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साइबर ठगी के शिकार कारोबारी ने चार घंटे में पुलिस को सूचना दे बचाई रकम

Thu, 27 Jun 2019 01:39 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jun 2019 01:39 AM IST
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cyber fraud with young man
युवक से हो गई थी साइबर ठगी, पीड़ित ने चार घंटे में पुलिस को सूचना दे बचाई अपनी रकम
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साइबर ठगी के शिकार अलीगंज निवासी लोहे की ग्रिल के कारोबारी विकास चौधरी ने सक्रियता और जागरूकता से अपनी रकम बचा ली। ठगों ने उनके खाते से डेढ़ लाख रुपये उड़ा दिए थे।
विकास ने चार घंटे के भीतर पुलिस से संपर्क किया जिसके बाद साइबर सेल ने उनके 1.20 लाख रुपये वापस करा दिए। विकास ने साइबर सेल के नोडल अधिकारी सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा से मिलकर आभार जताया है।
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सीओ ने बताया कि विकास चौधरी को ठगों ने बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे अपना शिकार बनाया था। विकास के पास भारतीय स्टेट बैंक का क्रेडिट कार्ड है। साइबर ठगों ने उन्हें फोन कर खुद को बैंक अफसर बताते हुए क्रेडिट कार्ड अपग्रेड कराने का झांसा देते हुए गोपनीय जानकारियां हासिल कर लीं।
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इसके बाद कई बार में उनके खाते से डेढ़ लाख रुपये उड़ा दिए। रुपया निकलने के मेसेज आते ही विकास के होश उड़ गए। रात करीब आठ बजे वह हजरतगंज स्थित साइबर सेल पहुंचे और पुलिस को ठगी की जानकारी दी।
सेल के प्रभारी उपनिरीक्षक राहुल राठौर, सिपाही शरीफ खान, अजय प्रताप सिंह, अखिलेश कुमार सिंह और संतोष कुमार ने बैंक अधिकारियों से संपर्क कर पेमेंट गेटवे की जानकारी ली।
इसके बाद पेमेंट गेटवे पर ही विकास का रुपया रुकवा लिया गया। सिपाही अखिलेश ने बताया कि 30 हजार रुपये ठगों के पास जा चुके थे जबकि 1.20 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन कुछ ही मिनट में होने वाला था।

गेटवे के जरिए एक से दूसरे खाते में ट्रांसफर होती है रकम
सीओ अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि रुपया एक से दूसरे खाते में भेजने के लिए पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल होता है। हर बैंक के गेटवे अलग होते हैं। अगर कोई व्यक्ति खाते से रुपये दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करता है तो वह पेमेंट गेटवे के जरिए भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में कभी-कभी आठ से दस घंटे भी लग जाते हैं। अगर सही समय पर सूचना मिल जाए तो ठगी के शिकार लोगों की रकम को पेमेंट गेटवे पर ही रुकवाया जा सकता है। विकास ने सही समय पर साइबर सेल से संपर्क कर लिया। इसके चलते उनकी रकम बच गई।
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