लखनऊ महोत्सव में तीन ट्रांसफॉर्मर फुंके, जमकर हंगामा

डिजीटल टीम/लखनऊ Updated Wed, 27 Nov 2013 01:14 AM IST
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three transformer get fired in festival

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लखनऊ महोत्सव में मंगलवार को बिजली संकट की वजह से दस्तकारों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। दरअसल, यहां लगे पांच में से तीन ट्रांसफॉर्मर फुंकने के चलते बिजली गुल हो गई।
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इससे नाराज दस्तकारों ने कंट्रोल रूम पर हमला बोल दिया। उन्हाेंने डोर फ्रेम्ड मेटल डिटेक्टर गिरा दिए। कुर्सी-मेजें पलट दीं। करीब एक घंटे तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
इसके बाद पुलिस ने हंगामा कर रहे तीन कश्मीरी दस्तकारों को हिरासत में ले लिया। हालांकि दस्तकारों के दबाव में बाद में उन्हें छोड़ना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि कॉमर्शियल स्टॉलों के लिए बिजली का पूरा ख्याल रखा गया है, जबकि उनके स्टॉलों को भगवान भरोसे छोड़ा गया है। उधर, हंगामे के बाद दो ट्रांसफरों को बदल कर बिजली आपूर्ति सामान्य की गई।

अव्यवस्था से परेशान दस्तकारों का दर्द मंगलवार को उस समय छलक पड़ा, जब शाम करीब सवा पांच बजे लाइट चली गई और लगभग पौने सात बजे तक नहीं आई।

स्टॉलों में अंधेरा देख शिल्पी और वहां आने वाले लोग परेशान हो गए। इसके बाद करीब डेढ़ घंटे तक बिजली न मिलने पर 50 की संख्या में शिल्पियों ने पर्यटन विभाग के कंट्रोल रूम में बवाल शुरू कर दिया।

कुर्सी, मेजें पटक दीं और मुख्य पंडाल के सामने आकर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद दो नंबर गेट पर भी जाकर प्रदर्शन किया।

दस्तकारों का आरोप था कि चार दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक उन्हें सुविधाएं नहीं दी गई हैं, जबकि स्टॉल आवंटित करने के नाम पर दो से चार हजार रुपये वसूले गए।

जनसुविधाओं के नाम पर महोत्सव स्थल पर कुछ भी नहीं है। स्टॉलों के सामने सफाई भी नहीं की जा रही है। इस दौरान पुलिस और अन्य अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारी और उग्र हो गए।

इसके बाद पुलिस ने कश्मीरी शॉल के कारीगर इश्तियाक अहमद और एजाज अहमद समेत तीन लोगों को हिरासत में ले लिया। हालांकि दस्तकारों के दबाव में कुछ देर बाद इन्हें छोड़ दिया गया।

उधर, पौने सात बजे बजे बिजली आने के बाद लोग शांत हुए। इस बारे में समिति के लोगों ने बताया कि इलाके में कहीं बड़ा फॉल्ट हो गया था, जिसे ठीक करने का कार्य चल रहा था।

इसी वजह से महोत्सव स्थल पर भी बिजली नहीं आ रही थी। इस बात की जानकारी शिल्पियों को दी गई, लेकिन वह अपनी ही बात पर अडे़ थे।
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