फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Critically ill patients will receive precise treatment tailored to their needs

Lucknow News: गंभीर मरीजों को मिलेगा जरूरत के मुताबिक सटीक इलाज

Fri, 16 Oct 2026 02:44 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 02:44 AM IST
विज्ञापन
Critically ill patients will receive precise treatment tailored to their needs
केजीएमयू के ब्राउन हॉल में आयोजित प्रेस वार्ता में बोलतीं केजीएमयू कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद।
विज्ञापन


लखनऊ। गंभीर मरीजों को अब उनकी शारीरिक जरूरत और दवाओं के प्रति प्रतिक्रिया के आधार पर सटीक इलाज मिल सकेगा। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) की प्रिसीजन मेडिसिन यूनिट को प्रदेश सरकार ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस-प्रिसीजन मेडिसिन इन एक्यूट केयर घोषित किया है।
कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी देते हुए दावा किया कि क्रिटिकल केयर में इस तरह की सुविधा शुरू करने वाला केजीएमयू देश का पहला संस्थान है। यहां आधुनिक जांच से संक्रमण की जल्द पहचान करने में मदद मिलती है। साथ ही मल्टीप्लेक्स पीसीआर तकनीक से संक्रमण से जुड़ी अहम जानकारी आठ घंटे में मिल सकती है, जबकि पारंपरिक कल्चर जांच में करीब 72 घंटे लगते हैं।
विज्ञापन

निजी क्षेत्र से काफी सस्ती जांच
डॉ. नित्यानंद ने बताया कि क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की यूनिट में 30 से 40 लक्ष्यों की जांच करने वाली मॉलिक्यूलर स्क्रीनिंग करीब दो हजार रुपये में उपलब्ध है। निजी क्षेत्र में इसकी अनुमानित लागत 15 हजार रुपये है। संक्रमण की जल्द पहचान से डॉक्टरों को मरीज के लिए उपयुक्त उपचार चुनने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


जीन और दवा प्रतिरोध की भी होगी जांच
यूनिट में भविष्य में नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग तकनीक विकसित करने की योजना है। इससे रोगजनकों, दवा प्रतिरोध और आनुवंशिक बदलावों का अध्ययन किया जा सकेगा। सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों, नर्सिंगकर्मियों और प्रयोगशाला कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के साथ आणविक निदान, फार्माकोजेनोमिक्स और दवाओं की निगरानी में तीन से छह महीने के फेलोशिप कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं।

यह है प्रिसीजन मेडिसिन
प्रिसीजन मेडिसिन में मरीज की बीमारी, आनुवंशिक बनावट और दवाओं के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया के आधार पर उपचार तय किया जाता है। इसका उद्देश्य इलाज को अधिक प्रभावी बनाना और दुष्प्रभावों का जोखिम घटाना है।

कोविड के बाद हुई पहल

कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद की पहल पर कोविड महामारी के अनुभवों के बाद वर्ष 2021 में यूनिट की परिकल्पना की गई थी। वर्ष 2022 में कार्यकारी समिति से मंजूरी और 2023 में प्रदेश सरकार की स्वीकृति मिली। केजीएमयू के अनुसार, 2023 से अब तक प्रयोगशाला में 80 हजार से अधिक जांचें हो चुकी हैं। प्रदेश सरकार ने 13 अक्तूबर 2026 को इसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित किया।

केजीएमयू के ब्राउन हॉल में आयोजित प्रेस वार्ता में बोलतीं केजीएमयू कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद।

केजीएमयू के ब्राउन हॉल में आयोजित प्रेस वार्ता में बोलतीं केजीएमयू कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed