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बीटेक कर रहे दो इनामी समेत तीन बदमाश दबोचे
संजय त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 04 Feb 2014 10:05 AM IST
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चिनहट पुलिस व सर्विलांस सेल की संयुक्त टीम ने रविवार रात बीबीडी ग्रीन सिटी के पास घेराबंदी करके दो इनामी समेत तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो बीबीडी कॉलेज में बीटेक के छात्र हैं।
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तीनों डोनेशन देकर दाखिला लेने वाले छात्रों को धमकाकर रंगदारी वसूलते थे। रंगदारी देने से इन्कार पर डेढ़ महीने पहले एक छात्र पर देशी बम से हमला किया था।
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रंगदारी न देने पर बीबीडी के छात्र राजगौरव पांडेय पर 27 दिसंबर 2013 को देशी बम से हमला करने वाले बदमाशों को सर्विलांस सेल ने आखिरकार पकड़ लिया।
लोकेशन मिलने पर टीम ने देर रात चिनहट पुलिस के साथ बीबीडी ग्रीन सिटी के पास घेराबंदी की और बीबीडी में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र राहुल द्विवेदी उर्फ आरडी, वीरेंद्र विक्रम सिंह व दीनबंधु कुशवाहा को गिरफ्तार किया।
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उनके कब्जे से पांच मोबाइल व अन्य सामान बरामद हुआ। पकड़े गए छात्रों में राहुल द्विवेदी व वीरेंद्र विक्रम पर पांच-पांच हजार का इनाम घोषित है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि राहुल व वीरेंद्र ने कॉलेज में दबदबा बना रखा था।
दोनों डोनेशन देकर दाखिला लेने वाले छात्रों के बारे में जानकारी करते। इसके बाद उन्हें धमकाकर रंगदारी वसूलते थे। राहुल इलाहाबाद के मऊआइमा थाने के बेकीपुर गांव का रहने वाला है और विकासनगर के सुइल अपार्टमेंट के एक फ्लैट में रह रहा था।
गोरखपुर कस्बा गगहा निवासी वीरेंद्र भी उसके साथ रहता था, जबकि देवरिया के लार थाने के गांव भदवा पांडेय निवासी दीनबंधु कहीं और रहकर उनसे जुड़ा था। तीनों ने अन्य साथियों की मदद से राजगौरव पांडेय से रंगदारी मांगी थी।
इन्कार करने पर 27 दिसंबर को गोयल कॉम्प्लेक्स स्थित उसके आवास पर जा धमके। मारपीट के साथ देशी बम से हमला कर दहशत फैलाई थी। दोनों छात्रों को कॉलेज से पहले ही निकाला जा चुका है।
पुलिस-पीएसी कर्मी के बेटे बने अपराधी
छात्रों से रंगदारी वसूलने व इन्कार पर देशी बम से हमले के आरोपी राहुल ने के पिता दीनानाथ द्विवेदी पुलिस में एचसीपी (एक स्टार के दरोगा) हैं। वीरेंद्र विक्रम के पिता अरविंद सिंह पीएसी में सिपाही हैं।
दोनों ने बेटों को इंजीनियर बनाने के लिए काफी रुपये खर्च कर बीबीडी में दाखिला कराया था। दोनों लड़के शाही खर्च में दिक्कत आने पर रकम कमाने का उपाय खोजने लगे। डोनेशन देकर दाखिला लेने वाले लड़कों के ठाठबाट देख उनसे रकम ऐंठने की योजना बनाई।
कुछ बिगड़ैल लड़कों को साथ जोड़ा। रंगाबाजी कायम करने के लिए झुंड बनाकर परिसर में घुमते और वसूली करते। इस रकम से फ्लैट में रहने के साथ ऐशोआराम की जिंदगी जीने लगे।