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Lucknow News: फ्रांसीसी लेखक के नाटक ‘ले पेरे’ से प्रेरित है डैडी
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महानगर में आयोजित प्रेसवार्ता मेंवरिष्ठ रंगकर्मी सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ।
लखनऊ। शहर की सबसे पुरानी नाट्य संस्था दर्पण अपना नया नाटक डैडी लेकर आ रही है। इसका मंचन 25 व 26 जुलाई को संगीत नाटक अकादमी में किया जाएगा। नाटक का निर्देशन कर रहे वरिष्ठ रंगकर्मी सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ ने बताया कि यह फ्रांसीसी लेखक फ्लोरियां जैलर के नाटक ‘ले पेरे’ से प्रेरित है जिसमें डिमेंशिया से पीड़ित बुजुर्ग और उनकी बेटी की संवेदनशील कहानी मंच पर उतरेगी। महानगर में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने यह जानकारी दी। इस दौरान उनके साथ नाटक में मुख्य भूमिका निभा रहे वरिष्ठ रंगकर्मी व फिल्म अभिनेता डॉ. अनिल रस्तोगी भी मौजूद रहे।
सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ ने बताया कि यह नाटक बेटी और पिता के रिश्ते को बहुत गहराई से चित्रित करता है। एक तरफ बेटी की अपनी जिंदगी है, अपने सपने हैं, अपना प्यार है और दूसरी तरफ डिमेंशिया से पीड़ित वृद्ध पिता की देखभाल की ज़िम्मेदारी। नाटक को इस ढंग से परिकल्पित किया गया है कि हमारे दर्शक अपने तर्क-वितर्क को परे रखकर डिमेंशिया के मरीज के दृष्टिकोण से नाटक को देखें और उसके अनुभव से गुजरें।
प्रो. सत्यमूर्ति के नाम से दिया जाए पुरस्कार
डॉ. अनिल रस्तोगी ने कहा कि दर्पण संस्था के संस्थापक प्रो. सत्यमूर्ति ने थियेटर के क्षेत्र में बहुत अहम योगदान दिया है। उनके जन्म शताब्दी वर्ष पर उनकी स्मृति में संस्था नाटकों के मंचन के साथ ही विचार गोष्ठियों का आयोजन कर रही है। डॉ. रस्तोगी ने कहा कि प्रो. सत्यमूर्ति के नाम पर एक पुरस्कार की घोषणा की जाए, इसके लिए हम सभी मिलकर प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि पुरस्कार राशि के लिए अगर हमें मिलकर कुछ योगदान भी देना पड़े तो हम उसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने बताया कि प्रो. सत्यमूर्ति ने दर्पण संस्था की स्थापना 1961 में की थी और 1971 में लखनऊ इकाई की स्थापना की गई थी।
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सूर्यमोहन कुलश्रेष्ठ ने बताया कि यह नाटक बेटी और पिता के रिश्ते को बहुत गहराई से चित्रित करता है। एक तरफ बेटी की अपनी जिंदगी है, अपने सपने हैं, अपना प्यार है और दूसरी तरफ डिमेंशिया से पीड़ित वृद्ध पिता की देखभाल की ज़िम्मेदारी। नाटक को इस ढंग से परिकल्पित किया गया है कि हमारे दर्शक अपने तर्क-वितर्क को परे रखकर डिमेंशिया के मरीज के दृष्टिकोण से नाटक को देखें और उसके अनुभव से गुजरें।
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प्रो. सत्यमूर्ति के नाम से दिया जाए पुरस्कार
डॉ. अनिल रस्तोगी ने कहा कि दर्पण संस्था के संस्थापक प्रो. सत्यमूर्ति ने थियेटर के क्षेत्र में बहुत अहम योगदान दिया है। उनके जन्म शताब्दी वर्ष पर उनकी स्मृति में संस्था नाटकों के मंचन के साथ ही विचार गोष्ठियों का आयोजन कर रही है। डॉ. रस्तोगी ने कहा कि प्रो. सत्यमूर्ति के नाम पर एक पुरस्कार की घोषणा की जाए, इसके लिए हम सभी मिलकर प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि पुरस्कार राशि के लिए अगर हमें मिलकर कुछ योगदान भी देना पड़े तो हम उसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने बताया कि प्रो. सत्यमूर्ति ने दर्पण संस्था की स्थापना 1961 में की थी और 1971 में लखनऊ इकाई की स्थापना की गई थी।
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