नाम मोनू चवन्नी,सिर पर 60 हजार का इनाम
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यूपी और बिहार में ताबड़तोड़ कई वारदातें करने वाले अपराधी सुमित कुमार सिंह उर्फ मोनू चवन्नी को रविवार रात लखनऊ के महानगर इलाके से एसटीएफ ने कार्बाइन के साथ दबोच लिया।
मोनू के साथ उसका गुर्गा चंद्रिका साहनी भी पकड़ा गया। चंद्रिका के पास फैक्ट्री मेड पिस्टल बरामद हुई है। दोनों ने कुबूला कि वे बलिया में एक हत्याकांड के गवाहों की हत्या के लिए असलहे लेने राजधानी आए थे।
मोनू चवन्नी यूपी-बिहार में कई लोगों को रंगदारी वसूलने के लिए धमका रहा था। मोनू पर यूपी पुलिस ने 50 हजार तो बिहार पुलिस ने दस हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
मोनू के पकड़े जाने की सूचना पर बिहार पुलिस भी उससे पूछताछ करने लखनऊ पहुंच गई है। एसटीएफ के एडीजी दलजीत चौधरी व आईजी सुजीत पांडेय ने डीजीपी मुख्यालय में सोमवार को पत्रकारों को मोनू के पकड़े जाने की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बलिया के उभांव थाना क्षेत्र के एक दोहरे हत्याकांड में मोनू चवन्नी ने गवाहों को मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी दे रहा था। उसने कुछ समय पहले गवाहों की हत्या कराने के लिए बदमाश भी भेजे थे लेकिन एसटीएफ को इसकी भनक लग गई थी।
मोनू चवन्नी के सिर पर था हजारों का इनाम
एसटीएफ की सूचना पर स्थानीय पुलिस ने दो बदमाशों को पकड़ लिया था। इसके बाद से मोनू गवाहों की हत्या के लिए खुद तैयारी कर रहा था। इसके लिए वह अपने गुर्गे चंद्रिका के साथ असलहे लेने लखनऊ आया था।
एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक डॉ.अरविंद चतुर्वेदी की टीम को इसकी भनक लग गई और दोनों को महानगर के कुकरैल नाला के पास से दबोच लिया गया।
आईजी ने बताया कि इस कामयाबी के लिए डीजीपी ने टीम को 20 हजार रुपये का इनाम देने का ऐलान किया है।पूछताछ में मोनू ने कुबूला कि उसने अपने गुर्गों के साथ पिछले साल 31 अगस्त को बलिया के थाना उभांव क्षेत्र में विंदेश्वरी मिश्रा और उनके बेटे परशुराम की हत्या कर लाइसेंसी रिवॉल्वर लूट ली थी।
इसी मामले में उसकी गिरफ्तारी के लिए पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। एसटीएफ के मुताबिक लूटी गई रिवॉल्वर के बारे में पूछताछ के दौरान अहम जानकारियां दी हैं।
बिहार में सराफा व्यवसायी को गोलियों से भून डाला था
पिछले साल बिहार के सिवान जिले के टाउन थाना इलाके में मोनू और उसके शूटरों ने सराफा व्यवसायी श्रीकांत भारती को उस वक्त गोलियों से भून डाला था जब वे एक शादी समारोह से लौट रहे थे।
श्रीकांत स्थानीय भाजपा सांसद के प्रवक्ता भी थे। इस मामले में एसटीएफ ने 25 फरवरी को शूटर शैलेंद्र यादव और 11 अप्रैल को विकास पाल को गिरफ्तार किया था।
एसटीएफ के मुताबिक पूछताछ में सामने आया है कि पूर्व सांसद शहाबुद्दीन का मोनू चवन्नी को प्रश्रय हासिल था। शहाबुद्दीन के खास साथी चंदन सिंह ने ही सर्राफा कारोबारी की हत्या कराने के लिए मोनू को लगाया था। एसटीएफ उसके अन्य लिंक के बारे में जानकारी जुटा रही है।
बीए में फेल होने के बाद आया अपराध जगत में
बीए में फेल होने के बाद मोनू चवन्नी ने पढ़ाई छोड़ दी थी और अपराध जगत से जुड़ गया था। कुछ ही समय में उसने अपना गिरोह बना लिया और भाड़े पर हत्या करने लगा। खौफ कायम करने के बाद वह व्यापारियों को धमकाकर रंगदारी वसूलने लगा था।
एसटीएफ के अफसरों के मुताबिक मोनू ने कुबूला है कि उसे कार्बाइन और पिस्टल सिवान के माफिया पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के दाहिने हाथ उपेंद्र सिंह ने दी थी। पर लखनऊ में असलहों के लेने की बात भी वह कह रहा है।
अफसरों का कहना है कि दोनों को रिमांड पर लेकर इस बाबत पूछताछ की जाएगी। कार्बाइन पर सीरियल नंबर है। इससे पता लगाने की कोशिश की जाएगी। वहीं पिस्टल पर जो सीरियल नंबर है वह सिवान के मो. अलाउद्दीन के नाम से जून 2003 में खरीदी गई थी।
एसटीएफ का कहना है कि मोनू चवन्नी यूपी और बिहार के कई व्यापारियों को रंगदारी के लिए धमका रहा था। इन्हीं में से एक बिहार के गोपालगंज जिले के व्यवसायी कृष्णा शाही से 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी जा रही थी। इस बाबत थाना हथुआं गोपालगंज में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।