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Lucknow News: दया प्रकाश सिन्हा का लखनऊ से रहा गहरा रिश्ता
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दिवंगत दया प्रकाश सिन्हा के साथ एक समारोह में संगीत नाटक अकादमी के पूर्व सचिव तरुण राज। स्वयं
लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निदेशक, यूपी संगीत नाटक अकादमी व ललित कला अकादमी के अध्यक्ष रहे रंगमंच के पुरोधा नाटककार दया प्रकाश सिन्हा के निधन पर शहर के साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों और रंगकर्मियों ने गहरा दुख प्रकट किया है। पूर्व आईएएस दया प्रकाश सिन्हा का लखनऊ से रिश्ता बहुत गहरा रहा। वे यहां कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे और अवध की संस्कृति, कला और कलाकारों के उत्थान के लिए काम किया। साहित्य अकादमी पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, लोहिया सम्मान और हिंदी अकादमी दिल्ली की ओर से साहित्यकार सम्मान समेत अनेकों पुरस्कार व सम्मान से नवाजे जा चुके दया प्रकाश सिन्हा 1986 से लेकर 1988 तक उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष रहे। 1989 से 1991 तक हिंदी संस्थान के निदेशक रहे और 1997 से 2003 तक उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद पर रहे। हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक अमिता दुबे ने कहा कि डॉ. दया प्रकाश सिन्हा हिंदी साहित्य विशेषकर रंगमंच की विशिष्ट शैली के रचनाकार थे। हिंदी संस्थान से प्रकाशित उनकी पुस्तक लोकरंग बेहद चर्चित रही। उनके मार्गदर्शन में पुतुल समारोह का आयोजन रवींद्रालय में हुआ था। इसमें देश-विदेश के कठपुतली कलाकारों ने भाग लिया था।
संस्कृतिकर्मी राजवीर रतन ने कहा कि दया प्रकाश सिन्हा की अगुवाई में शहर में संचालित रंग और सांस्कृतिक गतिविधियां हमेशा याद की जाएंगी। वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी, सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, मृदुला भारद्वाज, प्रभात बोस, अचला बोस, ललित सिंह पोखरिया, चित्रा मोहन, गोपाल सिन्हा, पुनीत खरे, रोजी दुबे, पुनीत अस्थाना, संगम बहुगुणा आदि रंगकर्मियों और हास्य कवि सर्वेश अस्थाना, मुकुल महान, पंकज प्रसून आदि ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
लेखक एक, नाटक अनेक... की एसएनए में हुई थी प्रस्तुति
संगीत नाटक अकादमी के पूर्व सचिव तरुण राज ने बताया कि दया प्रकाश सिन्हा उन्हें अपने पुत्र जैसा स्नेह देते थे। उन्होंने 1986 में अपना उत्सव के माध्यम से देश क पांच राज्यों के कलाकारों को दिल्ली में पहली बार मंच दिया था। संस्कृति विभाग में निदेशक रहते समय उन्होंने यहां के साहित्य, संस्कृति और रंगमंच के उत्थान के लिए अनेकों प्रोग्राम कराए। लखनऊ महोत्सव की भव्यता उन्हीं की देन है। अवध महोत्सव के अलावा रामायण महोत्सव, गंगा महोत्सव समेत प्रदेश के प्रमुख महोत्सवों की रूपरेखा उन्हीं ने तैयार की। तरुण राज ने बताया कि 2022 में उन्होंने दया प्रकाश जी से बात करके उनके ही पांच नाटकों का महोत्सव एसएनए में कराया। इसका शीर्षक था- लेखक एक, नाटक अनेक। पांच दिवसीय महोत्सव में उनके पांच नाटकों का मंचन हुआ। हालांकि अस्वस्थ होने के कारण वे आ नहीं सके लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को भेजा था। तरुण राज ने कहा कि उनके जैसा क्रिएटिव इंसान का जाना बड़ी क्षति है।
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संस्कृतिकर्मी राजवीर रतन ने कहा कि दया प्रकाश सिन्हा की अगुवाई में शहर में संचालित रंग और सांस्कृतिक गतिविधियां हमेशा याद की जाएंगी। वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी, सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ, मृदुला भारद्वाज, प्रभात बोस, अचला बोस, ललित सिंह पोखरिया, चित्रा मोहन, गोपाल सिन्हा, पुनीत खरे, रोजी दुबे, पुनीत अस्थाना, संगम बहुगुणा आदि रंगकर्मियों और हास्य कवि सर्वेश अस्थाना, मुकुल महान, पंकज प्रसून आदि ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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लेखक एक, नाटक अनेक... की एसएनए में हुई थी प्रस्तुति
संगीत नाटक अकादमी के पूर्व सचिव तरुण राज ने बताया कि दया प्रकाश सिन्हा उन्हें अपने पुत्र जैसा स्नेह देते थे। उन्होंने 1986 में अपना उत्सव के माध्यम से देश क पांच राज्यों के कलाकारों को दिल्ली में पहली बार मंच दिया था। संस्कृति विभाग में निदेशक रहते समय उन्होंने यहां के साहित्य, संस्कृति और रंगमंच के उत्थान के लिए अनेकों प्रोग्राम कराए। लखनऊ महोत्सव की भव्यता उन्हीं की देन है। अवध महोत्सव के अलावा रामायण महोत्सव, गंगा महोत्सव समेत प्रदेश के प्रमुख महोत्सवों की रूपरेखा उन्हीं ने तैयार की। तरुण राज ने बताया कि 2022 में उन्होंने दया प्रकाश जी से बात करके उनके ही पांच नाटकों का महोत्सव एसएनए में कराया। इसका शीर्षक था- लेखक एक, नाटक अनेक। पांच दिवसीय महोत्सव में उनके पांच नाटकों का मंचन हुआ। हालांकि अस्वस्थ होने के कारण वे आ नहीं सके लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को भेजा था। तरुण राज ने कहा कि उनके जैसा क्रिएटिव इंसान का जाना बड़ी क्षति है।
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