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साहब का ईनाम: शाबाशी की जगह मिला ट्रांसफर ऑर्डर
निशांत यादव/लखनऊ
Updated Sun, 10 Nov 2013 02:04 AM IST
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यात्री के अपहरण कांड में शामिल गिरोह पर आला अधिकारियों की अनुमति के बिना शिकंजा कसने के बाद सुर्खियों में आए जीआरपी प्रभारी त्रिपुरारी पांडे का स्थानांतरण कर दिया गया है।
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त्रिपुरारी को इलाहाबाद अनुभाग भेजा गया है। फिलहाल उनके स्थान पर अब तक किसी की तैनाती नहीं हुई है।
त्रिपुरारी ने ही सीरियल किलर भाई सलीम, रुस्तम और सोहराब के चारबाग स्टेशन के वेटिंग हॉल में चल रहे गैंग को समाप्त किया था।
12 अक्तूबर को हुए यात्री अपहरण कांड के बाद कड़ी कार्रवाई करने की वजह से जीआरपी के कई अधिकारियों की आंख की किरकिरी बन गए थे।
अपहरण के प्रयास के मामले में फैजाबाद के तारून ब्लॉक की प्रमुख माधुरी सिंह के पति प्रमोद कुमार सिंह का नाम सामने आया।
मौके से पकड़े गए सुमित शर्मा से पूछताछ में एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे हुए। इसके साथ ही 9797 नंबर की गाड़ियां मिलने का सिलसिला सा चल पड़ा।
इसके साथ ही कार का ड्राइवर अर्जुन यादव भी पकड़ा गया और अपहरण में इस्तेमाल कार यूपी 42-पी-9797 को जीआरपी ने नाटकीय तरीके से ओसीआर से बरामद किया।
पूछताछ में पता चला कि प्रमोद कुमार सिंह ने पुलिस की वर्दी देकर गुर्गों को भेजा था। जीआरपी के कई आला अधिकारी पहले तो अगवा के मामले को छिपाने में लगे रहे।
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यहां तक कि पकड़े गए आरोपियों के नाम उजागर करने के बावजूद आरोपी प्रमोद कुमार सिंह को पकड़ने के आदेश तक नहीं दिए गए। इस बीच त्रिपुरारी पांडे ने प्रमोद कुमार सिंह को गिरफ्तार करने के लिए फैजाबाद में कई बार छापेमारी की थी।
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इस कार्रवाई से जीआरपी के एक अधिकारी त्रिपुरारी पांडे से नाराज हो गए। स्थानांतरण के बारे में जानकारी के लिए जब एसपी रेलवे डॉ. मनोज कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।