-रोकर बुरा हाल है।
रिश्तेदार-पड़ोसी...सब सांत्वना दे रहे हैं। पर, दिल को कैसे समझाएं...? फिर वह सिसक पड़ते हैं। घर के अंदर से महिलाओं के सिसकने-बिलखने की आवाज बाहर आने लगती है...।
आज होगा अंतिम संस्कार
ले. कमांडर (नेवी) रजनीकांत इन दिनों मुंबई में आईएनएस पर तैनात थे। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में त्रिशूल पर्वत फतह करने के दौरान हिमस्खलन के चलते रजनीकांत समेत उनका पूरा दल लापता हो गया था। सेना ने हेलीकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाया तो शनिवार को रजनीकांत समेत चार जवानों के शव मिलेे। पिता ने बताया कि सोमवार सुबह नौ बजे बैकुंठ धाम में रजनीकांत का अंतिम संस्कार किया जाएगा। शव आज सुबह आएगा।
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उत्तराखंड के बागेश्वर में त्रिशूल पर्वत पर हिमस्खलन में जान गंवाने वाले नेवी के लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव (30) के पिता विजेंद्र सिंह का इतना कहते-कहते गला भर आता है।
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शब्द लड़खड़ाने लगते हैं। डबडबाई आंखों को पोंछते हुए वह छत को निहारने लगते हैं। मानों शून्य में वह बेटे की तलाश कर रहे हों।
अपने को संभालते हुए फिर बोल पड़ते हैं-बेटे को खोने का गम जरूर है, मगर इतनी कम उम्र में उसकी उपलब्धियों पर हमेशा गर्व रहेगा।
विकासनगर के सेक्टर 12, आनंद पुरम के रहने वाले विजेंद्र सिंह बीकेटी एयरफोर्स स्टेशन से वारंट ऑफिसर पद से रिटायर्ड हैं। वह बताते हैं-बेटा आखिरी बार फरवरी में आया था। मैं और उसकी मां परिजेश रोजाना शाम को उससे फोन पर बातें करते।
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पर छह दिन से बात ही नहीं हो पाई। पहाड़ पर वो गया तो नेटवर्क ही नहीं मिला। क्या करते? रजनीकांत पहली बार तो पर्वतारोहण करने गया नहीं था।
तीन सितंबर को नेवी के अपने चार साथियों के साथ त्रिशूल पर्वत फतह करने निकला था। साथ में एक शेरपा भी था। हम निश्चिंत थे कि बेटा इस बार भी कामयाब होगा। पर....।
क्या मालूम था ऐसी अनहोनी हो जाएगी। फिर उनकी आंखें डबडबा आती हैं। मां परिजेश बिलख पड़ती हैं। गले सूख जाते हैं। कुछ देर बाद खामोशी छा जाती है।
खामोशी को तोड़ते विजेंद्र फिर बोल पड़े। बेटा बचपन से ही मेधावी था। हमेशा कुछ अलग करने की कोशिश करता। साइकिलिंग, तैराकी, रेसिंग....सब उसके शौक थे। शौक ही काहे...कई पुरस्कार भी इनमें जीते। देश का शायद ही कोई कोना हो, जहां वो साइकिल से नहीं गया हो।
साइकिलिंग में तो उसने लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपनी उपलब्धि दर्ज कराई। यहीं अलीगंज के केंद्रीय विद्यालय में पढ़ता था। हाईस्कूल में अपने स्कूल में सबसे अच्छे नंबर लाया था। स्कूल का टॉपर था। इंटरमीडिएट भी अच्छे अंकों से पास किया।
2008 में एनडीए में चयन हो गया। अभी कुछ साल पहले ही तो उसकी शादी हुई। बहू विन्नी बघेल मुंबई में टाटा स्टील में नौकरी करती है। बड़ा बेटा रमाकांत श्रावस्ती में खाद्य सुरक्षा विभाग में कनिष्ठ लिपिक है। सबका रो-रोकर बुरा हाल है।
रिश्तेदार-पड़ोसी...सब सांत्वना दे रहे हैं। पर, दिल को कैसे समझाएं...? फिर वह सिसक पड़ते हैं। घर के अंदर से महिलाओं के सिसकने-बिलखने की आवाज बाहर आने लगती है...।
आज होगा अंतिम संस्कार
ले. कमांडर (नेवी) रजनीकांत इन दिनों मुंबई में आईएनएस पर तैनात थे। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में त्रिशूल पर्वत फतह करने के दौरान हिमस्खलन के चलते रजनीकांत समेत उनका पूरा दल लापता हो गया था। सेना ने हेलीकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाया तो शनिवार को रजनीकांत समेत चार जवानों के शव मिलेे। पिता ने बताया कि सोमवार सुबह नौ बजे बैकुंठ धाम में रजनीकांत का अंतिम संस्कार किया जाएगा। शव आज सुबह आएगा।