डकैत कुसुमा जेल में बनी पुजारन, कभी निकाल लेती थी आंखें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कभी बीहड़ में अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात डकैत कुसुमा नाइन जेल में पुजारिन बन गई है। अनपढ़ होने के कारण वह दूसरे बंदियों से बारी-बारी रामायण और गीता पढ़वाकर सुनती है। कोई भी व्रत वह नहीं छोड़ती।
वह कहती है कि यह सब करने से शायद भगवान पाप कम कर दे। उम्रदराज हो चुकी इस महिला डकैत की दिनचर्या आम बंदियों में चर्चा बन गई है।
कुसुमा नाइन ने बंदियों की मदद से राम लिखना भी सीख लिया है। जब भी खाली होती है तो वह कॉपी में राम-राम लिखने लगती है। रामायण और गीता तो बंदियों से सुबह-शाम सुनना उसकी दिनचर्या में शामिल हो गया है।
कुसुमा नाइन कभी बेहद कुख्यात रही है। वह जिंदा लोगों की आंखे तक निकाल लेती थी। जेल अधीक्षक विजय विक्रम सिंह बताते है कि उसका ज्यादातर टाइम पूजा-पाठ और व्रत रहने में ही कटता है।
डकैतों के गुरू भी बंदियों को दे रहे हैं क्लास
कभी डकैतों के गुरु के नाम से मशहूर रामआसरे तिवारी उर्फ फक्कड़ बाबा भी जिला जेल में बंद हैं। जेल में अब उसकी पहचान आदर्श बंदी के रूप में बन चुकी है। इसके लिए जेल प्रशासन उसे कई बार सम्मानित भी कर चुका है।
कुछ माह पहले आदर्श बंदी चुनने के लिए कराई गई वोटिंग में उसे सबसे ज्यादा वोट मिले थे। जेल पहुंचकर डिप्रेशन में आने वाले बंदियों को फक्कड़ बाबा की क्लास दी जाती है।
वह बंदियों को हर हाल में खुश रहने की सीख देते हैं। कहते हैं कि पाप का फल यहीं भुगतना है। फक्कड़ ने कुसुमा नाइन को रामायण और गीता भेंट की थी।