यहां 'डॉन' के बॉडीगार्ड की तरह घूमती रही दिल्ली पुलिस
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हाथ में मोबाइल फोन...मुंह में पान...सलाम करने वाले गुर्गे और ‘बॉडीगार्ड’
डॉन सलीम ने गुरुवार सुबह जैसे ही शहर में कदम रखे, रेलवे का हाईक्लास वेटिंग हॉल सलीम की ससुराल बन गया। पत्नी लजीज बिरयानी लेकर आई तो ‘डॉन’ के साथ-साथ गुर्गों ने भी लुत्फ लिया।
करीब साढ़े छह घंटे तक वेटिंग हॉल के रजिस्टर में बिना इंट्री के ‘डॉन’ टिका रहा। इस दौरान उसके गुर्गे आगे-पीछे लगे रहे। सलीम ‘धंधे’ की जानकारी भी लेता रहा।
कुछ खास टिप्स देने होते तो गुर्गों के कान में फुसफुसाता। जीआरपी ने भी उसे ‘डिस्टर्ब’ करने की हिम्मत नहीं की। लखनऊ मेल के प्लेटफार्म पर आते ही शनिवार को फिर आने की बात कहकर ‘डॉन’ ने सबसे विदाई ली।
दिल्ली से लखनऊ पहुंचते ही सलीम ने स्टेशन पर इंतजार कर रहे अपने लोगों से मुलाकात की। कुछ देर तक बातचीत के बाद हाईक्लास वेटिंग हॉल में नहा-धोकर थकान मिटाई।
लगभग रोज पेशी पर आने वाले ‘डॉन’ को तो अब वेटिंग हॉल का स्टाफ भी अच्छी तरह से पहचान गया है। स्टाफ ने भी ‘डॉन’ को सलाम बजाकर अपनी हाजिरी दर्ज कराई।
इस बीच साथ आए भाई सोहराब के इशारे पर गुर्गों ने ‘डॉन’ के मनपसंद खाने का इंतजाम कर दिया। यहां से भारी सुरक्षा में कचहरी पहुंचे सलीम ने वकील के इशारे पर एक कागज पर साइन किया और बाहर निकल आया। इस दौरान उसके पीछे गुर्गों की फौज चलती रही।
कचहरी में माहौल गरम था इसलिए सलीम एक पल भी नहीं रुका। इशारा किया-स्टेशन पहुंचो। दोपहर तीन बजे दिल्ली पुलिस के जवानों के साए में ‘डॉन’ रेलवे स्टेशन के वेटिंग हॉल पहुंचा तो आवभगत का सिलसिला फिर शुरू हो गया।
पुलिस लाइन के दरोगा सुदामा यादव और एके-47 लिए चार सिपाही वेटिंग हॉल के बाहर पहरा दे रहे थे तो दिल्ली पुलिस के जवान भीतर। सलीम के पहुंचते ही वेटिंग हॉल में खलबली सी मच गई।
रात 10.10 बजे लखनऊ मेल आने पर ‘डॉन’ ने सबसे विदाई ली। जाते-जाते शनिवार को मिलने की बात कह गया।
‘पॉलिटिक्स अपने बस की नहीं’
छावनी परिषद के जिस चुनाव को लेकर पूर्व सभासद पप्पू पांडे की हत्या की आशंका जताई जा रही थी, ‘अमर उजाला’ से बातचीत में सलीम ने उससे किनारा कर लिया।
बोला-‘पॉलिटिक्स अपने बस की नहीं। न पत्नी के बस की है।’ सलीम ने साफ कहा कि पत्नी को चुनाव लड़ाने का कोई इरादा नहीं है। बकौल सलीम, ‘माँ भी नहीं चाहतीं। उन्होंने किसी को भी चुनाव न लड़ने की बात कही है।’
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मतदाता सूची से कटेंगे नाम
पिछले आठ साल से जेल में रहने के बावजूद सीरियल किलर भाइयों के नाम छावनी परिषद की मतदाता सूची में शामिल होने के मामले की जांच शुरू हो गई है।
छावनी परिषद प्रशासन ने गुरुवार को वार्ड संख्या छह की मतदाता सूची मंगाकर सलीम, रुस्तम और सोहराब के नाम हटाने के लिए दोबारा सर्वेक्षण के आदेश दिए हैं। सर्वेक्षण की रिपोर्ट आने के बाद तीनों के नाम सूची से काट दिए जाएंगे।
कोर्ट ने लिया संज्ञान, अब नहीं होगी पेशी
अब सीरियल किलर्स की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। उन्हें
पेशी के लिए नहीं ले जाया जाएगा। लखनऊ जिला कोर्ट के जज के के शर्मा ने यह
फैसला सुनाया। कोर्ट का यह फैसला उस वक्त आया है जब सीरियल किलर सलीम गुरुवार को लखनऊ पेशी पर आया था और अपनी जमकर खातिरदारी करवाई थी।