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विधवाओं के गांव बन गए दतली और खड़ता

Thu, 15 Jan 2015 11:24 AM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 15 Jan 2015 11:24 AM IST
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datli and khadta become villages of widow.

जहरीली शराब ने दतली और खड़ता को पिछले एक दशक में विधवाओं का गांव बना दिया। गुर्दे की खराबी, लिवर की खराबी से कोई तिल-तिलकर मरा तो कोई पीते ही चल बसा। हर तीसरे घर में किसी न किसी का पति जहरीली शराब की बलि चढ़ चुका है।

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ग्रामीण बताते हैं कि 100 से ज्यादा मौतें पिछले एक दशक में शराब के चलते यहां हुईं। यह मौतें शासन-प्रशासन के सामने इसलिए नहीं आ पातीं क्योंकि पुलिस पीड़ित परिवारों को डरा-धमकाकर क्रियाकर्म करा देती है।
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खड़ता के पूर्व प्रधान दयाराम बताते हैं कि इस इलाके में 90 फीसदी मौतें शराब के कारण ही होती हैं। गांव के लोग जहरीली शराब पीकर चंद घंटों में काल के गाल में समा जाते हैं या फिर तिल-तिलकर मरते हैं। गांव में 250 से अधिक परिवार हैं जिनमें सवा दो सौ परिवार के पुरुष शराब पीते हैं। ये सब यहीं की बनी शराब पीते हैं। कई गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं।

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200 परिवारों की ये कहानी

datli and khadta become villages of widow.

दतली गांव के 200 परिवारों में तो सभी की यही कहानी है। किसान लल्लू की पत्नी हो या कैलाश की पत्नी रामरानी,सिद्धेश्वर की पत्नी सिद्धेश्वरी और मंगल प्रसाद की पत्नी सावित्री, सभी एक दशक से चले आ रहे इस सिलसिले का हिस्सा भर हैं।

दयाराम कहते हैं, आदमी चले जाते हैं और भुगतना पत्नियों को पड़ता है। दतली के भगवंत कहते हैं कि अब गांव में पुरुषों से ज्यादा विधवाएं हैं। शायद ही कोई ऐसा घर हो जहां मां-बेटी या बहू में तीनों का सुहाग सुरक्षित हो।

जहरीली शराब पीने से मंगलवार को जान गंवाने वाले खड़ता के राजू की मां शिवरानी कहती हैं, ‘बहुरिया चंदन की पायल की छमछम और चूड़ियों की खनखन से घर-आंगन मा सगुन बना रहत था।’अब बहू का मुरझाया चेहरा देखकर शिवरानी का कलेजा फटा जा रहा है।

गांव के लोगों ने बताया कि राजू के पिता होरीलाल की मौत की वजह भी शराब ही थी। गांव की रामदुलारी के पति सजीवनलाल भी मंगलवार को जहरीली शराब का शिकार हुए हैं। रामदुलारी ने बताया कि छह साल पहले शराब ने देवर शिवकुमार को छीन लिया था।

पहले भी हुई हैं मौतें

datli and khadta become villages of widow.

रामदुलारी ने बताउसके परिवार का भरण-पोषण सजीवनलाल ही कर रहा था। अब शराब उसे भी लील गई। ग्रामीण बताते हैं कि बीते दस साल में दोनों गांव के सौ से भी ज्यादा लोग शराब का शिकार बन चुके हैं।

दतली गांव की मैकादेवी कहती हैं, ‘तीन साल पहिले ओइ अकेला छोड़ि गइ रहैं। तीन लड़िकन का पाला और एक बेटवा का ब्याह करावा।’ मैकादेवी के पति होरीलाल ने जगनू के अड्डे से शराब पी। रात को सोए तो फिर नहीं उठे।

होरीलाल के बेटे रामस्वरूप ने बताया कि उस वक्त गांव में पांच लोगों की मौत हुई थी। खूब हंगामा हुआ। पुलिस को सूचना दी लेकिन कोर्ट-कचहरी का झंझट और डंडे का डर दिखाकर मामला रफा-दफा करा दिया।

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