वैन चालक ने की छात्रा से घिनौनी हरकत
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प्ले ग्रुप में पढ़ने वाली मासूम से स्कूली वैन चालक के घिनौनी हरकत करने का मामला सामने आया है। वैन चालक ने ढाई साल की बच्ची से अश्लील हरकतें कीं और शरीर पर कई जगह नोचने के साथ उसे दांत से काटा।
घर लौटने पर बच्ची मां से लिपटकर रोने लगी। उसके चेहरे पर नोचे जाने के निशान देखकर मां ने बच्ची से पूछा। बच्ची के घटना के बारे में बताने पर वह सन्न रह गईं।
परिवार सदमे में आ गया। दो दिन बाद परिवारीजनों ने गाजीपुर थाना में एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी वैन चालक को गिरफ्तार कर लिया है।
वैन चालक बुधवार सुबह बच्ची को घर छोड़कर गया तो वह मां से लिपटकर रोने लगी। मासूम के चेहरे व गर्दन पर खरोंचों के निशान थे। बच्ची ने रोते हुए जो बताया, सुनकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई।
बच्ची ने कहा, ‘ड्राइवर अंकल ने मारा।’ वहशी ड्राइवर ने मासूम बच्ची के कोमल अंगों को नोंचने-खसोटने के साथ ही दांत से काटा था।
ड्राइवर ने कुबूली अपनी गलती
इंदिरानगर इलाके में रहने वाले दंपती ने पिछले शनिवार को ही अपनी बेटी का एडमिशन प्ले ग्रुप में कराया था।
उन्होंने घर के पीछे ही रहने वाले वैन चालक संजय सोनकर को बेटी को स्कूल से लाने-ले जाने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
बच्ची की मां ने पति को ड्राइवर की करतूत बताई तो उनके भी होश उड़ गए। पेरेंट्स सीधे स्कूल पहुंचे और प्रिंसिपल को जानकारी दी।
सब मिलकर वैन चालक संजय सोनकर को ढूंढने लगे। संजय को पकड़कर पूछताछ की गई तो उसने अपनी गलती कुबूल कर ली।
स्कूल प्रबंधन का दावा है कि वैन स्कूल की नहीं है। बच्चों को घर से लाने और ले जाने के लिए ट्रांसपोर्टर की सेवाएं ली जाती हैं। पैरेंट्स सीधे ट्रांसपोर्टर से ही संपर्क करते हैं।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बच्ची का तीन दिन पहले ही एडमिशन हुआ है। पैरेंट्स ने ट्रांसपोर्टर से सीधे बात करके वैन लगवाई थी। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, ट्रांसपोर्टर ड्राइवरों का वेरिफिकेशन कराता है और सबको परिचयपत्र भी जारी करता है। इसके बावजूद इस तरह की घटना दुखद है।
केस लिखाने को लेकर असमंजस में रहा परिवार
सीओ गाजीपुर दिनेश पुरी ने बताया कि वैन चालक सबसे आखिर में बच्ची को घर छोड़ता था। वैन में अन्य बच्चों के न होने का उसने लाभ उठाया और घिनौनी हरकतें कीं। उससे पूछताछ की जा रही है।
आमतौर पर अभिभावक सोचते हैं कि 2-3 साल के बच्चे ठीक से अपनी बात नहीं कह सकते या उनको समझाया नहीं जा सकता।
इस मानसिकता से बाहर आने की जरूरत है। नेशनल पीजी कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके खत्री के अनुसार छोटे बच्चे अपने साथ होने वाली हर बात को अभिभावकों के सामने व्यक्त करने का प्रयास करते हैं, जरूरत है उनकी भाषा समझने की।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मां की होती है। मां यदि थोड़ा सा ध्यान दें तो बच्चों की हर बात को समझकर उनको सुरक्षित माहौल दे सकती हैं। डॉ. खत्री के अनुसार कुछ खास बातों का ध्यान रखकर बच्चों के साथ होने वाली किसी घटना की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।